द.अफ़्रीकी देशों में अदाई तूफ़ान से 1000 के मरने की आशंका

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मोज़ाम्बिक में आए भयंकर तूफ़ान अदाई में एक हज़ार लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मोज़ाम्बिक के राष्ट्रपति फ़िलिप न्यूसी ने कहा कि मरने वालों की संख्या 1000 तक पहुंच सकती है.
उन्होंने कहा कि सोमवार को हवाई सर्वे में उन्हें कई शव पानी में तैरते दिखे.
अदाई तूफ़ान तटीय शहर बेइरा में पिछले वृहस्पतिवार को ही पहुंचा था लेकिन बचाव दल वहां रविवार को पहुंच पाया.
तूफ़ान के दौरान हवा की रफ़्तार 177 किलोमीटर प्रति घंटे थी.

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'कोई इमारत सलामत नहीं बची
संयुक्त राष्ट्र के बचाव दल के एक सदस्य ने बीबीसी को बताया कि 50 लाख की आबादी वाले बेईरा में हर इमारत क्षतिग्रस्त हो गई है.
संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम से जुड़े गेराल्ड बॉर्के ने बताया कि कोई भी इमारत सलामत नहीं बची है. संचार माध्यम ध्वस्त हो गए हैं. सड़कों पर बिजली के खंबे गिरे पड़े हैं.
घरों की छतें और दीवारें ढह गई हैं और बहुत सारे लोग बेघर हो गए हैं.
आईएफ़आरसी टीम के सदस्य जैमी ने बीबीसी को बताया कि बचावकर्मी रात में पेड़ों के सहारे लोगों की मदद कर रहे हैं.
आधिकारिक रूप से मोज़ाम्बिक में 84 लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है जबकि दक्षिणी अफ़्रीका में 180 लोग मारे गए हैं.

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ज़िम्बाब्वे में 122 लोग मारे गए
इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ रेड क्रॉस ने तूफ़ान से हुई तबाही को 'भयानक' बताया है.
सरकार का कहना है कि ज़िम्बाब्वे में कम से कम 98 लोगों के मारे जाने और 217 लोग के लापता होने की ख़बर है.
मलावी भी तूफ़ान के कारण बुरी तरह प्रभावित है.
तूफ़ान के बाद भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 122 लोगों की मौत हो गई है.
ब्रिटेन की सरकार ने मोज़ाम्बिक और मलावी को 80 लाख डॉलर की मानवीय मदद देने का ऐलान किया है.
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बेइरा में तबाही का मंज़र
अधिकारियों का कहना है कि जितने लोग मारे गए हैं, उनमें से अधिकांश की मौत बेइरा के आसपास हुई है.
ये देश का चौथा सबसे बड़ा शहर है.
राजधानी मापुटो में अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि 1500 लोग पेड़ों के गिरने, इमारतों के मलबों और टीन की छतों से घायल हुए हैं.
सोफ़ाला प्रांत जिसके अंतर्गत बेइरा आता है, वहां के गवर्नर अल्बर्टो मोंडलेन ने बताया कि 'इस प्राकृतिक आपदा की ज़द में लगभग सबकुछ आ गया है.'
उन्होंने कहा कि 'लोग अभी भी मुसीबत झेल रहे हैं और कुछ तो पेड़ों पर आसरा लिए हुए हैं, उन्हें मदद की सख़्त ज़रूरत है.'
बाक़ी देश से बेइरा को जोड़ने वाली सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है, लेकिन हवाई रास्ता बहाल हो गया है.

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ज़िम्बाब्वे के हालात
देश में इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया है. राष्ट्रपति इमर्सन मंगाग्वा यूएई की यात्रा से बीच में ही लौट आए.
सूचना मंत्रालय ने सेंट चार्ल्स ल्वांगा स्कूल के छात्रों की तस्वीर जारी की है, जिनको मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
ज़िला अस्पताल में भर्ती बचे हुए लोग सदमे में हैं. उन्होंने बताया कि किस तरह बाढ़ ने उनके घरों को तबाह कर दिया और उनके परिचितों को बहा ले गयी.
एक व्यक्ति ने एएफ़रपी समाचार एजेंसी को बताया, "मेरी बेटी मलबे में कहां दफ़न हो गई, मुझे अभी तक पता नहीं चल पा रहा है. अब तो कोई भविष्य नहीं है, कोई कपड़े नहीं हैं, सिर्फ़ मलबा और पत्थर हैं."
प्रेज़ शिपोरे का घर भी नष्ट हो गया. वो बताती हैं, "जब बाढ़ आई तो मेरी बेटी मेरे बग़ल में सो रही थी. पानी उसे मुझसे दूर बहा ले गया और पानी के एक और ज्वार ने मुझे अलग धकेल दिया."
अधिकारियों के अनुसार, 15,000 घर तबाह हो गए हैं और 600 परिवार बेघर हो गए हैं.

पूर्वी ज़िम्बाब्वे में मौजूद बीबीसी अफ़्रीका की संवाददाता शिंगाई न्योका ने कहा कि 'उन्होंने कभी इतनी बड़ी तबाही नहीं देखी.'
उनके अनुसार, वे लोग तूफ़ान से प्रभावित चिमानीमानी शहर नहीं पहुंच पाए क्योंकि सड़क के बीचोबीच एक बड़ी दरार आ गई थी. नीचे नदी उफ़ान रही थी और दूसरे किनारे पर लोग खड़े थे.
ये सड़क मुख्य लिंक रोड थी, जो क्षतिग्रस्त हो चुकी है. बचाव दल प्रभावित इलाक़ों तक पहुंचने की मुश्किलों से जूझ रहे हैं.
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