ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे को कैसे ले डूबा ब्रेक्सिट

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यूरोप को लेकर कंज़रवेटिव पार्टी की आंतरिक लड़ाई के चलते पहली बार की ही तरह एक बार फिर ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री को पद छोड़ना पड़ा है.
यूरोपीय कम्यूनिटी को लेकर मार्गरेट थैचर के विचारों से उनकी कैबिनेट के सहयोगी सहमत नहीं थे. पार्टी के अंदर से ही नेतृत्व को चुनौती मिलने के बाद नवंबर 1990 में उन्होंने पार्टी की नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
मगर टेरीज़ा का नाम शायद ही मार्गरेट थैचर जैसे अपने देश पर छाप छोड़ने वाले नेताओं की तरह इतिहास में दर्ज़ हो पाएगा.
कम से कम उस तरह से तो नहीं होगा, जैसा उन्होंने मई 2016 में डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रितानी प्रधानमंत्री का कार्यालय) आते वक़्त सोचा होगा.
उनकी जो भी महत्वाकांक्षाएं थीं- देश के 'भुला दिए गए हिस्सों' की सुध लेना या फिर ब्रितानी समाज में 'अन्याय से जुड़े ज्वलंत विषयों' को लेकर काम करना- सभी एक शब्द के पीछे छिप गए- ब्रेक्सिट.
उनके तीन साल का कार्यकाल ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के फ़ैसले और उनसे पहले प्रधानमंत्री रहे डेविड कैमरन द्वारा करवाए गए जनमत संग्रह के नतीजे को मूर्त रूप देने के प्रयासों पर केंद्रित रहा.
मगर ब्रसेल्स और वेस्टमिंस्टर से एक के बाद एक मिले कड़े झटकों को जिस तरह से टेरीज़ा मे ने झेला है, उससे उनके कड़े आलोचक भी हैरत में पड़ गए थे.

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ब्रेक्सिट के लिए संघर्ष
सामान्य दौर में अगर इस तरह से मंत्रियों के इस्तीफ़े होते और संसद में विरोध देखना पड़ता तो किसी भी प्रधानमंत्री की छुट्टी हो जाती मगर टेरीज़ा मे इन सबका सामना करती रहीं.
वह आगे बढ़ती रहीं और अपने आसपास मची उथल-पुथल को नज़रअंदाज़ करके सांसदों से कहती रहीं, "कुछ नहीं बदला है." भले ही संसद में उनकी ताकत और विपक्षी पार्टियों का नियंत्रण घटता चला गया मगर टेरीज़ा मे वादा करती रहीं कि वह ब्रितानी लोगों की 'इच्छा' को पूरा करेंगी.
अगर वह 2017 में करवाए गए आम चुनावों में बहुमत के साथ जीती होतीं तो हालात शायद अलग होते. मगर चुनावों के बाद ख़ुद पूर्ण बहुमत के साथ डाउनिंग स्ट्रीट लौटने की जगह उन्होंने बहुमत खो दिया और उन्हें उत्तरी आयरलैंड की डेमोक्रैटिक यूनियनिस्ट पार्टी का समर्थन लेना पड़ा.

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वह अपने पैर पर ख़ुद ही मारी गई कुल्हाड़ी के इस ज़ख़्म से कभी उबर नहीं पाईं. उन्हें पता था कि उनके अधिकतर सांसद ब्रेक्सिट करवाने तक ही उन्हें प्रधानमंत्री बनाए रखना चाहते हैं और बाद में वे मतदाताओं को ख़ुश करने वाला कोई विकल्प पेश करेंगे.
एक समय तो ऐसा आ गया था जब उन्होंने वादा किया था कि वह साल 2022 में होने वाले अगले चुनाव से पहले ही पद छोड़ देंगी. यह उस समय की बात है जब वह अपने ही सांसदों की ओर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को जीतने के लिए संघर्ष कर रही थीं.
और फिर, जब उन्होंने बहुत से सांसदों को ब्रेक्सिट पर बने गतिरोध के लिए ज़िम्मेदार ठहराया, उसके बाद उन्हें स्वीकार करने के लिए विवश किया गया कि अब उनकी कंज़रवेटिव पार्टी नहीं चाहती कि वह इस पद पर बनी रहें.

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आख़िरी बलिदान
पार्टी के अंदर ही मौजूद अपने आलोचकों के लिए आख़िरी बलिदान के तौर पर टेरीज़ा मे ने अपना पद छोड़ने की पेशकश की थी. यह कहते हुए कि अगर वे यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के समझौते के मसौदे के पक्ष में मतदान करेंगे तो वह पद छोड़ देंगी
मगर वह अपने इस समझौते के मसौदे को संसद में कभी पास नहीं करवा पाईं.
जनवरी 2019 में संसद ने उनके समझौते को ब्रितानी संसद के इतिहास में सबसे ज़्यादा मतों से ख़ारिज किया था. मे ने इसके अलावा भी दो और मौक़ों पर संशोधित मसौदे पर संसद की मंज़ूरी लेने की कोशिश की थी मगर हर बार वह नाकाम रहीं.
जो लोग ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के साथ रखना चाहते हैं, वे मानते हैं कि यह समझौता बहुत कड़ा है जबकि कट्टर कंज़रवेटिव कहते हैं कि इस समझौते में ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से पूरी तरह अलग करने की व्यवस्था नहीं है.
निचले सदन में मसौदे को पास करवाने के लिए टेरीज़ा मे ने लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन से भी बात की थी. मगर छह महीने तक हुई चर्चा बिना किसी समझौते के ख़त्म हो गई थी. इस पर बहुत सारे टोरी सांसदों ने कहा कि ऐसा तो होना ही था.

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टेरीज़ा मे के लिए और असहज करने वाली स्थिति तब पैदा हो गई जब उन्हें यूरोपीय संसद के चुनावों में ब्रिटेन को भी शामिल करने के लिए सहमत होना पड़ा. जबकि पहले वह कह रही थीं कि ऐसा करना स्वीकार्य नहीं होगा.
अब तो बहुत सारे सांसद कुछ नहीं सुनना चाहते. वे इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि जिस तरह का ब्रेक्सिट वे चाहते थे या किसी भी तरह के ब्रेक्सिट की राह में टेरीज़ा मे एक अड़चन हैं.
पूरी तरह से घिर चुकीं टेरीज़ा मे को आख़िरकार स्वीकार करना पड़ा कि 'जिस काम को वह पसंद करती हैं' उसे वह आगे जारी नहीं रख पाएंगी और अब डाउनिंग स्ट्रीट में उनका समय पूरा हो चुका है.
जब उन्होंने कंज़रवेटिव पार्टी की नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने का ऐलान किया, उनकी आवाज़ कांप रही थी और वह भावुक हो गईं.
वह सात जून को आधिकारिक रूप से इस्तीफ़ा दे देंगी जिससे कंज़रवेटिव पार्टी में को यह तय करने का मौक़ा मिलेगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा.

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कौन हैं टेरीज़ा मे
- जन्म: 1 अक्टूबर 1956 (उम्र 62)
- पद: 1997 से मेडनहेड की सांसद. छह सालों तक गृहमंत्री रहने के बाद 2016 में प्रधानमंत्री बनीं.
- शिक्षा: वीटली पार्क काम्प्रिहेन्सिव स्कूल से पढ़ीं. कुछ समय तक एक इंडिपेंडेट स्कूल में पढ़ाई की. सैंट ह्यू कॉलेज, ऑक्सफ़र्ड
- परिवार: पति फ़िलिप मे
- शौक़:खाना पकाना- वह कहती हैं कि उनके पास रेसिपी की 150 से अधिक क़िताबें हैं. छुट्टियों पर पति के साथ पहाड़ों की सैर करना. फ़ैशन की शौक़ीन हैं.

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