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अफ़ग़ानिस्तानः तालिबान के हमले में अस्पताल नष्ट, 20 लोगों की मौत
दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों ने विस्फ़ोटकों से भरे एक ट्रक में एक अस्पताल के बाहर धमाका कर दिया है जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए हैं.
स्थानीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, क़लात शहर में हुए हमले में हताहत हुए कई लोगों में डॉक्टर और मरीज भी शामिल हैं.
ऐसी भी ख़बरें आई हैं कि पूर्वी हिस्से में इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों को निशाना बनाने वाले एक हवाई हमले में 15 नागरिकों की मौत हो गई है.
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान में हुए संघर्षों के दौरान कम से कम 473 नागरिक मारे गए थे.
इस पड़ताल में पता चला है कि अगस्त में कुल हताहतों में पांचवां हिस्सा नागरिकों का था.
रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राजधानी में रॉयटर्स न्यूज एजेंसी को बताया कि एक मिनी ट्रक में भारी मात्रा में बम भर कर लाया गया और क़लात में अस्पताल के क़रीब उड़ा दिया गया. ख़बरों के मुताबिक, ज़बुल प्रांत का ये मुख्य अस्पताल था.
गवर्नर रहमतुल्लाह यारमल ने कहा कि अस्पताल पूरी तरह नष्ट हो गया है.
तालिबान ने कहा है कि अस्पताल के सामने सरकारी खुफ़िया कार्यालय उनके निशाने पर थे.
गुरुवार सुबह हुए हमले में मारे गये लोगों की संख्या अभी पूरी तरह नहीं पता चल सकी है. ज़ाबुल के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है और करीब 90 लोग घायल हुए हैं.
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने देखा कि मलबे से महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला जा रहा है.
न्यूज एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, विश्वविद्यालय के छात्र आतीफ़ बलोच ने कहा, "ये भयानक था."
हवाई हमले में क्या हुआ?
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नानगरहर प्रान्त के खोगयानी ज़िले में बुधवार रात को एक हमला हुआ जिसमें इस्लामिक स्टेट के लड़कों को निशाना बनाया गया था.
हालांकि, एक सुरक्षा अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि हमले में 15 नागरिक मारे गए और छह अन्य घायल हो गए. ख़बरों के मुताबिक, मारे जाने लोग अखरोट के एक खेत में काम कर रहे थे.
कबीले के बुज़ुर्ग मलिक राहत गुल ने रॉयर्टस को बताया कि जब एक ड्रोन से उन्हें निशाना बनाया गया उस समय कामगारों ने अलाव जला रखा था और एक साथ उसके आस पास बैठे हुए थे. घटना की एक जांच की जा रही है.
अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा स्थिति क्या है?
अफ़ग़ानिस्तान संघर्ष दुनिया में लगातार सबसे घातक संघर्ष बना हुआ है. बीबीसी ने अपनी एक ख़ास पड़ताल में पाया है कि अगस्त के महीने में यहां रोज़ औसतन 74 लोगों की मौत हुई.
सितंबर महीने की शुरुआत में तालिबान और अमरीका के बीच होने वाली एक शांति वार्ता के कारण उम्मीद जगी थी कि 18 सालों से जारी ये संघर्ष समाप्त हो जाएगा.
लेकिन छह सितंबर को क़ाबुल में तालिबान के एक हमले में एक अमरिकी सैनिक और 11 अन्य के मारे जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने शांति वार्ता से क़दम पीछे खींच लिए थे.
तालिबान क़रीब रोज़ाना हमला करना जारी रखे हुए है. इस महीने के आख़िर में आम चुनाव होना है.
मंगलवार को इस चरमपंथी समूह ने एक चुनावी रैली को निशाना बनाया जहां राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी भाषण देने वाले थे. उस हमले में 26 लोग मारे गए.
हालांकि तालिबान हमलों के सुर्खियों में रहता है इसके बावजूद, संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक़, 2019 के पहले छह महीने में अफ़ग़ान और अमरीकी सुरक्षा बलों ने की कार्रवाईयों में चरमपंथी हमलों से ज़्यादा लोग मारे गए.
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