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नरेंद्र मोदी को UAE का सर्वोच्च सम्मान 'ज़ायेद मेडल' मिलने से क्या फ़ायदा होगा?
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख़ ख़लीफ़ा बिन ज़ायेद अल नहयान ने गुरुवार की सुबह हिंदी में एक ट्वीट करके सबको चौंका दिया.
ट्वीट कुछ इस तरह था:
"भारत के साथ हमारे ऐतिहासिक संबंध हैं, मेरे प्रिय मित्र, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका से, जिन्होंने इन संबंधों को बढ़ावा दिया. उनके प्रयासों की सराहना करते हुए, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति ने उन्हें ज़ायद पदक प्रदान किया."
इसी के साथ यूएई ने भारतीय प्रधानमंत्री को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ज़ायेद मेडल' से सम्मानित करने का औपचारिक ऐलान किया.
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी जवाबी ट्वीट करके यूईए का शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने लिखा, "बहुत-बहुत धन्यवाद माननीय मोहम्मद बिन ज़ायेद जी. मैं इस सम्मान को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं. आपके दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी रणनीतिक साझेदारी ने नई ऊंचाई प्राप्त की है. हमारी मित्रता दोनों देशों के साथ ही दुनियाभर में शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे रही है."
संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के अनुसार, "ये सम्मान दोनों देशों के बीच रिश्तों और रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए दिया गया है."
इससे पहले यूएई रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद और चीनी राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग को भी 'ज़ायेद मेडल' से सम्मानित कर चुका है.
संयुक्त अरब अमीरात के बड़े अख़बारों जैसे 'ख़लीज टाइम्स' और 'गल्फ़ न्यूज़' ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'ज़ायेद मेडल' से सम्मानित किए जाने की ख़बर को प्रमुखता छापा है.
ऐसे में पीएम मोदी को ये सम्मान मिलना कितना महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के लिए इसके क्या कूटनीतिक मायने हैं? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए बीबीसी संवाददाता सिन्धुवासिनी ने मध्य पूर्व मामलों के जानकार क़मर आग़ा से बात की.
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क़मर आग़ा कहते हैं कि यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ज़ायेद मेडल' की काफ़ी शोहरत है, ख़ासकर खाड़ी देशों में. यही वजह है कि ये कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिलता है.
आग़ा मानते हैं कि पीएम मोदी को ये सम्मान इसलिए भी मिला है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात और भारत के सम्बन्धों को मज़बूत करने में कहीं न कहीं उनका व्यक्तिगत योगदान भी है.
इस वक़्त भारत और यूईए के बीच लगभग 50 बिलियन डॉलर का व्यापार है. इसके साथ ही भारत में लगभग आठ फ़ीसदी तेल की आपूर्ति भी यूएई से ही होती है.
संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़ लगभग 33 लाख प्रवासी भारतीय वहां रहते हैं जो यूएई की कुल आबादी का तक़रीबन 30% हिस्सा है.
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वो कौन से बदलाव हैं जिन्होंने भारत-यूएई रिश्तों को और मज़बूत किया है?
इसके जवाब में क़मर आग़ा कहते हैं, "एक तो यूएई के साथ रक्षा क्षेत्र में साझेदारी की बात चल रही है. इसके अलावा आतंकवाद के मसले पर भारत और यूएई के बीच आपसी समझ बढ़ती दिखी है."
मिसाल के तौर पर, पिछले कुछ दिनों पहले ही यूएई ने अगस्ता वेस्टलैंड डील में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को भारत को सौंपा था. इससे पहले वो 1993 मुंबई धमाके के अभियुक्त फ़ारूक़ टकला और प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे को भी भारत को सौंप दिया था.
आग़ा के मुताबिक़, "एक अहम बात ये भी है कि भारत भी यूएई में लगातार निवेश कर रहा है. भारत की कई बड़ी कंपनियां मौजूद हैं जो ऊर्जा से लेकर बैंकिग सेक्टर तक में वहां कारोबार कर रही हैं. चूंकि यूएई की अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक तेल पर निर्भर है इसलिए ये चाहता है कि भारत, चीन, जापान और दक्षिण जैसे देशों में तेल के इतर भी निवेश करे. यही वजह है कि सऊदी अरब और यूएई जैसे तेल संपन्न देश 'लुक ईस्ट' की नीति को अपनाते नज़र आ रहे हैं. इसके अलावा यूएई 'इंटरनेशनल सोलर एलाएंस' का भी सदस्य है, जिसका मुख्यालय भारत में है."
संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस भारत साल 2017 में गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि थे. क़मर आग़ा का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के शाही परिवार से ज़ाती रिश्ते भी बनाए हैं.
यूएई सरकार ने राजधानी अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए 20,000 वर्ग मीटर ज़मीन दी है और उसका भूमि पूजन भी हो चुका है. यूएई सरकार ने साल 2015 में उस वक़्त ये एलान किया था जब प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय दौरे पर वहां गए थे.
आग़ा कहते हैं, "जब पीएम मोदी यूईए गए तो शाही परिवार के पांचों भाई एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए पहुंचे थे और जब क्राउन प्रिंस भारत आए तब प्रधानमंत्री मोदी भी उन्हें लेने एयरपोर्ट पहुंचे. इस तरह हम कह सकते हैं कि यूएई और भारत के कूटनीतिक रिश्तों में एक व्यक्तिगत पहलू भी विकसित हुआ है."
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पीएम मोदी को 'ज़ायेद सम्मान' देने के पीछे यूएई का क्या मक़सद हो सकता है?
क़मर आग़ा मानते हैं कि इसके पीछे निवेश बढ़ाना एक बहुत बड़ा मक़सद है. उन्होंने कहा, "यूएई और सऊदी अरब मिलकर महाराष्ट्र में एक बड़ी रिफ़ाइनरी लगाने वाले हैं. इसमें 50% साझेदारी उनकी होगी बाक़ी आधी साझेदारी ओएनजीसी जैसी भारतीय कंपनियों की होगी. इसके यूएई भारत के प्राइवेट सेक्टर में निवेश करना चाहता है."
आग़ा यूएई के इस फ़ैसले के पीछे एक रणनीतिक वजह भी बताते हैं.
वो कहते हैं, "यूएई और सऊदी अरब जैसे देश नहीं चाहते कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़े. ये चाहते हैं कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच बातचीत की गुंजाइश हमेशा बनी रहे. इसके अलावा यूएई चाहता है कि भारत ईरान पर लगाए गए अमरीकी प्रतिबंधों को लागू करे. चूंकि भारत में तेल की आपूर्ति सबसे ज़्यादा ईरान से ही होती है इसलिए अगर भारत ईरान से अपना व्यापार कम करता है तो आख़िरकार फ़ायदा यूएई को ही होगा क्योंकि ऐसी स्थिति में भारत जो तेल ईरान से आयात करता है वो उससे करेगा."
कच्चे तेल का आयात करने वाले देशों में भारत शीर्ष पर है और इसका लगभग 12% हिस्सा सीधे ईरान से आता है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मई, 2018 में ईरान पर व्यापारिक पाबंदियां लगाई थीं और भारत, चीन, पाकिस्तान समेत एशिया के बाक़ी देशों से कहा था कि वो भी ईरान से तेल ख़रीदना बंद करें. हालांकि इस प्रतिबंध के बावजूद अमरीका के भारत को काफ़ी हद तक छूट भी दे रखी थी.
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चुनावी माहौल में संयुक्त अरब अमीरात की इस घोषण से क्या पीएम मोदी और बीजेपी को कोई फ़ायदा मिलेगा?
इस सवाल पर आग़ा कहते हैं कि इस ऐलान का वोटों पर कोई असर पड़ेगा, ऐसा कहना मुश्किल है क्योंकि भारत की चुनावी राजनीति में अभी यूएई का इतना दबदबा नहीं है . हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत छवि पर इसका सकारात्मक असर ज़रूर होगा.
क़मर आग़ा मानते हैं कि बीजेपी इस अवॉर्ड को भुनाने की पूरी कोशिश करेगी.
आग़ा के मुताबिक़, "इससे प्रधानमंत्री मोदी के पास भारत के मुस्लिम समुदाय से यह कहने को होगा कि वो अरब देशों से अच्छे सम्बन्ध बना रहे हैं.
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दूसरे देशों, ख़ासकर भारत के पड़ोसी देशों पर इस ऐलान से क्या असर पड़ेगा? क्या भारत के प्रति उनके नज़रिए में कोई बदलाव आएगा?
आग़ा मानते हैं कि यूएई के इस ऐलान का सबसे ज़्यादा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की हमेशा ये कोशिश रही कि सऊदी अरब और यूएई कभी भारत के क़रीब न आएं. पाकिस्तान नहीं चाहता कि खाड़ी देशों में भारत का कोई दख़ल हो, लेकिन हमने देखा कि लगभग 50 साल बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और फिर यूएई के क्राउन प्रिंस भी भारत आए. ये अपने आप में एक बड़ा बदलाव है."
अगर बात चीन की करें तो आग़ा मानते हैं कि चीन के साथ उसके रिश्ते पहले से ही अच्छे हैं. यही वजह है कि वो चीनी राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग को पहले ही अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दे चुका है.
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आग़ा कहते हैं, "एक तरह से देखें तो अब यूएई ने भारतीय प्रधानमंत्री को ज़ायेद मेडल देकर ये संदेश देने की कोशिश की है कि वो भारत, पाकिस्तान और चीन, सबसे अच्छे रिश्ते बनाए रखना चाहता है और साथ ही अपने व्यापारिक हित भी साधना चाहता है."
संयुक्त अरब अमीरात के अजमान शहर में मौजूद बीबीसी के सहयोगी रोनक कोटेचा का कहना है कि यूएई के कारोबारी समुदाय ने शुरू से ही प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन किया है.
कोटेचा के मुताबिक़, "यहां बसे भारतीयों को लगता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के आपसी रिश्ते बेहतर हुए हैं. मोदी ऐसे अकेले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जो अपने पांच साल के कार्यकाल में यूएई गए हैं."
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