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तुर्कीः स्थानीय चुनावों में अर्दोआन को तगड़ा झटका
अजेय समझे जाने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप अर्दोआन को स्थानीय चुनावों में तगड़ा झटका लगा है.
उनकी पार्टी को राजधानी अंकारा में हार का मुंह देखना पड़ा है और विपक्ष इस्तांबुल में भी जीत का दावा कर रहा है.
अर्दोआन ने कहा है कि अगर कोई कमी रह गई है तो हमारी ज़िम्मेदारी है कि उसे ठीक करें.
ये चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर हो रही है और इस चुनाव को अर्दोआन के नेतृत्व पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है.
इस चुनाव में 5.7 करोड़ मतदाताओं ने मेयर और काउंसिलर चुनने के लिए वोट डाला था.
तुर्की की मीडिया के अनुसार सेक्युलर रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) उम्मीदवार मंसूर यावास ने अंकारा में पर्याप्त वोटों से जीत हासिल की है.
हालांकि देश के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में सीएचपी और अर्दोआन की पार्टी एकेपी, दोनों जीत का दावा कर रही हैं.
इस्तांबुल में भी विपक्ष भारी
सीएचपी उम्मीदवार एक्रेम इमामोग्लू ने 28000 वोटों से जीत का दावा किया है तो एकेपी उम्मीदवार, पूर्व प्रधानमंत्री बिनाली यील्द्रिम ने 4000 वोटों से आगे रहने की बात कही है.
कहा जा रहा है कि दोनों उम्मीदवारों को 40 लाख वोट मिले हैं.
सीएचपी नेता कमाल किलिडारोग्लू ने कहा है, "लोगों ने लोकतंत्र के पक्ष में वोट किया है और उन्होंने लोकतंत्र को चुना."
इस बीच अर्दोआन ने अंकारा में अपने समर्थकों से बात करते हुए इस बात के संकेत दिए हैं कि एकेपी इस्तांबुल हार सकती है.
उन्होंने कहा, "अगर हमारे लोगों से मेयर का पद छिन भी जाता है तो भी ज़िले एकेपी के पास ही रहेंगे."
तुर्की में आम चुनाव 2023 में होने वाले हैं और अर्दोआन देश की अर्थव्यवस्था सुधाने का वादा कर रहे हैं.
प्रतिष्ठित पत्रकार रूसेन शाकिर ने कहा कि ये 194 की तरह ऐतिहासिक चुनाव है, इसी साल अर्दोआन इस्तांबुल के मेयर चुने गए थे.
रॉयटर्स ने शाकिर ने कहा, "ये इस बात की घोषणा की है कि 25 साल पहले इतिहास का जो पन्ना पटला था, आज वही फिर से खुल रहा है."
'इस्तांबुल जीतेगा, वही तुर्की जीतेगा'
तुर्की में बीबीसी संसवाददाता मार्क लोवेन के अनुसार, कहावत है कि जो इस्तांबुल जीतेगा, वही तुर्की जीतेगा.
अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी क्योंकि 1.8 करोड़ की आबादी वाले इस्तांबुल में एकेपी और सीएचपी के वोटों का अंतर बहुत कम है.
एकेपी उम्मीदवार ने जीत की घोषणा कर दी है लेकिन अभी भी वोटों की गिनती जारी है.
25 सालों में विपक्ष ने अंकारा में जीत हासिल की है.
अगर वो इस्तांबुल में भी जीत जाते हैं, तो ये एक चौंकाने वाला नतीज़ा होगा क्योंकि तुर्की में 90 प्रतिशत मीडिया सरकार समर्थक है और राष्ट्रपति अर्दोआन ने अपने विरोधियों को आतंकवादी घोषित कर दिया है.
असल में अर्दोआन के वफ़ादार मतदाताओं ने गहराते मंदी संकट और 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी महंगाई के लिए उन्हें सबक सिखाया है.
अजेय अर्दोआन को चुनौती
सालों से अर्दोआन अजेय दिख रहे थे, लेकिन आज से उनकी ये छवि बदलने जा रही है.
पिछले साल राष्ट्रपति चुनावों में भारी बहुमत से अर्दोआन के जीतने के बाद ये पहला स्थानीय चुनाव हो रहा है.
एकेपी 2002 से हर चुनाव जीत रही है. अधिकांश मीडिया सरकारपरस्त या अर्देआन के समर्थकों के हाथों में है, इसलिए विपक्ष के लिए चुनाव प्रचार का काम आसान नहीं था.
कुर्द समर्थक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचडीपी) ने तो चुनावों में धांधली का आरोप लगाकर कई शहरों में अपने उम्मीदवार ही नहीं दिए.
इसके कुछ नेताओं को आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में जेल में बंद कर दिया गया है, जिससे वो इनकार करते हैं.
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