ट्रंप के बयान पर अमरीका की सफ़ाई, बताया कश्मीर को भारत- पाक का द्विपक्षीय मुद्दा

डोनल्ड ट्रंप, इमरान ख़ान

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भारत ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस दावे को ख़ारिज किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए कहा था.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चल रहे कश्मीर विवाद में मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था.

हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर सफाई देते हुए ट्वीट किया कि यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, "कश्मीर दोनों देशों का द्विपक्षीय मुद्दा है, ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान और भारत के साथ इस मुद्दे पर सहयोग करने को तैयार है."

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इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के साथ वॉशिंगटन में साझा प्रेस वार्ता में ट्रंप ने कहा, "दो हफ़्ते पहले मेरी नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात हुई थी और उन्होंने मुझसे पूछा था कि क्या आप मध्यस्थ बनना चाहेंगे? मैंने पूछा कहां? उन्होंने कहा, कश्मीर में."

ट्रंप ने कहा, "अगर मैं मदद कर सकता हूं तो मुझे मध्यस्थ बन कर ख़ुशी होगी."

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भारत ने ट्रंप के इस बयान को सिरे से ख़ारिज कर दिया है कि मोदी ने उनसे मध्यस्थता करने के लिए कहा था.

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर लोकसभा में कांग्रेस ने हंगामा किया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सरकार की तरफ से राज्यसभा में बयान देते हुए कहा- मैं सदन के आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत की तरफ से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्विटर पर कहा, "हमने राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को प्रेस में देखा कि वो कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं, अगर भारत और पाकिस्तान इसकी मांग करें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी कोई मांग राष्ट्रपति ट्रंप से नहीं की है."

उन्होंने कहा, "भारत का लगातार यह पक्ष रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता ही होगी. पाकिस्तान के साथ किसी भी बातचीत की शर्त ये है कि सीमा पार से आतंकवाद बंद हो."

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इमरान ख़ान और डोनल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की है

उन्होंने कहा, "शिमला समझौता और लाहौर घोषणा पत्र पाकिस्तान और भारत के बीच के सभी मु्द्दों के द्विपक्षीय समाधान का आधार प्रदान करते हैं."

वहीं राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है.

विपक्षी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विटर पर लिखा, "भारत ने कभी भी जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है."

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उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी का किसी विदेशी ताक़त से जम्मू-कश्मीर में मध्यस्थता के लिए कहना देश के हितों के साथ विश्वासघात है. मोदी को देश को जवाब देना चाहिए."

इमरान ख़ान ने किया स्वागत

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्ताव का स्वागत किया है.

इमरान ख़ान ने कहा, "अमरीका दुनिया का सबसे ताक़तवर देश है और वह उपमहाद्वीप में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है. कश्मीर की स्थिति की वजह से एक अरब से अधिक लोग परेशान हैं. मुझे विश्वास है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप दोनों देशों को क़रीब ला सकते हैं."

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इमरान ख़ान ने ये भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत के साथ वार्ता शुरू करने के सभी प्रयास किए हैं लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो सकी है.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप इसमें भी भूमिका निभा सकते हैं.

शांति चाहता है पाकिस्तान

इमरान ख़ान के साथ पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा और आईएसआई प्रमुख भी अमरीका पहुंचे हैं.

ट्रंप के साथ मुलाक़ात में इमरान ख़ान ने कहा, "मैं अपने साथ अपनी सेना के प्रमुखों को भी लाया हूं क्योंकि ज़ाहिर तौर पर हमें सुरक्षा हालातों से भी निपटना है. और हम दोनों देशों के बीच आपसी समझ बनाना चाहते हैं."

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान इस समय अमरीका के दौरे पर हैं. उनके और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच पहली सीधी वार्ता व्हाइट हाउस में हुई है.

इमरान अमरीका के साथ पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर करने के उद्देश्य से अमरीका पहुंचे हैं. अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ गई थी.

इमरान ख़ान और डोनल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, इमकान ख़ान और ट्रंप के बीच पहली सीधी वार्ता हुई है

राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते साल पाकिस्तान को दी जाने वाली अमरीकी सैन्य और आर्थिक मदद को रोक दिया था. उन्होंने पाकिस्तान पर 'झूठ बोलने और धोखा देने' के आरोप लगाए थे.

वहीं इमरान ख़ान ने कहा था कि अमरीका से पाकिस्तान को जो मदद मिलती है वो अमरीका के आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में जो क़ीमत पाकिस्तान ने चुकाई है उसकी तुलना में कुछ भी नहीं है.

पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही इमरान ख़ान अमरीका और पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्तों की वकालत करते रहे हैं. हालांकि वो अमरीकी ड्रोन हमलों की खुली आलोचना भी करते रहे हैं.

वहीं ट्रंप प्रशासन अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैन्य बलों की विदाई चाहता है और इसके लिए वो तालिबान से वार्ता भी कर रहा है. अमरीका पाकिस्तान पर चरमपंथी समूह तालिबान की मदद करने के आरोप भी लगाता रहा है.

इमरान ट्रंप की वार्ता में क्या-क्या हुआ?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप ने व्हाउट हाउस में इमरान ख़ान से मुलाक़ात के दौरान कहा कि अमरीका पाकिस्तान के साथ मिलकर अफ़ग़ानिस्तान युद्ध के समाधान पर काम कर रहा है.

ट्रंप ने पाकिस्तान को अमरीकी मदद बहाल करने के संकेत भी दिए. हालांकि ये इस बात पर निर्भर करेगा कि मुलाक़ात के दौरान किन-किन मुद्दों पर सहमति बनी.

ट्रंप ने भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर करने में अमरीकी मदद की पेशकश भी की.

इमरान ख़ान ने ट्रंप से कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान का सिर्फ़ एक ही समाधान है और तालिबान के साथ शांति समझौता बहुत नज़दीक है.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में वो तालिबान को वार्ता जारी रखने के लिए कह सकेंगे.

17 साल से जारी अफ़ग़ान युद्ध को समाप्त करने में अमरीका पाकिस्तान की भूमिका को अहम मानता है. लेकिन दोनों देशों के रिश्ते भी उतार चढ़ाव भरे रहे हैं.

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