कुलभूषण जाधव पर छिड़े विवाद पर बीबीसी हार्ड टॉक की प्रतिक्रिया

बीबीसी की सफाई

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बीबीसी ने अपने टीवी इंटरव्यू कार्यक्रम हार्ड टॉक में कुलभूषण जाधव के नाम को 'हटाने' पर प्रतिक्रिया दी है.

उसका कहना है कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर के इंटरव्यू में जाधव के ज़िक्र को एडिट करना 'कोई संसेरशिप नहीं' था.

बीबीसी ने ट्वीट कर कहा, "हार्ड टॉक में असद उमर के इंटरव्यू से कुलभूषण जाधव का नाम टीवी कार्यक्रम से हटाए जाने की तकनीकी व्याख्या है. रिकॉर्ड किया गया इंटरव्यू बहुत लंबा था और उसे प्रसारित करना मुश्किल था. हमें उसे एडिट करना पड़ा. इसे रेडियो और टीवी के लिए अलग-अलग तैयार किया गया था."

"उनका नाम टीवी कार्यक्रम से हटाया गया था. यह कोई सेंसरशिप नहीं है. कन्फ़्यूजन की वजह से ऐसा हुआ. हम दोबारा नाम लगा कर कार्यक्रम को फिर से प्रसारित करेंगे."

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कुलभूषण जाधव भारतीय हैं और पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई है.

03 मार्च 2016 को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ने जाधव को अवैध तरीक़े से घुसने और जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार किया था.

कुलभूषण जाधव

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भारत और पाकिस्तान के बीच का यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में है और इस साल मई में इंटरनेशल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने भारत की अपील पर जाधव की सज़ा पर रोक लगा दी थी.

हार्ड टॉक में पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने एक सवाल के जवाब में आरोप लगाया था कि बलूचिस्तान और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों में सीमा पार से चरमपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है और कुलभूषण जाधव ने इसकी जानकारी दी है.

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पाकिस्तान में छिड़ी बहस

बीबीसी के कार्यक्रम हार्ड टॉक में जाधव का नाम एडिट किए जाने के बाद पाकिस्तान में इस पर बहस छिड़ गई थी और ट्विटर पर लोग इसे सेंसरशिप बता रहे थे.

वीडियो कैप्शन, मां और पत्नी से मुलाक़ात के बाद क्या बोले कुलभूषण?

बीते गुरुवार को मानवाधिकारी मामलों की मंत्री शिरीन मज़ारी मामले में बीबीसी की आलोचना की थी और पक्षपात करने का आरोप लगाया था.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "जिस तरह से बीबीसी ने सेंसरशिप लगाया है और कुलभूषण के बारे में असद के ज़िक्र को हटाया है, वो शर्मनाक है. यह बीबीसी का पक्षपात है."

उनके इस ट्वीट के बाद लोग हार्ड टॉक के होस्ट स्टीफ़न सकर से प्रतिक्रिया मांगने लगे और पूछने लगे कि क्या ये सेंसरशिप थी.

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स्तंभकार मुशर्रफ़ ज़ैदी ने सवाल उठाया है कि क्या बीबीसी भारत के दबाव में ऐसा कर रहा है.

इसके बाद स्टीफ़न सकर ने बीबीसी के स्पष्टीकरण वाले ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लोगों को इसका जवाब दिया.

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