पाकिस्तान: हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए दो विधेयक

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, फ़रान रफ़ी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद से
इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के सांसद डॉक्टर रमेश कुमार वांकवानी पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए दो विधेयक लाने जा रहे हैं.
डॉक्टर रमेश कुमार वांकवानी ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में दो विधेयक पेश किए हैं.
बीबीसी को दिए एक लंबे साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "पहला प्रस्ताव लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल किए जाने को लेकर है जबकि दूसरा प्रस्ताव जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए है."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
पाकिस्तान में मौजूदा क़ानूनों के मुताबिक़, 16 साल की उम्र की लड़की की शादी वैध मानी जाती है. हालांकि सिंध प्रांत में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है.
इससे पहले भी लड़कियों के लिए शादी की उम्र को बढ़ाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन राजनीतिज्ञों और पाकिस्तान के काउंसिल ऑफ़ इस्लामिक आइडियोलॉजी ने इसे ग़ैर इस्लामिक क़रार देते हुए इसे नाकाम कर दिया था.
फिर हो रही कोशिश
हाल ही में रीना और रवीना नाम की दो लड़कियों के कथित अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की घटना सामने आने के बाद इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ क़िबला अयाज़ ने बाल विवाह को हतोत्साहित करने पर ज़ोर दिया है.

दूसरे विधेयक के बारे में रमेश कुमार वांकवानी ने कहा, "दो या तीन मदरसे हैं जो जबरन धर्म परिवर्तन के लिए जाने जाते हैं. इनमें बारछूंदी शरीफ़ का मियां मिठ्ठू भी शामिल है. ये अन्य छोटे मदरसों की भी मदद करते हैं."
डॉक्टर रमेश के मुताबिक, "वो उम्रदराज़ महिलाओं या मर्दों का नहीं बल्कि लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराते हैं. कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि उन्होंने एक साल में हज़ारों लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया है. जबकि कुछ अन्य लोगों का कहना है कि उन्होंने 200 लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया है. ये एक किस्म का चलन बन गया है."
उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म परिवर्तन के बाद इन लड़कियों की शादी ऐसे व्यक्ति से कर दी जाती है जो आम तौर पर पहले से ही विवाहित होता है और फिर वो लड़की को छोड़कर उसे वेश्यावृत्ति में धकेल देता है.

इमेज स्रोत, EPA
उन्होंने कहा, "ये विधेयक इस तरह के मदरसों पर रोक लगाएगा और उन्हें प्रतिबंधित घोषित कर सज़ा देगा."
स्वेच्छा से बदला जा रहा धर्म?
कुछ दिन पहले बीबीसी से बात करते हुए पीर अब्दुल हक़ (मियां मिठ्ठू के नाम से मशहूर) के बेटे मियां मोहम्मद असलम क़ादरी ने कहा था कि इन सारे मामलों में महिलाएं खुद सुप्रीम कोर्ट गईं और स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया है. उनका किसी ने अपहरण नहीं किया.
क़ादरी के मुताबिक़, "इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन की इजाज़त नहीं है."
रीना और रवीना के मामले में भी लड़कियों ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया है और उन पर किसी ने दबाव नहीं डाला था.
हालांकि इसके समर्थन में क़ानूनी दस्तावेजों के अभाव में उनकी उम्र पर अभी भी विवाद है. लड़कियों के वकील राव अब्दुर रहीम ने बीबीसी से ज़ोर देकर कहा कि "लड़कियों ने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम स्वीकार किया है."
उनके अनुसार, "लड़कियों ने मियां मिठ्ठू मदरसे में ही इस्लाम स्वीकार किया था. लेकिन उनकी ज़िंदगी को ख़तरा पैदा हो गया इसलिए उन्हें क़ानूनी संरक्षक की ज़रूरत पड़ी क्योंकि वो अपने घर वापस नहीं जा सकती थीं."

इमेज स्रोत, EPA
वकील के अनुसार, "इसलिए लड़कियों ने उन दोनों पुरुषों से सम्पर्क किया, जो उनके पारिवारिक मित्र थे, जिससे उन्होंने शादी कर ली."
मर्ज़ी के बारे में बात करते हुए डॉ वांकवानी कहते हैं, "इस विधेयक के अनुसार, 18 साल से कम उम्र का कोई शख़्स अपना धर्म परिवर्तन नहीं कर सकता. और जब कोई ऐसा करना चाहे, उसे अदालत जाना होगा और एक आवेदन करना होगा, जिसमें उन्हें दिखाना होगा कि किस बात ने उस ख़ास धर्म के प्रति उन्हें आकर्षित किया और ये भी बताना होगा कि उन्हें क्या शिक्षा मिली. साथ ही उसे अपनी मर्ज़ी के बारे में बयान भी देना होगा."
वो कहते हैं, "ये अपनी मर्ज़ी नहीं है. आप एक लड़की या लड़के का अपहरण करते हैं, उन्हें एक मदरसे में ले जाते हैं, उनसे कलमा पढ़वाते हैं और उसी समय उनकी शादी करा देते हैं. इसके बाद आप कहते हैं कि उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
साल 2016 में सिंध प्रांत की सरकार ग़ैर मुस्लिम पाकिस्तानियों को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाने के लिए ऐसा ही एक विधेयक लेकर आई थी.
हालांकि धार्मिक दलों ने इस विधेयक के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई थी और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से इस पर प्रांत के गवर्नर ने हस्ताक्षर नहीं किया और विधेयक रद्द हो गया.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तानी हिन्दू पूछ रहे- धर्मपरिवर्तन के बाद लड़कियां केवल पत्नियां बनती हैं, बेटियां या बहनें क्यों नहीं?
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














