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जिन देशों के पास सबसे ज़्यादा कच्चा तेल है, वो ग़रीब क्यों?
आज भी दुनिया में ईंधन का सबसे बड़ा स्रोत कच्चा तेल यानी डीज़ल और पेट्रोल ही हैं. और जब तक 'काला सोना' कहे जाने वाले कच्चे तेल की जगह पूरी तरह अक्षय उर्जा नहीं ले लेता इस पर हमारी निर्भरता भी बढ़ती रहेगी.
एक साल पहले की तुलना में साल 2018 में दुनिया में अधिक कच्चे तेल का इस्तेमाल हुआ. ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कन्ट्रीज़ (ओपेक) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 2017 में जहां 9.720 करोड़ बैरल प्रति दिन कच्चे तेल की खपत हुई वहीं 2018 में दुनिया में 9.882 करोड़ बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का इस्तेमाल हुआ.
ओपेक के आकलन के अनुसार 2019 में ये आंकड़ा 10.023 करोड़ बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है.
यही कारण है कि कई देशों के राजस्व में एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल की बिक्री से होने वाली कमाई है.
ऐसे में ये मान लेना स्वाभाविक है कि जिन देशों के पास कच्चे तेल का बड़ा ज़खीरा है वो फायदे की स्थिति में होंगे.
लेकिन असल में ऐसा नहीं है क्योंकि कच्चा तेल हमेशा देश के लिए अधिक नकदी ले कर नहीं आता.
वो देश जिनके पास है सबसे अधिक कच्चा तेल
वेनेज़ुएला वो देश है जिसके पास कच्चे तेल का सबसे बड़ा भंडार है. अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के अनुसार इस देश में 30,230 करोड़ बैरल कच्चा तेल है.
दूसरे नंबर पर है सऊदी अरब. माना जाता है इसके पास 26,620 करोड़ बैरल कच्चे तेल का ज़खीरा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये देश कई प्रतिबंधों से जूझ रहा है.
कनाडा तीसरे नंबर पर है, जिसके पास अनुमान है कि 17,050 करोड़ बैरल कच्चा तेल है.
इस सूची में भारत 23वें पायदान पर है जिसके पास 449.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल है.
वेनेज़ुएला के पास सबसे अधिक कच्चा तेल है और देश की 96 फीसदी आय कच्चे तेल पर ही निर्भर है.
अमरीका की लगाई पाबंदी के कारण वेनेज़ुएला अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल नहीं बेच पा रहा है.
ये देश फिलहल गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रहा है. देश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा चुकी है और देश में खाद्य पदार्थों के साथ-साथ ज़रूरी वस्तुओं की भारी कमी है. कई बार ये देश बिजली जाने से ब्लैक आउट होने के कारण भी चर्चा में रहा है.
और तो और वेनेज़ुएला के पास समुद्र की स्थति भी कुछ ऐसी है कि यहां से कच्चा तेल निकालना महंगा सौदा है. यहां का तेल भारी माना जाता है जिसके लिए इसे निकालने के लिए सोल्वेटन्स की जरूरत होती है.
कनाडा की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है, यहां का तेल भारी माना जाता है और इसे निकालने में अधिक खर्च करना पड़ता है.
ब्राज़ील में तेल पर काफी टैक्स लगाया गया है जिस कारण यहां कच्चे तेल का उत्पादन कम होता है.
एक अनुमान के अनुसार एक बैरल तेल निकालने में सऊदी अरब में जितना खर्च होगा उसका चार गुना ब्राज़ील और वेनेज़ुएला में खर्च होगा.
ओपेक के आंकड़ों के अनुसार सऊदी अरब में एक बैरल कच्चा तेल निकालने में यदि 9 अमरीकी डॉलर खर्च होते हैं तो वेनेज़ुएला में इसके लिए 27.62 अमरीकी डॉलर और ब्राज़ील में 34.99 अमरीकी डॉलर खर्च होंगे.
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