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शाकाहार या मांसाहार- जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए क्या खाएं
- Author, नस्सोज़ स्टायलियानू, क्लारा गीबोर्ग और हेलेन ब्रिग्स
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
हाल में किए गए वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि आसपास के वातावरण पर अपना कम प्रभाव डालने का (ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम करने का) सबसे असरदार तरीका मांस और दूध से जुड़े उत्पाद से बचना है.
लेकिन बीफ़ या फिर चिकन खाने का वातावरण पर कितना गंभीर असर पड़ता है?
क्या एक कटोरी चावल या चावल से बनी डिश खाने की बजाय एक प्लेट आलू के चिप्स खाए जाएं तो वातावरण के लिए कम ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होगा? क्या बीयर के मुकाबले वाइस वातावरण के लिए अच्छा चुनाव है.
नीचे दिए कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर आप ये जान सकते हैं कि आप जो खाते या पीते हैं उसका जलवायु पर कितना असर पड़ता है. इसमें आप 34 तरह के खाद्य पदार्थों के कारण होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की मात्रा के बारे में जान सकते हैं.
अगर आप डाएट कैलकुलेटर नहीं देख पा रहे हैं तो यहां क्लिक करें.
डिज़ाइन- प्रिना शाह. डेवेलपमेन्ट - फेलिक्स स्टीफ़नसन और बेकी रश.
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक शोध के मुताबिक़ वातावरण में जो ग्रीनहाउस होता है उसका चौथाई खाद्य उत्पादन से आता है और ग्लोबल वार्मिंग में इसका बड़ा योगदान होता है.
हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया है कि अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ वातावरण में अलग तरह से प्रभाव डालते हैं.
शोध में पाए गए नतीजों के अनुसार खाद्य पदार्थ से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब आधा हिस्सा केवल मांस या अन्य तरह के मांसाहारी खाद्य के कारण होता है. लेकिन इस तरह के खाद्य पदार्थों से हमें कुल खाने से मिलने वाले कैलरी का पांचवा हिस्सा ही मिलता है.
शोध में जितने खाद्य पदार्थों का विश्लेषण किया गया उनमें बीफ़ और भेड़ के मांस को वातावरण के लिए सबसे हानिकारक पाया गया.
कैसे बनाया गया कैलकुलेटर?
ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी के शोधकर्ता जोसेफ़ पूर और स्विट्ज़रलैंड के एग्रोइकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट रिसर्च डिविज़न ज्यूरिख़ के चॉमस नेमसेक ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पसंद किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी इकट्ठा की.
उन्होंने इनमें से 40 मुख्य खाद्य पदार्थ चुने और वातावरण पर इनके असर के बारे में जानने की कोशिश की.
उन्होंने पृथ्वी के वातावरण को गर्म करने वाली या जलवायु परिवर्तन में सहायक ग्रीनहाउस गैसों पर इन खाद्य पदार्थों के असर के बारे में शोध किया. साथ ही उन्होंने ये भी देखा कि इसके उत्पादन में कुल कितनी ज़मीन और साफ़ पानी का इस्तेमाल होता है.
इसके लिए उन्होंने 40,000 फार्म, 1,600 खाद्य उत्पादन केंद्र, खाद्य पदार्थों के पैकेजिंग के बारे में भी इकट्ठा जानकारी का विश्लेषण किया. पूर और नेमसेक ने ये भी जानने की कोशिश की कि अलग-अलग जगहों पर खाद्य उत्पादन के तरीकों और जलवायु का पृथ्वी पर क्या असर पड़ता है.
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