पिता से यौन शोषण की एक लेखिका की कहानी

अमरीकी नाटककार ईव एनस्लर ने 1990 के दशक में अपनी 'द वजाइना मोनोलॉग्स' नाटक से ख़ूब प्रसिद्धि पाईं.

इस नाटक का मंचन 140 से अधिक देशों में किया जा चुका है और इसमें महिलाओं की सहमति और बिना सहमति वाले यौन अनुभवों की कहानियां बताई जाती हैं.

जहां भी इसका मंचन किया गया, इसने वहां की रूढ़िवादी मान्यताओं पर प्रहार किया और दर्शकों को ख़ूब हंसाया और रुलाया भी.

एनस्लर की नई कृति 'द अपॉलजी' भी कुछ उसी तरह की है और यह लोगों को दूसरे तरीक़े से चौंकाती है.

यह एक काल्पनिक किताब है, जिसमें एनस्लर के पिता उनके नाम चिट्ठी लिखते हैं और उनके साथ किए गए दुर्व्यवहारों और यौन शोषण के लिए माफ़ी मांगते हैं.

यह दुर्व्यवहारों और यौन शोषण उनके साथ पांच साल की उम्र से किया गया था और अपने जीते जी पिता ने उनसे कभी माफ़ी नहीं मांगी.

पिता की मौत के कई साल बाद एनस्लर उनका यह अधूरा काम पूरा करती हैं.

लेखिका एक महिला अधिकार कार्यकर्ता भी हैं. उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के रेडियो कार्यक्रम आउटलुक में बात की और अपने साथ हुए दुर्व्यवहारों के प्रभावों के बारे में बताया.

दुर्व्यवहार होने से पहले आप कैसी थीं?

मुझे याद है कि मैं एक ख़ुशनुमा इंसान थी. मुझे यह भी याद है कि मैं अपने पिता को अधिक प्रेम करती थी.

फिर सबकुछ कैसे बदला?

मुझे लगता है कि मेरे पिता के प्रति मेरा लगाव ग़लत था. मुझे शुरुआत में समझ नहीं आ रहा था कि क्या चल रहा है, मुझे बस पता था कि कुछ गड़बड़ है. कई चीज़ें मेरे शरीर के साथ हो रही थी और वो सब मेरी मर्जी के बगैर हो रही थी. और यह सब मेरे पिता कर रहे थे, जिन्हें मैं दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करती थी.

मैं अच्छा और बुरा, दोनों अनुभव करती था, कभी-कभार डरावना भी. जैसे ही मैंने जाना कि यह कुछ ऐसा था जो मैं नहीं चाहती थी. यह बहुत ही घिनौना था. मुझे हल्का-हल्का याद है कि एक रात मैं उनसे दूर हो गई और दिखावा किया कि मैं मर चुकी हूं. यह महसूस कराया कि मैं वहां हूं ही नहीं.

वो उस रात रुक गए. यह यौन शोषण था. मैं उस वक़्त 10 साल की थी.

क्या आपके घर वाले ये सब जानते थे, जो आपके साथ हो रहा था?

मेरी बहन और भाई को नहीं मालूम था, लेकिन मुझे नहीं पता कि मेरी मां को जाने-अनजाने में क्या पता था.

सालों बाद जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि वो शारीरिक शोषण के बारे में जानती थीं.

उन्होंने कहा कि मुझे लगातार इंफेक्शन रहता था, मुझे बुरे सपने आते थे और मेरा व्यक्तित्व बदल गया था.

और फिर वो उन चीज़ों को याद करने लगीं, जैसे एक चाचा ने उन्हें बताया था कि उन्हें लगता है कि मेरे पिता मुझे लेकर कुछ ज़्यादा चौकन्ने रहते हैं.

वो इन सभी चीज़ों को जोड़ने लगीं लेकिन मुझे नहीं पता कि मेरी मां वास्तव में इसे ख़ुद कितना स्वीकार करती थी.

क्या बचपन में आपकी मदद करने के लिए कोई था?

मेरी एक चाची थी, एक अद्भुत चाची और नानियां भी थीं, जो मेरा ख्याल रखती थीं और मुझे वास्तव में प्यार करती थीं. मुझे लगता है कि उन लोगों ने मेरी जान बचाई.

आपके पिता ने आपका यौन शोषण करना बंद कर दिया, लेकिन उसके बाद उन्होंने आपका शारीरिक शोषण किया और वो आपको बुरी तरह पीटते थे. आप तब बच्ची थीं और इन सभी का सामना कैसे किया?

मैं उन्हें अच्छी तरह जानती थी और मैं ये भी जानती थी कि वो कितने नशे में हैं, उनका मूड क्या है. उनकी तेज़ और मध्यम आवाज़ का मतलब मैं समझती थी.

मुझे याद है कि मेरे पिता मुझे फ़ोन कर छत पर आने कहते थे और मैं उनकी आवाज़ से बता सकती थी कि पिटाई कितनी बुरी होने वाली है.

मैं शीशे से सामने जाती थी और ख़ुद को देखती थी और ज़ोर से कहती थीः "तुम अब यहां से चली जाओ. तुम यहां नहीं रहोगी, तुम अब कुछ भी नहीं सहोगी, तुम उनको अब बर्दाश्त नहीं करोगी."

उसका कोई असर हुआ?

हां, कई बार. मेरी आत्मा मेरे शरीर से बाहर निकलती थी और फिर शरीर में प्रवेश कर जाती थी और मैं देखती थी यह मेरी ही ज़िंदगी है. यह मेरी कल्पना होती थी और इसी ने मुझे लिखने की प्रेरणा दी. मैं इनसे काल्पनिक पात्रों को बुनती थी और मैं अपनी काल्पनिक दुनिया में ही रहती थी जो मुझे मेरे वास्तविक दर्द से दूर रखती थी.

आपको क्या लगता है कि आपके पिता ने आपसे इन सभी चीज़ों के लिए माफ़ी नहीं मांगी?

क्योंकि मेरे पिता ऐसे समय में बड़े हुए थे जहां पुरुष कभी ग़लत नहीं होते थे. मेरे पिता एक कंपनी के सीईओ थे, वो मेरे परिवार के सीईओ थे.

उनका जब देहांत हुआ तब आपको कैसा लगा था?

यह बहुत अजीब था क्योंकि वो काफ़ी समय से बीमार चल रहे थे. उन्हें फेफड़े का कैंसर था. जब वो मरने वाले थे, न उन्होंने और न मेरी मां ने मुझे बुलाया था.

उनकी मौत के कुछ दिनों बाद मुझे फ़ोन आया था और मैं उन्हें उस वक़्त अलविदा भी नहीं कह सकती थी. ऐसा लग रहा था कि कुछ बाक़ी रह गया है. मुझे याद है कि मैं उनकी कोठरी में गई थी और उसकी ज़मीन पर बैठ गई.

उनकी मौत के बाद मैंने कैसा महसूस किया होगा? मैं सन्न थी. ऐसा लग रहा था कि मैं उनसे पूरी तरह नाराज़ नहीं थी.

मेरे साथ जो कुछ भी हुआ, उसे समझने में मुझे काफ़ी वक़्त लग गया. एक बार मैं अपने दोस्तों के साथ शराब पी रही थी और मैंने उन्हें बताया कि मेरे पिता किस तरह मुझे पीटते थे.

मैं अपनी पिटाई की कहानी उन्हें सुना रही थी. मेरे दोस्तों ने मुझे बीच में रोका और कहा, "क्या कह रही हो?"

यह पहली दफ़ा था जब मुझे दूसरे लोगों से पता चला कि मेरे साथ क्या हुआ था. मैं डर गई थी.

'द अपोलजी' लिखना आपको राहत दे पाई?

मैंने अपनी किताब में कहानियों को जोड़ा है. मेरे पिता राक्षस से क्षमा मांगने वाले बन गए. वो एक क्रूर से एक नाजुक इंसान बन गए.

उस अर्थ में मैं कहूं तो सच में मुझे ऐसा लगा कि मैंने मुक्ति पा लिया हो. मैं आपको बता सकती हूं कि मैं शायद अपने पिता को बेहतर जानती हूं जितना वो ख़ुद को नहीं जानते थे.

आपको क्या लगता है कि वो आपके साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते थे?

मुझे लगता है कि मेरे पिता बहुत लाड प्यार में पले. मुझे लगता है कि यह लड़कों के साथ होता है और यही उन्हें अच्छा इंसान नहीं बनने देता.

आपको यह किताब लिखने की प्रेरणा किससे मिली?

मैं पिछले 21 सालों से महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को खत्म करने के लिए एक आंदोलन में भाग ले रही हूं और मैंने दुनिया भर की औरतों से उनके बुरे अनुभवों को सुना है.

मीटू अभियान के दौरान मेरे दिमाग में एक बात आई कि हमलोग वो सब कुछ कर रहे हैं जो कर सकते हैं लेकिन पुरुष आख़िर कहां हैं?

मैंने कभी क्यों किसी मर्द को सावर्जनिक तौर पर माफ़ी मांगते नहीं सुना?

अगर मर्द खुले तौर पर अब भी माफ़ी नहीं मांग सकते हैं और वो अपनी ग़लतियों को सभी के सामने स्वीकार नहीं कर सकते हैं तो यह कैसे ख़त्म होगा?

क्या आपको लगता है कि आपके पिता ने इस किताब के माध्यम से आपसे माफ़ी मांगी है?

बिल्कुल.

क्या आपने उन्हें माफ़ कर दिया?

मुझे लगता है कि मेरी उनके प्रति नफ़रत अब ख़त्म हो गई है और इस तरह मेरे पिता चले गए हैं.

क्या आपने अपनी मां से रिश्ता बेहतर करने की कोशिश की?

हां, की थी. मेरे पिता के मरने के बाद मैंने उनसे कई बार बात की और उन्होंने माना कि उन्होंने क्या ग़लती की थी और मुझसे माफी मांगी. मुझे तब अच्छा लगा और सुकून मिला.

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