भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच नज़दीकी से क्या होगा?: नज़रिया

    • Author, आफ़ताब कमाल पाशा
    • पदनाम, प्रोफेसर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन ज़ायद अल नाहयान रविवार को तीन दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं.

यहां वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाक़ात करेंगे.

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी और रिश्ते और मज़बूत करने के लिए क़दम उठाए जाएंगे.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक "भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक संबंधों द्वारा समर्थित, घनिष्ठ और बहुआयामी संबंध हैं, जो आज एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में परिपक्व हुए हैं."

संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार और चौथा सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है.

इस दौरे के तीन पहलू हैंः

पहलाः द्विपक्षीय संबंध, जो अबू धाबी और दिल्ली के बीच हैं, जो पिछले तीन-साढ़े तीन सालों में बेहतर और मज़बूत हुए हैं.

यह प्रगति काफी तेज़ी से हो रही है, जो पिछले 30-40 सालों में नहीं हुई थी. पहले यह रिश्ता औपचारिक और तिजारत तक ही सीमित था.

अब दोनों के बीच कूटनीतिक और सियासी संबंध मज़बूत हो रहे हैं. दोनों देश खुफ़िया सूचनाएं साझा कर रहे हैं, सैन्य मदद में आगे बढ़ रहे हैं.

दूसराः संयुक्त अरब अमीरात ने अपने पिछले दौरे में भारत में 70 अरब डॉलर पूंजी निवेश की बात कही थी. उसमें कुछ ख़ास प्रगति नहीं हुई है, अबू धाबी कुछ नियमों पर आपत्ति जता रहा है, ऐसे में इस मुद्दे पर भी बात हो सकती है.

जहां तक खाड़ी का इलाक़ा है उसमें भी दो चीजें हैं, एक भारत और ईरान के पुराने रिश्ते. अमरीका की धमकी के बाद भारत ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया है लेकिन चाबहार और दूसरे मामलों को लेकर भारत और ईरान अपने संबंध बरकरार रखना चाहते हैं, जिस पर संयुक्त अरब अमीरात अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराज़गी जता चुका है.

वो सऊदी अरब, अमरीका, इसराइल और भारत के साथ मिल कर ईरान के ख़िलाफ़ एक फ्रंट बनाना चाहता है.

तीसराः ये कि ईरान से गैस पाइप लाइन पाकिस्तान के ज़रिए भारत आना था, वो अब ओमान की तरफ से लाने की कोशिश हो रही है, जिसे संयुक्त अरब अमीरात रोकना चाहता है.

संयुक्त अरब अमीरात नहीं चाहता है कि भारत का व्यापारिक संबंध ओमान के साथ अधिक बढ़े.

भारत की रणनीति

भारत बारीक़ी से देख रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात अपनी सैन्य नीति तेज़ी से बदल रहा है. भारत चाहता है कि ईरान, इसराइल और अमरीका की वजह से खाड़ी देशों का माहौल अगर बिगड़ता है तो देश को तेल की आपूर्ति में कमी न आए और यह स्थिर दर पर मिलता रहे.

अगर तेल के दाम बढ़ते हैं तो भारत की अर्थव्यवस्था पर भार बढ़ेगा और पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के नरेंद्र मोदी की सरकार के सपने को झटका लग सकता है.

यह उम्मीद की जा रही है कि भारत इस पर संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री से बात करेगा.

पाकिस्तान को घेरने की भी कोशिश होगी

बीते मार्च में संयुक्त अरब अमीरात में ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की बैठक हुई थी, जिसमें भारत को विशिष्ठ अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था.

ओआईसी 57 देशों का समूह है जो मोटे तौर पर इस्लाम को मानने वाले देशों से मिलकर बना है. इस बैठक में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला था.

दिल्ली में हो रही इस बार की मुलाक़ात में भारत एक बार फिर से संयुक्त अरब अमीरात के सामने यह मुद्दा उठा सकता है और पाकिस्तान को चरमपंथ के मुद्दे अलग-थलग करने की कोशिश करेगा.

मुस्लिम देशों से दोस्ती बढ़ाने की कोशिश

नरेंद्र मोदी की सरकार मुस्लिम देशों से साथ अपने रिश्ते बेहतर करना चाहती है. वो कई देशों का दौरा भी कर चुके हैं.

दरअसल, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो दंगे भड़के थे, उससे उनकी छवि को काफ़ी नुक़सान पहुंचा था.

कई मुस्लिम देश इस घटना से नाराज थे. एक समय था जब अमरीका ने भी नरेंद्र मोदी को वीज़ा देने से मना कर दिया था.

इधर, उनके कार्यकाल में देश में अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ अत्याचार के मामले बढ़े हैं. लींचिंग जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं.

ऐसे में मुस्लिम देशों में भारत और नरेंद्र मोदी की छवि बेहतर हो, यह भी विदेश नीति का हिस्सा है और भारत की ओर से क़दम उठाए जा रहे हैं.

मुस्लिम देश भी यह समझ रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है. यह परमाणु संपन्न देश है और अंतरिक्ष में इसकी ताक़त बढ़ रही है.

ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और दूसरे मुस्लिम देश व्यापार की दृष्टि से भारत को बेहतर पाते हैं और इससे अगर उनका रिश्ता बेहतर होता है तो आगे फ़ायदे के अवसर और बढ़ेंगे.

(बीबीसी संवाददाता अभिमन्यु कुमार साहा से बातचीत पर आधारित)

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