BREXIT: टेरीज़ा मे की संसद में हार के बाद 5 संभावनाएँ

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
अनिश्चितता - ब्रिटिश संसद में टेरीज़ा मे सरकार की ज़बरदस्त हार के बाद स्थिति क्या है, इसका जवाब बस केवल यही एक शब्द है.
प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के बारे में यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे लेकर वो मंज़ूरी दिलवाने संसद में गईं, और संसद ने उसे एक सिरे से ख़ारिज कर दिया.
हाउस ऑफ़ कॉमन्स में समझौते के पक्ष में 202 वोट आए तो 432 सांसदों ने इसका विरोध किया.
ये ऐतिहासिक हार थी. ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में कभी भी कोई सरकार इतने बड़े अंतर से नहीं हारी.
और अब विपक्षी लेबर पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर दिया है जिसके पारित होने का मतलब होगा - टेरीज़ा मे सरकार का अंत.
इस अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार शाम (भारतीय समयानुसार रात साढ़े बारह बजे) मतदान होने की संभावना है.
मंगलवार को संसद में सरकार की हार के बाद ये 5 स्थितियाँ हो सकती हैंः
1. विश्वास प्रस्ताव
लेबर पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का मक़सद प्रधानमंत्री को गद्दी से हटाना है.
अगर ये पास हो जाता है, तो 14 दिन के भीतर नई सरकार का गठन करना होगा.
इन 14 दिनों के भीतर या तो मौजूदा सरकार या नई सरकार विश्वास मत ला सकती है, और इसे जीत कर सत्ता में बनी रह सकती है.
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चुनाव करवाने पड़ेंगे.
ऐसी नौबत आई तो 25 कार्यदिवसों के बाद किसी भी दिन चुनाव हो सकते हैं.
हालाँकि अनुमान यही लगाया जा रहा है कि टेरीज़ा मे अविश्वास प्रस्ताव में अपनी सरकार बचा ले जाएँगी.
और फिर वो या तो वही समझौता या फिर ऐसा ही कोई समझौता फिर से संसद के समक्ष लेकर आएँगी.
लेकिन दूसरी संभावनाएँ भी हैं.

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2. कोई समझौता ही ना हो
अगर कुछ नहीं होता, तो अपने आप एक स्थिति आ जाएगी जिसे 'हार्ड ब्रेक्सिट' कहा जा रहा है - यानी 29 मार्च को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा, और फिर आगे उनके बीच कैसा व्यापारिक संबंध रहता है, इसे लेकर एक नए समझौते पर चर्चा शुरू करेगा.
हालाँकि बहुत मुमकिन है कि सरकार कोई ना कोई विधेयक पारित करवाएगी ताकि यूरोपीय संघ से अलग होते समय अचानक बड़ी परेशानी ना हो. पर ऐसा किया ही जाए ये ज़रूरी नहीं.
पर 'हार्ड ब्रेक्सिट' ब्रिटेन के लिए सबसे आख़िरी विकल्प लगता है.

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3 . नए सिरे से मोल-तोल
चूँकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का सुझाव रख सकती है.
मगर इसमें समय लगेगा और इसके लिए 29 मार्च की समयसीमा बढ़ाने की ज़रूरत हो सकती है.
29 मार्च 2017 वो दिन था जब ब्रिटेन सरकार ने आर्टिकल 50 लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेग्ज़िट लागू होना है.

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लेकिन समयसीमा बढ़वाने के लिए दो चरण ज़रूरी हैं.
पहला, ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के पास इसका आग्रह भेजना होगा और इसके लागू होने के लिए इसे सभी यूरोपीय देशों से पारित करवाना ज़रूरी होगा.
दूसरा, ब्रिटेन सरकार को अपने क़ानून में एक्ज़िट डे की परिभाषा बदलवाने के लिए बदलाव करने होंगे जिसे फिर सांसदों के सामने वोट के लिए रखना होगा.
लेकिन यूरोपीय संघ यदि दोबारा चर्चा के लिए तैयार नहीं हुआ तो सरकार को दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा.
4 . चुनाव
टेरीज़ा मे अगर विश्वास मत हासिल कर लेती हैं, तो वो शायद ये फ़ैसला कर सकती हैं कि इस गतिरोध की स्थिति से बाहर आने का सबसे अच्छा रास्ता ये है कि चुनाव कराए जाएँ.
अगर वो जीत जाती हैं तो फिर उन्हें अपने समझौते के लिए राजनीतिक समर्थन मिल जाएगा. मगर चुनाव हारने पर उनके सत्ता से बाहर होने का भी ख़तरा है.
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन भी चुनाव की मांग करते रहे हैं मगर टेरीज़ा मे इससे हमेशा इनकार करती रही हैं.
मगर टेरीज़ा मे केवल अपने बूते दोबारा चुनाव नहीं करवा सकतीं. समय से पहले चुनाव करवाने के लिए दो-तिहाई सांसदों से अनुमति लेनी ज़रूरी होती है.

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5 . दोबारा जनमत संग्रह
सरकार ब्रेक्सिट पर दोबारा जनमत संग्रह करवाने का भी फ़ैसला कर सकती है पर वो भी अपने आप नहीं हो सकता.
इसके लिए भी नियम क़ानून बने हैं.
हालाँकि टेरीज़ा मे इस संभावना से इनकार कर चुकी हैं. उनका मानना है कि इसके लिए सहमति बना पाना काफ़ी मुश्किल होगा.

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लेकिन अगर ये फ़ैसला हो भी जाता है तो भी ये जनमत संग्रह तत्काल नहीं हो सकता.
जानकारों का मत है कि इसके लिए ज़रूरी सभी चरणों को पूरा करवाने में जितना समय चाहिए, उस हिसाब से मार्च का अंत हो जाएगा.
और इसके साथ ही जो मौजूदा 29 मार्च की समयसीमा है उसे भी बढ़वाना होगा. यानी फिर वही सब करवाना होगा जिसका ज़िक्र ऊपर तीसरी संभावना में किया गया है.
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