मोज़ाम्बिक में ईडाय के बाद अब साइक्लोन केनेथ की तबाही

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इमेज कैप्शन, राहत शिविरों में रहते लोग

दक्षिणी अफ़्रीकी देश मोज़ाम्बिक अभी चक्रवाती तूफ़ान ईडाय की तबाही से उबरा नहीं था कि इसे फिर साइक्लोन केनेथ ने अपनी चपेट में ले लिया है. तूफ़ान केनेथ देश के सुदूर गांवों तक पहुंच गया है.

तूफ़ान के साथ तेज़ बारिश और तेज़ रफ़्तार हवाओं की वजह से बाढ़ और भूस्खलन का ख़तरा बढ़ गया है. ऐसे में हज़ारों लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है.

साइक्लोन केनेथ 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से मोज़ाम्बिक पहुंचा. अभी मुश्किल से एक महीने पहले साइक्लोन ईडाय ने मोज़ाम्बिक और दो अन्य देशों में 900 से ज़्यादा लोगों की जान ली थी.

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इमेज कैप्शन, एक चश्मदीद ने तूफ़ान का ये नज़ारा अपने कैमरे में क़ैद किया

इस समय मोज़ाम्बिक के गांवों में निचले स्तर के इलाकों में तूफ़ान से हज़ारों घर तहस-नहस हो चुके हैं और बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

बीबीसी संवाददाता पुम्ज़ा फ़िह्लानी के मुताबिक़ मोज़ाम्बिक के उत्तरी इलाकों में बिजली लाइनों को नुक़सान पहुंचने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों के लिए संपर्क साधना तक मुश्किल हो रहा है.

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उन्होंने बताया कि अभी वहां करीब 20 हज़ार लोगों ने स्कूलों और चर्चों में बने राहत केंद्रों में शरण ली हुई है.

साइक्लोन केनेथ के वजह से कोमोरोस में पहले हबी तीन लोगों की मौत हो चुकी है. मोज़ाम्बिक में तूफ़ान की वजह से गिरे पेड़ से कुचले जाने से कम से कम एक शख़्स की मौत की ख़बर है.

तूफ़ान से तबाही

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जलवायु परिवर्तन है वजह?

संयुक्त राष्ट्र के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मोज़ाम्बिक में कुछ ही वक़्त के अंतराल पर इतनी तीव्रता वाले दो तूफ़ानों का आना असामान्य है.

ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. विश्व मौसम संस्थान ने भी कहा कि पिछले रिकॉर्ड में मोज़ाम्बिक में केनेथ जैसे चक्रवात आने का कोई इतिहास नहीं है.

संस्थान ने कहा कि ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी क्या ग्लोबल वॉर्मिंग और समुद्र स्तर के बढ़ने की वजह से मोज़ाम्बिक ऐसी आपदाओं का शिकार हो रहा है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव कुमी नायडू ने कहा कि मोज़ाम्बिक में आए दो तूफ़ान 'बिल्कुल वैसे ही हैं जिसकी चेतावनी वैज्ञानिकों ने हमें दी थी.'

उन्होंने कहा, ''अगर पृथ्वी को इसकी सीमाओं से ज़्यादा से गर्म करेंगे तो ऐसा होना तय है. ये नाइंसाफ़ी है. मोज़ाम्बिक के लोग जलवायु परिवर्तन की क़ीमत चुका रहे हैं जबकि इस त्रासदी के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है."

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