ब्लॉग: पाक, अफ़ग़ान मैच और सोशल मीडिया पर गोबरबारी

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- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी के लिए
मैं उन क्रिकेट फैन्स में शामिल हूं जो कल चाह रहे थे कि इंग्लैंड हार जाए और भारत जीत जाए.
इससे एक दिन पहले यानि शनिवार को हेडिंग्ले में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान का मैच देखकर भी पैसे वसूल हो गए कि कैसे एक नई नवेली टीम एक पुरानी टीम को हार की कगार तक ले आई और पाकिस्तान बड़ी मुश्किल से ये मैच बचा पाया.
ख़ुशी थी कि जिस अफ़ग़ान क्रिकेट टीम की राशिद लतीफ़, कबीर ख़ान और इंज़माम उल हक़ जैसे कोचों ने ट्रेनिंग की वो कितनी तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर अपने निशान छोड़ रही है.
मगर इस दूध में उस वक़्त मेगनियां डल गईं जब सूचना मिली की मैच से पहले और बाद में हेंडिग्ले में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के फैन्स ने एक-दूसरे से हाथापाई की.
अफ़ग़ान क्रिकेट बोर्ड के चीफ़ एग्जिक्यूटिव असदुल्लाह ने मैच से एक-दो दिन पहले कहा कि अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट में पाकिस्तान से बेहतर है और वो पाकिस्तान की मदद कर सकता है.
फिर अफ़ग़ान टीम के कैप्टन गुलबदीन नईब ने एक भारतीय पत्रकार से बात करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान भले ही इस विश्व कप में अब तक सफल नहीं हो सका मगर हम इस टूर्नामेंट में कई दूसरी टीमों के आगे बढ़ने के मौक़े जरूर ख़राब कर सकते हैं.
हम तो डूबे हैं सनम, तुमको भी ले डूबेंगे.

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सोशल मीडिया पर गोबरबारी
इसके बाद सोशल मीडिया में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के समर्थकों ने एक-दूसरे पर गोबरबारी शुरू कर दी जो अब तक हो रही है. कई अफ़ग़ान पाकिस्तान को दुश्मन देश कह रहे हैं और कई पाकिस्तानी अफ़ग़ानियों को नमकहराम और एहसानफ़रामोश.
अगर ये गोबरबाज़ी सिर्फ़ आम लोगों तक रहती तो भी ठीक था मगर इसमें शोएब अख़्तर जैसे लोग भी कूद पड़े.
उन्होंने पहले तो अफ़ग़ानियों पर अहसान जताया कि तुमने क्रिकेट पाकिस्तान के कैंपों में हमसे सीखा मगर तुम्हारा होम ग्राउंड नोएडा और देहरादून है. हम तुमसे अब भी प्यार करते हैं मगर कल के मैच में कुचल कर रख देंगे.
फिर ये एक-दूसरे पर आतंकवाद फैलाने के आरोपों में ढलता चला गया. फिर जब पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान से जीत गया तो उसके बाद माहौल ठंडा होने की बजाय ये तक कहा गया कि अगर अफ़ग़ान टीम जीत जाती तो पाकिस्तान में इस वक़्त जो हजारों अफ़ग़ान बच्चे कचरा चुन रहे हैं वो ये काम करने से इनकार कर देते.

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जिस दिन से दोनों तरफ़ से घटिया ज़बान इस्तेमाल करने का टूर्नामेंट शुरू हुआ उस दिन अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी इस्लामाबाद की सरकारी यात्रा पर थे.
अशरफ़ ग़नी और इमरान ख़ान आपसी प्यार-मोहब्बत बढ़ाने की बात कर रहे थे मगर क्रिकेट के पागल फैन एक-दूसरे का मुंह काला करने में जुटे हुए थे.
गए वो दिन जब क्रिकेट एक-दूसरे को जोड़ता था. आज क्रिकेट भी राजनीति के बल्ले से एक-दूसरे के छक्के छुड़ाने का हथियार बन गया है.
1936 के बर्लिन ओलंपिक्स में जब एक काला अमरीकी एथलीट जैसी ओवन्स 100 मीटर की दौड़ जीता तो हिटलर ग़ुस्से के मारे स्टेडियम से चला गया. आज अगर हिटलर होता तो उसे कहीं जाने की ज़रूरत नहीं थी. बस एक ट्वीट ही करना होता और नफ़रत यहां से वहां तक एक मिनट में फैल जाती.
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