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पाकिस्तान में छाए रहे भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान: उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इकबाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते बालाकोट पर भारतीय हमले और उसके बाद से पैदा हुए हालात से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.
सबसे पहले बात भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की भारत वापसी की.
अभिनंदन वर्तमान को शुक्रवार की रात भारतीय समयानुसार क़रीब नौ बजकर 20 मिनट पर पाकिस्तान ने भारतीय अधिकारियों के हवाले कर दिया गया.
भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को 27 फ़रवरी को पाकिस्तान ने उस समय हिरासत में ले लिया जब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों का पीछा करते हुए वो पाकिस्तान की सीमा में घुस गए. पाकिस्तान सुरक्षा बलों ने उनके विमान पर हमला किया और वो विमान से एमरजेंसी एक्ज़िट कर गए.
पाकिस्तान की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया. लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने की नीयत से कमांडर वर्तमान को 28 फ़रवरी को रिहा करने के आदेश दे दिए.
विंग कमांडर की भारत वापसी पर अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, "भारत से लड़ाकू विमान पर आने वाला पाकिस्तान की तारीफ़ें करता पैदल वापस"
अख़बार दुनिया के अनुसार हमले के लिए आने वाला लड़ाकू विमान का भारतीय पायलट पाकिस्तान की मेहमाननवाज़ी और पाकिस्तानी सेना की पेशावराना सलाहियत की तारीफ़ करता हुआ अमन का पैग़ाम लेकर वापस चला गया.
अख़बार दुनिया के अनुसार सऊदी अरब के विदेश मंत्री भारत और पाकिस्तान को दौरा करेंगे. अख़बार के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव को कम करने की ख़ातिर सऊदी विदेश मंत्री आबिद अल-जब्र दोनों देशों का दौरा करेंगे. सऊदी विदेश मंत्री पहले पाकिस्तान जाने वाले थे और फिर भारत का दौरा करना था, लेकिन अब उनके प्रोग्राम में थोड़ा बदलाव आया है. अब वो पहले भारत आएंगे और फिर भारत जाएंगे.
वर्तमान की रिहाई की वजह
अख़बार ख़बरें ने लिखा है कि विंग कमांडर की रिहाई के फ़ैसले को भारतीय मीडिया पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव से जोड़ कर देख रही है, लेकिन सच्चाई ये है कि पाकिस्तान ने सिर्फ़ और सिर्फ़ शांति का संदेश देने के लिए ये फ़ैसला किया है. अख़बार के अनुसार पाकिस्तान ने भारत को आइना दिखाने के लिए कमांडर वर्तमान को रिहा करने का फ़ैसला किया है. अख़बार आगे लिखता है कि पाकिस्तान ने भारत को ऐसा आइना दिखाया है जिसमें भारत हमेशा अपनी शक्ल देखकर कांपता रहेगा, अभिनंदन की शक्ल में एक जिन या मिसाइल भारत की ओर छोड़ दिया गया है जिससे भारत की सरकार हमेशा डरती रहेगी.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इमरान ख़ान ने अपने इस एक फ़ैसले से लोगों को दिल जीत लिया है.
अख़बार आगे लिखता है कि पाकिस्तान की गिरफ्त में आए भारतीय विंग कमांडर की रिहाई के फ़ैसले ने लोगों को इतना ज़्यादा प्रभावित किया है कि भारत समेत दुनिया भर से लोग इमरान ख़ान को शांति का नोबेल पुरुस्कार दिए जाने की मांग कर रहे हैं. पाकिस्तान में ट्विटर पर ये ट्रेंड भी कर रहा है.
दरअसल ये पूरा मामला 14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में हुए एक चरमपंथी हमले से है.
उस दिन हुए हमले में भारतीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ़ के 40 से अधिक जवान मारे गए थे. भारत सरकार ने इसके लिए पाकिस्तान की धरती से सक्रिय चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को ज़िम्मेदार ठहराया था.
पुलवामा पर सवाल
पुलवामा हमले के 12 दिनों बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रांत ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के बालाकोट में स्थित जैश के कथित कैम्प को निशाना बनाया. भारत ने दावा किया कि भारतीय लड़ाकू विमानों ने जैश के कैम्प को पूरी तरह बर्बाद कर दिया और इस ऑपरेशन में कई लोग मारे गए थे. भारतीय मीडिया ने कह दिया कि 300-350 चरमपंथी मारे गए थे. हालांकि पाकिस्तान ने ये बात तो स्वीकार की कि भारतीय वायु सेना के जहाज़ों ने पाकिस्तान की वायु सीमा का उल्लंघन किया लेकिन इस बात से इंकार किया की किसी तरह के जान का नुक़सान हुआ है.
अगले दिन यानी 27 फ़रवरी को पाकिस्तान ने भारत प्रशासित कश्मीर को निशाना बनाया और दावा किया कि उसने भारत के दो लड़ाकू विमान को मार गिराया है और एक जहाज़ के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को हिरासत में ले लिया है.
लेकिन इमरान ख़ान ने संसद में घोषण कर दी कि पाकिस्तान पकड़े गए भारतीय पायलट को रिहा कर देगा. और शुक्रवार को उन्हें रिहा कर दिया गया.
पाकिस्तान के कुछ अख़बार पुलवामा हमले पर भी सवाल उठा रहे हैं. रोज़नामा ख़बरें लिखता है कि भारत-पाक सीमा पर भारी संख्या में भारतीय सुरक्षाबल तैनात हैं ऐसे में कोई व्यक्ति इतनी मात्रा में विस्फोटक कैसे लेकर आ सकता है.
अख़बार लिखता है कि पुलवामा के हमलावर आदिल अहमद डार को 2016-18 के बीच सुरक्षा बलों ने छह बार उठाया, लेकिन कभी भी उनके ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई थी.
इसके अलावा इस्लामी देशों के समूह ओआईसी की बैठक का भी ज़िक्र ख़ूब रहा.
इस बार भारत को भी ओआईसी में हिस्सा लेने की दावत दी गई थी. पाकिस्तान ने इस पर विरोध जताते हुए ओआईसी की बैठक में जाने से इंकार कर दिया था.
लेकिन पाकिस्तान के इस फ़ैसले पर लोगों की राय बंटी हुई है.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा है कि बदक़िस्मती से सरकार ने ओआईसी की बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया है. बिलावल आगे लिखते हैं, ''नाज़ुक घड़ी में अंतरराष्ट्रीय फ़ोरम को हर हालत में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. भारत के नज़रिए को बेनक़ाब करने के लिए इस बैठक में शिरकत ज़रूरी थी.''
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