राधा व्यास, जिन्हें एक डेट ने बना दिया अरबपति

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- Author, सारा फ़िनले
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दुनिया घूमने की शौकीन राधा व्यास की मुलाकात जब ली थॉम्पसन से हुई तो दोनों को पता भी नहीं था कि एक दिन वो 70 करोड़ की कंपनी के मालिक बन जाएंगे.
ये कहानी ज़रा पुरानी है. साल 2012 में जब राधा की मुलाक़ात ली से हुई तब राधा 32 साल की सिंगल महिला थीं और ली की उम्र 31 रही होगी.
आमने-सामने मिलने से पहले दोनों की मुलाक़ात इंटरनेट पर हुई थी.
राधा और ली की पहली मुलाक़ात एक डिनर डेट पर हुई जहां उन्हें पता चला कि वो दोनों ही घूमने-फिरने के शौकीन हैं.
इसके बाद मुलाक़ातों का सिलसिला चलता रहा और एक दिन लंदन के एक बार में ली से बात करते-करते राधा ने कहा कि कोई भी कंपनी उनकी उम्र के लोगों को ध्यान में रखकर ट्रैवल पैकेज़ क्यों नहीं बनाती है.
राधा का तर्क ये था कि 18 से 30 साल के बच्चों के लिए बाज़ार अलग-अलग स्कीमें लेकर आता है जो इस उम्र वर्ग के सिंगल युवाओं को अंजान लोगों के साथ घूमने का मौका देता है. यही नहीं, वृद्ध लोगों के लिए भी ऐसी तमाम स्कीमें मौजूद हैं.
लेकिन उनके उम्र वालों के लिए ऐसी कोई स्कीम नहीं है.
इसके बाद ली और राधा काफ़ी देर तक इस बारे में बात करते रहे.
राधा बताती हैं, "बिजनस आइडिया के बारे में बात करते-करते हमें समय का पता ही नहीं चला. हम काफ़ी उत्साहित होकर इस बारे में बात करते रहे और कुछ हफ़्तों के अंदर ही हम एक प्रेमी जोड़े से कहीं आगे बढ़कर संभावित बिजनेस पार्टनर बन गए."
अब राधा और ली एक दूसरे से शादी कर चुके हैं.
यही नहीं, दोनों एकसाथ मिलकर फ्लैश पैक नाम की एक कंपनी स्थापित कर चुके हैं जो कि 30 से 40 आयु वर्ग वाले लोगों को वियतनाम, कंबोडिया, श्रीलंका और जॉर्डन जैसे देशों की यात्रा पर ले जाती है.
ये कंपनी अब तक दस हज़ार लोगों को ट्रिप पर ले जा चुकी है.

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कहां से आया कंपनी का आइडिया?
राधा के मन में इस तरह की कंपनी बनाने का आइडिया साल 2012 में आया.
वह छुट्टियों पर जाना चाहती थीं लेकिन उनके दोस्तों में ज़्यादातर की शादी हो चुकी थी तो कई लोगों के पास टाइम नहीं था.
ऐसे में उन्होंने अकेले ही एक ग्रुप ट्रिप पर कंबोडिया जाने का फ़ैसला किया लेकिन इस ग्रुप में उनके साथ युवाओं की संख्या ज़्यादा थी.
अपने उस अनुभव को याद करते हुए राधा बताती हैं, "इस ट्रिप पर मेरे साथ जाने वाले सभी लोग बहुत अच्छे थे. लेकिन, वे सभी बहुत छोटे थे जिसकी वजह से मैंने अपनी और उनकी सोच में एक तरह का अंतर देखा.
"इसके बाद मेरे मन में ये ख्याल आया कि कोई कंपनी मेरी उम्र के लोगों के लिए इस तरह की स्कीम लेकर क्यों नहीं आती है."
शुरू हुई कंपनी की रिसर्च
पहली मुलाक़ात के बाद राधा और ली ने अपने बिजनस आइडिया को लेकर रिसर्च शुरू कर दी ताकि इस तरह की कंपनी बनाने का उनका सपना साकार हो सके.
इस दौरान राधा फंडरेज़िंग सेक्टर में अपनी नौकरी करती रहीं और ली एक फ़ोटो जर्नलिस्ट के रूप में काम करते रहे. लेकिन, दोनों को जब भी खाली समय मिलता तो वो कंपनी के काम में जुट जाते.
इसी तरह उन्होंने एक दिन अपनी कंपनी का नाम फ्लैश पैक रखा जो कि फ्लैश बैकपैकिंग का शॉर्ट फॉर्म है.
फ्लैश बैकपैकिंग से आशय कहीं घूमने जाने के लिए तेजी से पीठ पर लादा जाने वाला बैग तैयार करना है.
इसके बाद दोनों ने पंद्रह लाख रुपये जुटाकर अपनी कंपनी शुरू कर दी.
लेकिन, जब 2014 में उन्होंने अपनी वेबसाइट लॉन्च की तो सबसे पहले उन्हें सिएरा लियोन की ट्रिप मिली.

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आसान नहीं रही सफ़लता
राधा बताती हैं, "अपना काम शुरू करने के बाद पहले छह महीने काफ़ी मेहनत भरे थे. आप ये अक्सर सुनते होंगे कि लोगों को अचानक सफ़लता मिल गई लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं हुआ.
हम सिएरा लियोन को एक एडवेंचर ट्रिप बेचने में सफल हो गए, लेकिन हमें इस व्यक्ति के पैसे वापस करने पड़े क्योंकि हमें इस ट्रिप के लिए कोई और नहीं मिला."
लेकिन ली के एक मार्केटिंग आइडिया के बाद फ्लैश पैक का काम बढ़ने लगा.
दरअसल, साल 2014 में ब्राज़ील में वर्ल्ड कप शुरू होने वाला था और इस दौरान उनके दिमाग़ में एक ऐसी फ़ोटो खींचने का आइडिया आया जिसके वायरल होने की संभावना थी.
ली बताते हैं, "मैंने ब्राज़ील के रियो डि जिनेरियो शहर में जीसस क्राइस्ट द रीडीमर मूर्ति के ऊपर खड़े कुछ मज़दूरों की तस्वीरें देखी थीं जहां से पूरे शहर का एक अलग ही नज़ारा दिखता था. मैं जानता था कि अगर मैं ये तस्वीर ले सका तो ये वायरल हो जाएगी."
ऐसे में ली ने ब्राज़ील के टूरिस्ट बोर्ड को 738 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मूर्ति पर चढ़कर तस्वीर लेने के लिए मना लिया.

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वायरल हुई फ़ोटो
इसके बाद वही हुआ जिसकी उम्मीद ली ने लगाई थी.
सोशल मीडिया पर इस फ़ोटो को अपार सफ़लता मिली जिसके बाद दुनिया भर के न्यूज़ आउटलेट्स ने उनका इंटरव्यू लिया जिससे उनकी वेबसाइट फ़्लैश पैक पर काफ़ी ट्रैफिक आया.

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राधा और ली की इस कंपनी का टर्नओवर इस समय लगभग चालीस करोड़ रुपये है और कंपनी की कुल कीमत लगभग 1 अरब रुपये है.
हालांकि, अब इस कंपनी में कुछ बाहरी निवेशक भी शामिल हो गए हैं लेकिन कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी अभी भी राधा और ली की है.
ट्रैवल इंडस्ट्री के जानकार और डील्स देने वाली कंपनी ट्रेनलज़ू के बॉस जोएल ब्रैंडन ब्रावो कहते हैं कि फ़्लैश पैक ने बड़ी ही सफ़लतापूर्वक बाज़ार के उस हिस्से को निशाना बनाया जिस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया था.
ब्रावो बताते हैं, "फ्लैश पैक उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जो कि 30 से 40 साल की उम्र में अकेले घूमने जाने वाले लोगों के लिए काम कर रही है. ये सीधे-सीधे उस वर्ग पर ध्यान दे रही है जिनके पास टाइम की कमी है लेकिन वो घूमने जाना चाहते हैं, इस वर्ग के पास पैसे की कोई कमी नहीं है. लेकिन, इनके पास अपनी ट्रिप को डिज़ाइन करने की फुरसत नहीं है."
"इस समय जब कई ब्लॉगर और सोशल मीडिया सेलिब्रिटीज़ अकेले घूमने जा रहे हैं तो इससे ये पता चला है कि अकेले घूमना संभव है और ये काफ़ी सकारात्मक भी है."

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राधा और ली मानते हैं कि अपने पार्टनर के साथ बिजनस शुरू करने से आपके रिश्ते पर असर पड़ सकता है लेकिन आख़िरकार इसका असर बहुत ही सकारात्मक होता है.
ली कहते हैं, "मैं अपने दम पर इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था. एक कंपनी को खड़ा करना काफ़ी अकेलेपन से भरा काम होता है. ऐसे में अगर आपको अच्छे और बुरे दिनों का साथी मिल जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है."
कंपनी की शुरुआत में राधा और ली के बीच काम अलग-अलग नहीं था. लेकिन, अब राधा कंपनी की सीइओ हैं और ली कंपनी के बज़ मेकर हैं.
भविष्य के बारे में बात करें तो फ्लैश पैक उत्तरी अमरीका में अपना ऑफ़िस खोलने जा रही है.
कंपनी की सफ़लता पर राधा कहती हैं कि ज़्यादातर लोग उनकी उम्र के लोगों से बात नहीं कर रहे हैं. ऐसे में उन्होंने इन लोगों को सेवा देना शुरू कर दिया है.
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