गुप्ता बंधुओं की कभी दक्षिण अफ्रीका में तूती बोलती थी अब कोई नाम भी नहीं लेना चाहता

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इमेज कैप्शन, जैकब जुमा के बेटे दुदुज़ाने जुमा (दाएं) गुप्ता भाइयों के लिए काम करते थे
    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दक्षिण अफ्रीका से

दक्षिण अफ्रीका में कभी बहुत लोकप्रिय रहे राष्ट्रपति जैकब जुमा को इन दोनों भाइयों की वजह से अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी. गुप्ता बंधुओं की वजह से भारतीय मूल के व्यापारियों को लोग संदेह की नज़र से देखने लगे हैं, अगर किसी के नाम में गुप्ता हो तब तो और भी मुश्किल है.

दक्षिण अफ्रीका में देश के सबसे बड़े घोटाले में न्यायिक जांच चल रही है. इस घोटाले में भारत के गुप्ता परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप और उनके मित्र पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के खिलाफ गंभीर आरोपों की पड़ताल हो रही है.

ऐसे आरोप हैं कि देश के वित मंत्री एनएम नेने को 2015 में राष्ट्रपति जुमा ने गुप्ता भाइयों के कहने पर निकाल दिया था. बात इतनी बढ़ी कि ज़ुमा को राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और उसके बाद नेने को दोबारा वित्त मंत्री बना दिया गया.

जुमा और गुप्ता परिवार दोनों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है. इस मामले की सुनवाई का लाइव प्रसारण पूरा देश देख रहा है.

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भारतीयों पर भरोसा हिला

ऐसा लगता है कि दक्षिण अफ़्रीका के आम लोगों का भारतीय व्यापारियों पर विश्वास उठ गया है. वजह एक बड़ा घोटाला है जिसमें भारत से आए तीन भाई भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे हैं. इनके नाम हैं अजय गुप्ता, अतुल गुप्ता और राजेश गुप्ता. गुप्ता परिवार के ये तीनों भाई देश से फ़रार हैं.

मुझे कई दक्षिण अफ़्रीकी लोगों ने बताया कि वो अब भारतीय व्यापारियों पर भरोसा नहीं कर सकते. उनमें से एक ने कहा कि वो ये देखकर काफी निराश थे कि कैसे "भारतीय, जिन्हें हमने अपने दोस्तों के रूप में हमेशा देखा है, उन्होंने हमारे राजनीतिक वर्ग को भ्रष्ट बना दिया है."

जोहान्सबर्ग में एक व्यापारी ने, जिसने मुंबई में थोड़े समय तक काम किया है, स्पष्ट रूप से कहा कि वो कभी भी भारतीय व्यापारियों के साथ कारोबार नहीं करेंगे. उन्होंने थोड़ा सा रुक कर कहा कि देश के संस्थानों को इस घोटाले से संभलने में सालों लग जाएंगे.

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इमेज कैप्शन, पुलिस ने इस साल की शुरुआत में गुप्ता परिवार की संपत्ति पर छापे मारे

गुप्ता परिवार की तरक्की की कहानी

भारतीय भाइयों की कहानी एक बॉलीवुड फिल्म प्लॉट की तरह लगती है. तीन भाई 1993 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए. उस समय नस्लवाद खत्म हो रहा था. इन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया.

वो कुछ ही समय में अमीर और प्रभावशाली बन गए, राज्य को अपने क़ब्ज़े में करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया, और फिर, वो ग़ायब हो गए. गुप्ता परिवार और राष्ट्रपति जुमा के बीच घनिष्ठ मित्रता का वर्णन करने के लिए स्थानीय मीडिया ने "ज़ुप्ता घोटाला" शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया है.

यहाँ लोग सोचते हैं कि एक दूर-दराज़ के देश से आकर कोई तुरंत इतना अमीर कैसे बन सकता है और राष्ट्रपति तक कैसे उसकी पहुँच हो सकती है.

इस समय पूरा देश टीवी पर जारी सार्वजनिक जांच की सुनवाई देख रहा है. लोग इस जांच का तुरंत अंत चाहते हैं ताकि दोषियों पर अदालत में आरोप लगाए जा सकें.

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इमेज कैप्शन, 2016 में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने राजधानी प्रिटोरिया में मार्च किया

दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा घोटाला

ऐतिहासिक रूप से, दक्षिण अफ़्रीका ने भारतीय व्यापारियों हमेशा स्वागत किया है. वर्तमान में 60 से अधिक भारतीय कंपनियों ने देश में निवेश किया है. उनका कुल निवेश 50 बिलियन रैंड से अधिक हो गया है और उन्होंने अब तक 18 हज़ार से अधिक स्थानीय लोगों को नौकरियां दी हैं.

लेकिन गुप्ता भाइयों से जुड़े घोटाले ने भारतीय व्यापारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है.

दक्षिण अफ़्रीका के इतिहास में सबसे बड़े घोटाले के नतीजे में गुप्ता भाइयों के व्यापारिक साम्राज्य का तेज़ी से पतन हुआ. इस सनसनीख़ेज़ घोटाले के कारण इस साल फरवरी में गुप्ता परिवार के शक्तिशाली मित्र और राष्ट्रपति जैकब जुमा को भी अपमानजनक तरीके से सत्ता से बाहर होना पड़ा.

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इमेज कैप्शन, जैकब जुमा को अपनी पार्टी में अब भी भारी समर्थन है

पिछले महीने घोटाले की एक सार्वजनिक जांच शुरू की गई थी. अमीर गुप्ता परिवार पर राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया जा रहा है. कहा जा रहा है कि गुप्ता बंधु इतने शक्तिशाली हो गए थे कि वे मंत्रियों के निर्णय और उनका भविष्य तय करने लगे थे.

जुमा के नौ साल के शासन के दौरान परिवार पर लाखों डॉलर के सरकारी ठेके लेने का आरोप लगाया गया है.

जुमा ने, जो अब भी सत्तारूढ़ अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (एएनसी) में काफी शक्तिशाली हैं, अपने बेटे के खिलाफ लगे इल्ज़ामों को भी ग़लत बताया है. उनके अनुसार उनके खिलाफ ये एक सियासी साज़िश है.

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इमेज कैप्शन, अतुल गुप्ता के ख़िलाफ़ जैकब जुमा की कैबिनेट नियुक्तियां करने का इल्ज़ाम है

गुप्त भाइयों का संबंध उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर से है जहां उनके पिता शिव कुमार गुप्ता मसालों के एक व्यापारी थे. उन्होंने अपने बेटों को व्यापार के लिए विदेश जाने के लिए प्रोत्साहित किया. सबसे बड़े भाई अजय रूस गए, अतुल को दक्षिण अफ्रीका भेजा गया और सबसे छोटे बेटे राजेश ने (जो टोनी के नाम से भी जाने जाते हैं) चीन में व्यवसाय किया. बाद में परिवार ने दक्षिण अफ़्रीक़ा में अपने क़दम जमाये और अपने व्यापार को आगे बढ़ाया.

दक्षिण अफ़्रीकी अधिकारियों को गुप्ता भाइयों की तलाश है. लेकिन उनके वकील ने जांच आयोग को बताया है कि वो देश में नहीं हैं. ऐसा माना जाता है कि वो दुबई में हैं, दक्षिण अफ़्रीका और भारत की पुलिस ने परिवार के कई ठिकानों पर छापे मारे हैं.

जाँच कब खत्म होगी ये किसी को नहीं मालूम, लेकिन दक्षिण अफ़्रीका भावना यह है कि यदि मुकदमा चलाने में अनुचित देरी होती है तो इससे देश की लोकतांत्रिक संस्थानों को और भी नुकसान हो सकता है.

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