सिंध के घोटकी में हिंदू शिक्षक पर ईश निंदा का आरोप

- Author, शुमाइला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, घोटकी ,पाकिस्तान से
पाकिस्तान में एक स्कूल के शिक्षक पर ईश निंदा का आरोप लगा है. इसके बाद स्कूल की इमारत और मंदिर में तोड़फोड़ किए जाने की घटना सामने आई है.
दक्षिणी सिंध प्रांत के घोटकी ज़िले में हिंदू और मुसलमान हमेशा से ही साथ-साथ रहते आए हैं. दोनों ही धर्म के लोग एक-दूसरे के त्योहारों, शादियों और अंतिम संस्कारों में भाग लेते हैं. हिंदू और मुसलमान समुदाय के लोगों में अच्छी दोस्ती है.
यहां रहने वाले लगभग चार हजार हिंदू परिवार स्थानीय मुसलमानों की तुलना में आर्थिक रूप से बेहतर हैं. इस ज़िले के 80 प्रतिशत व्यवसाय को भी यही लोग चलाते हैं.
दो दिन पहले गुस्साई भीड़ का एक स्कूल की इमारत में तोड़फोड़ करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में बताया गया कि एक हिंदू शिक्षक जो कि स्कूल के मालिक भी हैं, उन पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ़ टिप्पणी करने व ईशनिंदा का आरोप लगा है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार यह सब प्रोफ़ेसर नूतन लाल की क्लास में हुई बहस के साथ शुरू हुआ. उस समय प्रोफ़ेसर उर्दू पढ़ा रहे थे. इस क्लास के बाद उनके एक छात्र ने अपने इस्लामियात के शिक्षक के पास जाकर आरोप लगाया कि नूतन लाल ने पैगंबर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है.
जंगल की आग की तरह फैली ख़बर

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पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा कानून के तहत पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा करने पर मौत की सजा का प्रावधान है.
पुलिस का कहना है कि शुरूआत में स्कूल के शिक्षकों ने स्कूल में ही इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की. प्रोफेसर नूतन ने भी माफी मांगी और कहा कि उनका इरादा किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का नहीं था.
लेकिन छात्र ने इस घटना को अपने पिता के साथ साझा किया और इसके बारे में फेसबुक पर पोस्ट भी लिखा.
14 सितंबर की रात को गुस्साई भीड़ ने स्थानीय पुलिस थाने में संपर्क कर प्रोफेसर के खिलाफ़ ईशनिंदा के आरोप में शिकायत दर्ज करने की मांग की.
घोटकी के एसएसपी डॉ.फारुख अली ने कहा कि पुलिस ने शुरुआत में भीड़ को सांत्वना देने की कोशिश की लेकिन लोग प्रोफेसर के खिलाफ़ ईशनिंदा का मामला दर्ज होने तक पीछे नहीं हटे.
इलाके यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. अगली सुबह लगभग 11 बजे नारेबाज़ी करते हुए गुस्साई भीड़ नूतन के स्कूल घुस गई. भीड़ ने इमारत में तोड़फोड़ की और स्कूल के फर्नीचर को भी नुकसान पहुंचाया. स्कूल पर हमला करने के बाद वे लोग पास के एक मंदिर की ओर निकल गए.
विक्रम लाल उस वक्त मंदिर के अंदर ही थे. वो बताते हैं, "हमने कुछ शोर सुना, ऐसा लगा कि भीड़ बाहर थी. वे लोग नारे लगा रहे थे तभी अचानक वे ईंटों को इमारत पर फेंकने लगे."
जब भीड़ मंदिर के पास पहुंची तो परिसर के बाहर छह पुलिसकर्मी तैनात थे. मंदिर में चल रहे निर्माण की वजह से बाहरी गेट खुला हुआ था. पुलिसकर्मियों ने अधिकारियों को सूचित किया. लेकिन जब तक और फोर्स पहुंचती तब तक कुछ प्रदर्शनकारी अंदर घुस गए थे.
विक्रम लाल ने बताया कि मंदिर के अंदर पांच लोग मौजूद थे. उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया और अपनी जान बचाने के लिए ऊपर की तरफ़ भागे.
उन्होंने बताया, "हम छत पर जाकर एकदम सीधे लेट गए. नीचे से आवाज़ तेज़ होती जा रही थी और हम जानते थे कि उनमें से कुछ लोग अंदर घुस गए थे. वे चीजें तोड़ रहे थे. हम खिड़की के शीशे टूटने की आवाज़ साफ़ सुन सकते थे."
विक्रम के अनुसार दस मिनट के बाद चीज़ें शांत हो गईं. उन्हें पुलिसकर्मियों ने नीचे आने के लिए कहा.
विक्रम अपनी उंगलियों को गुस्से से दबाते हुए कहते हैं, "जब हम नीचे उतरे और मंदिर का हाल देखा तो मेरे अंदर डर कम और गुस्सा ज्यादा था."
हालात पर क़ाबू पाने की कोशिश

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उस दिन प्रदर्शनकारियों ने राजमार्गों को भी बाधित किया और कुछ दुकानों को भी लूटा गया. शहर की स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कानून व्यवस्था बहाल करने में पुलिस की सहायता के लिए पैरा मिलिट्री फोर्स रेंजर्स को भी तैनात किया गया.
मानवाधिकार कार्यकर्ता राजा मुजीब ने बीबीसी को बताया कि वह, उनके जैसी विचारधारा रखने वाले दोस्त और कुछ समर्थक इस स्थिति को डर के साथ देख रहे थे. लेकिन उन्होंने इस बारे में चुप नहीं रहने का फैसला किया. उन लोगों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और शहर में शांति रैली निकालने की योजना बनायी.
उन्होंने बताया, "हम डरे हुए थे क्योंकि वे कट्टर लोग हमें भी नुकसान पहुंचा सकते थे. लेकिन हमने साहस दिखाया."
मुजीब ने बताया कि कार्यकर्ता भले ही गिनती में पचास से भी कम थे, लेकिन जब उन्होंने अपने हाथों में सफेद झंडे पकड़ कर रैली शुरू की तो सैकड़ों स्थानीय लोगों ने उनका साथ दिया.
घोटकी के कई मुसलमानों ने हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता दिखाई. अगली रात कार्यकर्ता मंदिर में ही रहे जहां स्थानीय नेता भी उनके साथ शामिल हुए.
प्रमुख धार्मिक समूहों ने भी हिंदू समुदाय के खिलाफ़ हुई हिंसा की निंदा की है. उन्होंने नूतन के खिलाफ़ आरोपों की पारदर्शी जांच की मांग भी की है. लेकिन अपने अनुयायियों को हिंसा से दूर रहने के लिए कहा.
प्रतिनिधिमंडल अपना समर्थन दिखाने के लिए मंदिर का दौरा कर रहे हैं. जे कुमार एसएसडी शिव मंडल के नेता हैं. वे आने-जाने वालों की मेजबानी कर रहें हैं. मंदिर की रसोई में भी चहल-पहल का माहौल है, वहां आने-जाने वालों के लिए बार-बार चाय और भोजन तैयार किया जा रहा है.
जे कुमार का कहना है कि 14 सितंबर को जो कुछ हुआ वह उससे काफ़ी आहत हैं. लेकिन जो प्यार उनके आसपास के लोगों ने दिखाया है, वह उनके दिल को छू गया है.
जे कुमार ने कहा,"हम उस घटना के बाद से काफ़ी व्यस्त हैं. सिंध भर से लोग हमें देखने के लिए आ रहे हैं. हर धर्म में कुछ ख़राब लोग होते हैं.अगर किसी भी धार्मिक समुदाय से कोई व्यक्ति अपराध करता है तो देश में न्यायपालिका और कानून इसकी देखभाल करने के लिए हैं. किसी एक व्यक्ति की ग़लती के लिए पूरे समुदाय को परेशान नहीं किया जाना चाहिए."
ईशनिंदा का मामला दर्ज

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मंदिर में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ पुलिस ने ईशनिंदा का मामला दर्ज कर लिया है. कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. स्कूल पर हमला करने वाले, दुकानों को लूटने और सड़कों को बाधित करने वालों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गईं हैं.
घोटकी के एसएसपी डॉ. फारुख अली ने कहा कि एफआईआर दर्ज़ करके एक संदेश दिया गया है. उन्होंने कहा, "यह परेशानी खड़ी करने वालों को बताने के लिए था कि राज्य के लिए सभी धर्मों के नागरिक बराबर हैं."
उन्होंने कहा कि यह एक नाजुक स्थिति थी, लेकिन सामुदायिक नेताओं के साथ बातचीत कर पुलिस ने नुकसान को कम किया है.
उन्होंने कहा, "अगर आप इसकी तुलना पाकिस्तान के अंदर या भारत में किसी ऐसी ही स्थिति से करते हैं, तो पाएंगे जब धार्मिक या सांप्रदायिक दंगे भड़कते हैं और उसमें भीड़ शामिल हो जाती हैं तो आमतौर पर काफी बड़े पैमाने पर नुकसान होता है. हमने इस घटना पर तुरंत कार्रवाई की. पथराव और फर्नीचर तोड़ने की कुछ घटनाओं के अलावा हमने लोगों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा की है."
नूतन लाल को अभी भी एक अज्ञात जगह पर सुरक्षा के लिहाज से हिरासत में रखा गया हैं. उनके परिवार को शहर छोड़कर भागना पड़ा है. अतीत में ऐसा भी हुआ है जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही ईशनिंदा के अभियुक्तों को मार दिया गया.
घोटकी के एसएसपी डॉ. फारुख अली का कहना है कि पुलिस घटना की जांच कर रही है. शहर में फिलहाल शांति है, लेकिन सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं. सड़कों परअर्धसैनिक बलों को गश्त करते देखा जा सकता है.
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