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ब्राज़ील चुनाव में दक्षिणपंथी बोलसोनारो की जीत
ब्राज़ील में दक्षिणपंथी नेता जेयर बोलसोनारो ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है.
रविवार को ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव में दूसरे और आख़िरी चरण का मतदान हुआ. अब तक नब्बे फीसदी से ज़्यादा वोट गिने जा चुके हैं जिसमें से बोलसोनारो को 56 और उनके प्रतिद्वंद्वी वामपंथी नेता फर्नांडो हद्दाद को 44 फीसदी वोट मिलते नज़र आ रहे हैं.
मतदान से पहले आए ओपिनियन पोल में ही बोलसोनारो को बढ़त मिलने के आसार जताए गए थे.
इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार और अपराध रहे. चुनाव प्रचार के दौरान बोलसोनारो पर चाकू से हमला भी हुआ था जिसमें उनके शरीर से 40 प्रतिशत खून बह गया था और उन्हें तुरंत सर्जरी करवानी पड़ी थी.
63 वर्षीय बोलसोनारो सेना के पूर्व कप्तान हैं. वे कन्जरवेटिव सोशल लिबरल पार्टी से आते हैं. गर्भपात, नस्लवाद, प्रवासन, समलैंगिकता और बंदूक से जुड़े क़ानूनों पर बोलसोनारो के उग्र विचारों के चलते उन्हें 'ब्राज़ील का ट्रंप' भी कहा जाता है.
उनकी जीत ब्राज़ील में आए दक्षिणपंथी रुझान को दर्शाती है. ब्राज़ील 1964 से 1985 तक सैन्य शासन में रहा है.
बोलसोनारो पर चाकू से हुआ था हमला
बोलसोनारो के प्रतिद्वंद्वी फर्नांडो हद्दाद की उम्र 55 साल है और वो साओ पाओलो के मेयर और शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. हद्दाद का जन्म लेबनान से आए प्रवासियों के परिवार में हुआ था.
हद्दाद वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार थे. उन्हें वर्कर्स पार्टी ने पूर्व राष्ट्रपति लुइज़ इनेसिओ लुला डि सिल्वा की जगह उम्मीदवार बनाया था. लुला डि सिल्वा भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद 12 साल क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.
राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के मतदान से करीब एक महीना पहले ही हद्दाद को राष्ट्रपति की उम्मीदवारी सौंपी गई थी.
शनिवार को आए दो ओपिनियन पोल में बताया गया कि हद्दाद के लिए जनसमर्थन बढ़ रहा है हालांकि बोलसोनारो को 55 प्रतिशत मत मिलने का अनुमान है.
अपने अंतिम चुनाव प्रचार में हद्दाद ने अपने समर्थकों से कहा कि उनके लिए चीजें बदल रही हैं लेकिन चुनाव नतीजों में वो काफी पीछे रह गए.
वहीं बोलसोनारो आख़िरी समय में सोशल मीडिया के ज़रिए ही प्रचार कर रहे थे. जब से उन पर चाकू से हमला हुआ था, वे जनसभाएं नहीं कर रहे थे.
बोलसोनारो ने ट्वीट किया था कि ईश्वर यही चाहते हैं, कल हमारे लिए एक नया स्वतंत्रता दिवस होगा.
कैसा है चुनावी माहौल?
बीबीसी की दक्षिण अमरीकी संवाददाता कैटी वॉटसन रियो के कुछ मतदान केंद्रों में पहुंचीं और उन्होंने वहां ताज़ा हाल जाना.
कैटी बताती हैं, ''हमने रियो के कुछ मतदान केंद्रों में पूरा दिन बिताया. हम लेबनान के पड़ोस में बने मतदान केंद्र और प्रसिद्ध पनामा बीच के मतदान केंद्र में भी गए.
वहां कुछ लोग बोलसोनारो के समर्थन में हरे, नीले और पीले रंग के कपड़े पहन कर पहुंचे थे. वहीं कुछ लोगों ने हद्दाद के समर्थन में लाल रंग के कपड़े पहने थे.
अधिकतर लोग शांतिपूर्ण तरीके से ही मतदान कर रहे थे लेकिन बोलसोनारो के कुछ समर्थक हद्दाद के समर्थकों पर चीखते हुए देखे गए.
वे वर्कर्स पार्टी के समर्थकों से बोल रहे थे, ''तुम समाजवादी लोग वेनेज़ुएला चले जाओ.''
रोसिन्हा एक पिछड़ा हुआ गरीब इलाका है. यहां के मतदान केंद्र में बहुत कम ऐसे लोग हैं जो अपना राजनीतिक झुकाव स्पष्ट तौर पर बताते हैं. बड़ी मुश्किल से एक या दो लोगों ने ही हमसे बात की.
बीते कुछ वर्षों में ब्राज़ील में अपराध के मामलों बहुत ज़्यादा वृद्धि देखने को मिली है. साथ ही भ्रष्टाचार की वजह से देश की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई.
साल 2015 में आई मंदी के दौर में देश की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत तक गिर गई थी.
ब्राज़ील में क़रीब 15 करोड़ पंजीकृत वोटर हैं, जिनके लिए वोट डालना अनिवार्य है.
बोलसोनारो अब राष्ट्रपति माइकल टेमेर का स्थान लेंगे. टेमेर डेमोक्रेटिक मूवमेंट पार्टी (एमडीबी) के सदस्य हैं.
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