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ऑस्ट्रेलिया में क्यों हो रही है घोड़ों की मौत?
ऑस्ट्रेलिया की भीषण गर्मी में पिछले कुछ दिनों के दौरान 90 से अधिक जंगली घोड़ों की मौत हो गई है.
मध्य और उत्तर-मध्य ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी के एलिस स्प्रिंग्स के पास सूख चुके गड्ढ़ों में रेंजर्स को ये मरे हुए जानवर मिले.
क़रीब 40 घोड़े पानी की कमी और भूख से पहले ही मर चुके थे. बचे हुए मरणासन्न घोड़ों को बाद में प्रशासन ने मार दिया.
ऑस्ट्रेलिया में पिछले दो हफ़्ते से भीषण गर्मी पड़ रही है. इसने पूरे देश में गर्मी के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.
गुरुवार को, एडिलेड में 1939 के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए तापमान 46.2 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच गया.
ये घोड़े कैसे मिले?
स्थानीय प्राधिकरण सेंट्रल लैंड काउंसिल (सीएलसी) ने बताया कि रेंजर्स को घोड़ों का पता तब चला जब एक समुदाय के लोगों ने उनकी (घोड़ों की) गैरमौजूदगी को भांपा.
घोड़ों की मौत की जगह पर एक स्थानीय निवासी राल्फ टर्नर भी पहुंचे और उन्होंने इसकी तस्वीरें पोस्ट कीं और इसे 'नरसंहार' लिखा.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "यह मेरे लिए बहुत बड़ी यातना थी, मैंने पहले कभी इस तरह का कुछ नहीं देखा था. चारो ओर घोड़ों के शव पड़े थे."
उन्होंने कहा, "मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ऐसा भी कुछ हुआ था."
एक और स्थानीय शख़्स रोहन स्मिथ ने एबीसी से कहा कि वहां आमतौर पर पानी रहता था और इसके लिए घोड़े कहीं और नहीं जाया करते थे.
बचे घोड़ों को क्यों मारा गया?
काउंसिल ने कहा कि हमने बचे हुए घोड़ों को मारने की योजना इसलिए बनाई क्योंकि वो मौत के बेहद क़रीब थे.
सीएलसी के डायरेक्टर डेविड रॉस ने कहा कि परिषद 'प्यास से मर रहे' 120 अन्य जंगली घोड़ों, गधों और ऊंटों को मारने की योजना बना रहा है.
ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग के मुताबिक पिछले दो हफ़्तों के दौरान एलिस स्प्रिंग में तापमान 42 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ गया है, जबकि यहां आमतौर पर जनवरी में इससे 6 डिग्री कम तापमान रहता है.
ऑस्ट्रेलिया में रिकॉर्डतोड़ गर्मी
इस दौरान यहां ऑस्ट्रेलिया के सबसे गर्म 10 रिकॉर्डतोड़ तापमान में से पांच रिकॉर्ड किए गए.
प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी देते बुजुर्गों और बच्चों के बीमार होने की आशंका जताते हुए इन लोगों से घर के अंदर रहने का आग्रह किया है.
भीषण गर्मी से कई अन्य जंगली जीव भी प्रभावित हुए हैं. न्यू साउथ वेल्स से चमगादड़ों की सामूहिक मौत की रिपोर्ट भी मिली है.
सूखे से प्रभावित राज्यों में नदी के किनारे क़रीब दस लाख मछलियां भी मरी हुई पाई गई हैं.
"जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पड़ना शुरू"
रॉस ने कहा, "जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हम पर पड़ने लगा है, मुझे इस तरह की आपात स्थितियों के बढ़ने और बार बार होने की उम्मीद है."
"सही मायने में इनका सामना करने के लिए कोई भी इनके लिए वास्तविक रूप से तैयार नहीं है."
इस महीने की शुरुआत में अधिकारियों ने बताया था कि साल 2018 और 2017 ऑस्ट्रेलिया का तीसरा और चौथा सबसे गर्म साल रिकॉर्ड किया गया है.
मौसम विभाग ने 2018 की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जलवायु परिवर्तन से देश में भीषण गर्मी के मामले बढ़े हैं.
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