You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
समलैंगिक प्यार की किस सीक्रेट भाषा का करते हैं इस्तेमाल?
- Author, मेघा मोहन
- पदनाम, जेंडर ऐंड आइडेंटिटी - स्पेशलिस्ट यूनिट, बीबीसी न्यूज़
पिछले कुछ महीनों से पूर्वी अफ्रीका के बुरुंडी में बीबीसी दर्जनों युवा समलैंगिकों से बात कर रहा है.
उन्होंने हमें बताया कि जिस देश में समलैंगिकता गैर-क़ानूनी है, वहां समलैंगिक महिलाओं का दैनिक जीवन कैसा है.
एक समलैंगिक को दूसरे तक पहुंचने के लिए
उन्हें एक-दूसरे तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और चैट ऐप्स पर सांकेतिक मीम का उपयोग करना पड़ता है.
हम इसे बताने के लिए वास्तविक सीक्रेट मीम और संकेतकों की जगह ब्लू वायलेट का इस्तेमाल करते हैं (वैसे ही जैसे 1900 के दशक में समलैंगिक महिलाओं ने अपनी गर्लफ़्रेंड को वायलेट दिया होगा).
ब्लू वायलेट एक प्रतीक है और इस समूह या, जहां तक हमारी जानकारी है, पूर्वी अफ्रीका के ग्रेट लेक क्षेत्र में किसी अन्य एलजीबीटी समूह का टैग नहीं है.
नेल्ला
नेल्ला ने एक एन्क्रिप्टेड ऐप के इस्तेमाल से बीबीसी को अपनी तस्वीर भेजी. इसमें वो कुर्सी पर बैठी हैं और चारों ओर कुछ छोटे बच्चे हैं.
उन्होंने लिखा, "ये 10 साल से छोटे मेरे बच्चे हैं."
तस्वीर के लिए ये बच्चे अपने चेहरे पर हंसी और बालसुलभ भाव लाते हैं.
नेल्ला हिजाब में हैं.
फिर एक और तस्वीर आती है.
इसमें वो एक फिट टी-शर्ट के साथ ढीली जींस में हैं.
कंधे पर उनके घुंघराले काले बाल साफ़ दिख रहे हैं.
इसमें वो एक खुली छत वाले रेस्तरां में कॉर्नरो (गूंथे) बालों वाली एक पतली युवा महिला के ऊपर अपनी बाहें रखे बैठी हैं.
दोनों महिलाएं हंस रही हैं और उनके दांत मोतियों जैसे चमक रहे हैं.
वो लिखती हैं, "वर्चुअल पहचान से बनी 'मेरी गर्लफ़्रेंड', क्या हम प्यारे नहीं दिख रहे?"
वो कहती हैं कि यह पहली बार है जब मैं किसी के साथ उसका परिचय करा रही हूं.
मुझे अच्छा लग रहा है.
इनके परिवार को उनके इस नए रिश्ते के बारे में बिल्कुल नहीं पता.
लेकिन वो इस बात से बेफिक्र हैं कि परिवार का कोई सदस्य उन्हें इस तरह बाहर मिलता देख पहचान लेगा.
उन्हें भरोसा है कि कोई उन्हें पहचान नहीं सकेगा क्योंकि वो घर पर हिजाब पहनती हैं लेकिन जब भी वो अपनी गर्लफ़्रेंड से मिलने जाती हैं तो उसे हटा कर जाती हैं.
निया
बड़े होते समय निया को लड़कों पर क्रश नहीं था.
22 साल की उम्र में उनकी एक हमउम्र महिला से मुलाक़ात हुई.
दोनों महिलाएं म्यूजिक से आपस में जुड़ीं और जल्द ही दोनों में दोस्ती हो गई.
निया कहती हैं, "हमने बातें शुरू की, तब एक दिन, गहरी बातचीत के दौरान, वो मेरी ओर मुड़ी और कहा, मुझे महिलाएं पसंद हैं."
मैं मन ही मन सोची "वाह."
निया ने घर जाकर इस बारे में सोचा.
उसे अहसास हुआ कि उसके दिल में उसकी दोस्त को लेकर भावनाएं हैं.
दोनों छुप छुप कर डेट करने लगीं. दोनों साथ बाहर खातीं, शॉपिंग करने और बार भी साथ साथ जातीं.
बाहर की दुनिया के लिए दोनों किसी भी उन दो युवा दोस्तों की तरह दिखती थीं जो साथ उठते बैठते हैं.
ये रिश्ता लंबे वक्त तक नहीं चला लेकिन एक बात तो स्पष्ट थी.
निया को अब यह पता चल चुका था कि आखिर पुरुषों की ओर वो आकर्षित क्यों नहीं होती थीं.
निया को लगा कि उन्हें परिवार के किसी एक सदस्य को इसके बारे में बताना चाहिए.
उन्होंने इसके लिए अपने एक भाई को चुना.
वो कहती हैं, "उन्होंने मुझसे केवल दो सवाल पूछे. तुम्हें यह कब पता चला? और क्या तुम्हें इसका पक्का यकीन है?"
वो बताती हैं, "मैंने कहा, दो साल पहले और हां मुझे इसका यकीन है."
उन्होंने कहा कि मुझे यकीन इसलिए है क्योंकि, नेल्ला की तरह ही, मैंने भी कई घंटे ऑनलाइन बिताए हैं.
निया ने दुनिया भर के कई समलैंगिकों के वीडियो ब्लॉग देखे हैं.
उन्होंने समलैंगिकों, बाइसेक्सुअल और क्वीर समुदाय के कई रिपोर्ट्स पढ़े हैं.
उन्हें इंटरनेट पर इन समुदायों की इस्तेमाल की जाने वाली भाषा समझ में आने लगी है.
"मैं दूसरी महिलाओं तक पहुंचने के लिए एक खास मीम का इस्तेमाल करती हूं."
(जब बीबीसी ने निया से कहा कि हम ब्लू वायलेट की तस्वीरों का अपने इलेस्ट्रेशन की तस्वीरें बनाने में इस्तेमाल करेंगे, तो उन्होंने कहा, "सही है, ये हमारा सीक्रेट वायोला रिवॉल्यूशन है.")
निया के भाई ने कहा, "ओके, मुझे हमेशा तुम्हारा साथ मिला है."
दोनों गले मिले.
ये आखिरी बार था जब दोनों ने इस विषय पर बात की थी.
लीला
21 साल की लीला एक शख्स को डेट कर रही थीं.
लेकिन फिर दोनों अलग हो गए.
वो कहती हैं, "मुझे लगा मैं उसे नहीं चाहती थी. मैंने सोचा, शायद वो क्यूट नहीं था. इसलिए मैंने छोड़ दिया और एक क्यूट से शख्स को डेट करने लगी."
लेकिन ये भी नहीं चला.
तब एक पुरुष मित्र ने उनसे कहा, "आपको नहीं लगता कि शायद आप महिलाओं को पसंद करती हैं?"
इससे उनके भीतर यह अहसास जागा. अब खुद से झूठ बोलने का कोई मतलब नहीं था.
"मैं एक समलैंगिक हूं", लीला ने खुद से कहा. लेकिन वो कहती हैं कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि "इससे बाहर निकलने का रास्ता मिल सकता है."
इससे बाहर निकलने के लिए उन्होंने प्रार्थना, ध्यान सब कुछ आजमाया. वो खुद से नाराज़ हुईं.
फिर धीरे धीरे, इसे लेकर उनकी चिंताएं दूर होती गईं.
उन्होंने निया और नेल्ला की ही तरह बाकी दुनिया के लोगों से जुड़ना शुरू किया. फ़ेसबुक और यूट्यूब पर वीडियो देखने शुरू किये.
"मैंने सोचा, शायद मैं बुजुम्बुरा (बुरूंडी में एक शहर) में अकेली हूं, लेकिन दुनिया में अकेली नहीं हूं."
भाग्य और इंटरनेट
बुजुम्बुरा में दो तरीकों से समलैंगिक और बाइसेक्सुअल लोग एक दूसरे को ढूंढते हैं- भाग्य और इंटरनेट.
निया ने कहा, "मैं लीला से काम के दौरान मिली. हमने लंच के दौरान बातें करनी शुरू की. उस दौरान, हमें पता चला कि हम दोनों एक जैसी थीं."
वो कहती हैं, "ऐसा कोई समलैंगिक हॉटस्पॉट नहीं है जिसे गूगल पर ढूंढ कर वहां एक दूसरे से मिल सकें."
इसके बाद दोनों गहरे दोस्त बन गए.
"यह बताना मुश्किल है कि अफ़्रीका में समलैंगिक लोग एक दूसरे से कैसे मिलते हैं. इसके बारे में कुछ कहा नहीं जाता. आपको एक दूसरे की वाइब्स पकड़नी होती है क्योंकि आपके बीच अधिकांशतः बिना संवाद बातें होती हैं. आपको बॉडी लैंग्वेज और आंखों से बातें करना आना चाहिए."
लीला, निया और बाद में नेल्ला ने मिलकर एक समुदाय का गठन किया. वो कहती हैं कि हमारे जैसे दर्ज़नों हैं. वो खुद को बुरूंडी के सीक्रेट समलैंगिक समूह के रूप में देखती हैं.
दूसरा पहलू
2009 में बुरूंडी सरकार ने क़ानून में बदलाव कर समलैंगिक रिश्तों को अपराध की श्रेणी में डाल दिया.
इसके लिए दो साल की कैद या एक लाख फ़्रैंक (लगभग चार हज़ार भारतीय रुपये) तक का ज़ुर्माना या दोनों लगाने का प्रावधान रखा गया है.
बुरूंडी में समलैंगिक अधिकार के बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है.
2009 में ह्यूमन राइट्स वाच की एक रिपोर्ट आई थी, वो भी एलजीबीटी समुदाय के केवल 10 लोगों से बात करके और सिर्फ़ एक समलैंगिक का इंटरव्यू लेकर.
बीबीसी ने दर्ज़नों लोगों से बातें की.
निया कहती हैं, "हमारा समुदाय मजबूत और जीवंत है."
उन्हें उम्मीद है कि यह तो बातचीत की सिर्फ़ शुरुआत भर है.
"वियोला क्रांति" की शुरुआत.
इलस्ट्रेशनः जॉर्ज वाफुल्ला
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)