पाकिस्तानी विदेश मंत्री- दोनों देशों के फ़ासले मिटाने का रास्ता जंग नहीं

करतारपुर कोरिडोर

इमेज स्रोत, GURPREET/BBC

22 नवंबर को भारत सरकार ने डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक एक कॉरिडोर बनाने की घोषणा की ताकि सिख श्रद्धालु गुरु नानक की कर्मस्थली पाकिस्तान स्थित करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन कर सकें.

इसके ज़रिए दोनों देशों के श्रद्धालु बिना किसी वीज़ा के अंतरराष्ट्रीय सीमा में आ-जा सकेंगे.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने करतारपुर कॉरिडोर के बनाने पर बीबीसी संवाददाता सिंकदर किरमानी से बातचीत की, जिसमें उन्होंने कई अहम जानकारी दी.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

शाह महमूद क़ुरैशी ने बताया, ''दोनों देशों के बीच कई मसले हैं लेकिन उनका हल जंग नहीं. पाकिस्तान ने हमेशा अमन में, शांति की ख़्वाहिश ज़ाहिर की है.''

''फ़ासले मिटाने के लिए एक साथ मिलना-बैठना होता है और फ़ासलों को कम किया जाता है. और करतारपुर कॉरिडोर उन्हीं फ़ासलों को कम करने का एक उपाय है.''

उन्होंने अपनी बातचीत में ये भी बताया कि पहले लोग वाघा बोर्डर के ज़रिये 400 किमी. दूरी का सफ़र तय करते थें, जिसे अब चार किमी. किया जा रहा है.

करतारपुर कोरिडोर

बुधवार (28 नवंबर) को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान सरहद पर कॉरिडोर की नींव रखेंगे.

करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है लेकिन भारत से इसकी दूरी महज़ साढ़े चार किमी. है.

मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे.

इसके साथ ही माना जाता है कि 16वीं शताब्दी में करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव की मौत हुई थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था.

1947 में आज़ादी के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच तीन लड़ाई हो चुकी है. दोनों देशों के बीच के रिश्ते में हमेशा से तनाव रहे हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने बीबीसी को बताया कि कॉरिडोर के निर्माण पर उनकी सरकार ने दोनों देश के बीच शांति और सद्भावना की शुरुआत की है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री

इमेज स्रोत, Getty Images

वे कहते हैं, ''हमारी सरकार का काम ही तब्दीली करना है, जो अनेकता में एकता में विश्वास करती है. इस फ़सैले के बाद देश में ईद मनाई जा रही है.''

तहरीके-ए-इंसाफ़ की जीत के बाद जुलाई में भाषण के दौरान प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था, "अगर भारत एक क़दम बढ़ायेगा तो हम दो क़दम."

दोनों देश कॉरिडोर के निर्माण के लिए अपनी तरफ़ के हिस्से को पूरा करेंगे.

क़ुरैशी ने बताया कि यहां आने के लिए किसी भी तरह का वीज़ा नहीं लगेगा. लोग अपना नाम रजिस्टर करवायेंगे और कुछ फ़ीस अदायगी के बाद दर्शन किये जा सकेंगे.

''अगर तादाद बढ़ेगी तो इसके साथ बाज़ार, होटल भी बनेंगे जिससे कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी. इज़ाफ़ा ही इज़ाफा होगा.''

करतारपुर कोरिडोर

इमेज स्रोत, GURPREET CHAWLA/BBC

भारत सरकार ने पंजाब के गुरदासपुर में मौजूद डेरा बाबा नानक से भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर साहिब कॉरिडोर के निर्माण के फ़ैसले पर मुहर लगाई थी.

वीडियो कैप्शन, क्या सोचते हैं करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर पाकिस्तान से लोग

करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बारे में कैबिनेट के फ़ैसले की जानकारी वित्त मंत्री अरूण जेटली ने एक बयान जारी कर दी थी.

उन्होंने बताया कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक कमिटी बनी थी, जिसके सुझाव पर ये फ़ैसला लिया गया है.

इसके कुछ घंटों के भीतर ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि वो बाबा गुरु नानक के 550 प्रकाश पर्व पर पहले ही कॉरिडोर बनाने की घोषणा कर चुके हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)