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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रदर्शन जारी
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में "आज़ाद कश्मीर" समर्थक एक गुट का तेतरी नोट के पास तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहा. तेतरी नोट नियंत्रण रेखा के पास स्थित है.
इस धरने से पहले शनिवार को पाक प्रशासित कश्मीर के अलग-अलग इलाक़ों में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के कार्यकर्ताओं ने आज़ादी मार्च की शुरूआत की थी.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़, प्रदर्शनकारी भारत प्रशासित कश्मीर में जारी लॉक डाउन और नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.
बीबीसी संवाददाता एम. ए. ज़ेब के मुताबिक़, इस आज़ादी मार्च के प्रदर्शनकारी कोटली, सिद्धनौती, भंबर, मीरपुर, रावलकोट और बाग़ से तेतरी नोट को जा रहे जुलूस में शामिल होने के लिए आए थे लेकिन प्रदर्शनकारियों के मुताबिक़ पुलिस ने उन्हें सरसावा, कोटली, दाबरअंडी, हजीरा नामक स्थानों पर रोक दिया.
यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 20 लोगों के जख़्मी होने की ख़बर है जबकि प्रशासन के मुताबिक़ चार एम्बुलेंसों को भी नुक़सान पहुंचा है.
प्रशासन ने बीबीसी को बताया कि सुरक्षा के मद्देनज़र प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण रेखा पर आगे बढ़ने से रोका.
हजीरा थाना के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक़ जेकेएलएफ़ के 38 समर्थकों को गिरफ़्तार कर लिया गया.
दूसरी ओर, खोईरता थाना के एक अधिकारी ने बताया कि उस इलाक़े में हर दिन भारतीय सेना की ओर से गोलाबारी की जाती है.
जेकेएलएफ़ के नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हुए.
प्रदर्शन का आयोजन करने वाले एक नेता सरदार सग़ीर ने अपने एक वीडियो पैगाम में कहा है कि इस प्रदर्शन को कश्मीर पर एक जनमत संग्रह के तौर पर देखा जाना चाहिए और हम ना तो भारत और ना ही पाकिस्तान के साथ हैं बल्कि हम एक आज़ाद जम्मू और कश्मीर को अस्तित्व में लाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन उनके कार्यक्रम का पहला हिस्सा था. इसके अगले चरण में वो नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले लोगों से बातचीत कर एकता का पैग़ाम भेजेंगे. रावलाकोट से डेढ़ घंटे के सफ़र की दूरी पर तेतरी नोट भारत प्रशासित कश्मीर के पुंछ ज़िला का हिस्सा है.
पाकिस्तान और भारत के बीच की संधि के बाद 2005 में इस प्वाइंट से दोनों ओर से आवाजाही की शुरूआत हुई थी. 2008 में इस रास्ते को व्यापार के लिए भी खोल दिया गया था.
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