डोनल्ड ट्रंप को आशंका, रूस के बाद अब चीन कर सकता है चुनावों में दख़लअंदाज़ी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन अमरीका के आगामी मध्यावधि चुनावों को प्रभावित करना चाहता है.
यह बात उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में दुनिया के कई बड़े नेताओं के सामने कही.
ट्रंप ने कहा, "वो नहीं चाहते कि मैं जीतूं क्योंकि मैं पहला अमरीकी राष्ट्रपति हूं जिसने उन्हें व्यापार के मुद्दे पर चुनौती दी है."
हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया.
अमरीका और चीन के बीच व्यापार शुल्क को लेकर विवाद तब से चल रहा है जब से डोनल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला है.
चीनी विदेश मंत्री ने ट्रंप के दावों को 'अनुचित आरोप' कहकर ख़ारिज कर दिया. अमरीका में मध्यावधि चुनाव 6 नवंबर को होने वाले हैं.

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बैठक किसी और मुद्दे पर थी लेकिन...
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक परमाणु, रायायनिक और जैविक हथियारों पर रोक लगाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी लेकिन ट्रंप ने इस मौके पर चीन को निशाना बना लिया.
उन्होंने कहा, "ये दुख की बात है कि चीन नवंबर में होने वाले हमारे आगामी चुनाव में मेरे ख़िलाफ़ दख़ल देने की कोशिश कर रहा है.''
ट्रंप ने कहा, "वह नहीं चाहते कि मैं जीतूं, वो नहीं चाहते कि हम जीतें क्योंकि मैं ऐसा पहला राष्ट्रपति हूं जिसने व्यापार के मुद्दे पर चीन को चुनौती दी है. इतना ही नहीं, हम व्यापार के मुद्दे पर उनसे जीत भी रहे हैं. हम हर स्तर पर उनसे जीत रहे हैं. हम नहीं चाहते कि वह हमारे चुनाव में दखल दें."

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चीन का जवाब
ट्रंप के आरोपों के जवाब में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सुरक्षा परिषद से कहा कि चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता.
उन्होंने कहा, "चीन हमेशा से दूसरे देशों के घरेलू मामलों में दख़लअंदाज़ी न करने के सिद्धांत का पालन करता आया है. यह चीनी विदेश नीति की परंपरा रही है."
यी ने कहा, "हमने न तो पहले दूसरे देशों के घरेलू मामलों में दखल दिया है और न ही आगे ऐसा करेंगे. हम चीन पर लगाए गए अनुचित आरोपों को स्वीकार नहीं कर सकते."
इसके बाद डोनल्ड ट्रंप ने ट्विटर पर चीनी अख़बारों की कतरनें पोस्ट की और उन्हें 'प्रोपगेंडा' बताया.
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यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने चीन पर अमरीकी चुनावों में दख़ल देने का आरोप लगाया है.
पिछले महीने अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा था कि रूस, उत्तर कोरिया, ईरान और चीन अमरीकी चुनावों में हेरफेर की योजना कर रहे हैं.
इससे एक दिन पहले भी डोनल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण में चीन के प्रति अपने तल्ख़ रवैये को सही ठहराया था.

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अभी कैसे हैं चीन और अमरीका के रिश्ते?
पिछले कुछ महीने में अमरीका और चीन के बीच ट्रेड वॉर गहराता ही रहा है. दोनों देश एक दूसरे से आयातित उत्पादों पर शुल्क बढ़ाते चले जा रहे हैं.
सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने चीनी उत्पादों पर 200 बिलियन डॉलर शुल्क लगाने का आदेश दिया था.
इससे पहले भी अमरीका ने चीनी उत्पादों पर 50 बिलियन डॉलर आयात शुल्क लगाया था और जवाब में चीन ने भी इतनी ही क़ीमत वाले उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगा दिया था.
पिछले कुछ वक़्त में दोनों देशों के सैन्य संबंधों में भी कड़वाहट आई है. अमरीका ने चीनी सेना पर रूस से हथियार ख़रीदने की वजह से पाबंदियां लगाईं.
जवाब में चीन ने अमरीका दौरे पर गए अपने नौसेना प्रमुख को वापस बुला लिया और दोनों देशों के बीच होने वाली सैन्य वार्ता को स्थगित कर दिया गया.
इसके अलावा चीन ने अमरीकी नौसेना के एक जहाज़ को हॉन्गकॉन्ग में ठहरने से भी रोक दिया.
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