उर्दू प्रेस रिव्यू: 'कमज़ोर लोकतंत्र भी तानाशाही से बेहतर'

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान में 25 जुलाई को संसद और विधानसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं. इसलिए ज़ाहिर है पिछले हफ़्ते यहां से छपने वाले सारे अख़बारों में चुनावी ख़बरें ही सुर्ख़ियां बटोरती रहीं.
लेकिन चुनाव के अलावा अगर कोई ख़बर अपने लिए जगह बना पा रही है तो वो है पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की गिरफ़्तारी.
पाकिस्तान की भ्रष्टाचार निरोधी संस्था नेशनल एकाउंटिबिलिटी ब्यूरो( नैब) की एक अदालत ने नवाज़ शरीफ़, उनकी बेटी मरियम नवाज़ और उनके दामाद कैप्टन सफ़दर को भ्रष्टाचार का दोषी माना था.
अदालत ने नवाज़ शरीफ़ को 10 साल, मरियम को सात साल और मरियम के पति कैप्टन सफ़दर को एक साल की सज़ा सुनाई है.
फ़ैज के साथ विरोध की आवाज़
अदालती फ़ैसले के समय नवाज़ शरीफ़ और मरियम नवाज़ दोनों ही लंदन में थे. 13 जुलाई को वे दोनों लंदन से लाहौर पहुंचे. हवाई अड्डे पर ही उन्हें गिरफ़्तार करके अडियाला भेज दिया गया है.
गिरफ़्तारी के बाद से नवाज़ परिवार की तरफ़ से पहला बयान मरियम नवाज़ का आया है. अख़बार जंग के मुताबिक़, 13 जुलाई के बाद से मरियम का ट्विटर हैंडल ख़ामोश था.
लेकिन शनिवार को मरियम नवाज़ ने ट्वीट करते हुए उर्दू के जाने माने शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को याद किया. उन्होंने फ़ैज़ की एक बहुत ही मशहूर कविता ट्वीट की है.

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इस बीच एक दूसरे पर आरोपों का सिलसिला बरक़रार है.
एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा है कि नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग (नून), और इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ दहशतगर्द संगठनों के साथ मिलकर उनके संगठन (पीपीपी) के ख़िलाफ़ गठबंधन बनाते हैं.
'तानाशाही से बेहतर है कमज़ोर लोकतंत्र'
दुनिया अख़बार के मुताबिक़ लाहौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बिलावल भुट्टो को कहना था, ''कमज़ोर लोकतंत्र भी तानाशाही से बेहतर है. नफ़रत की राजनीति से एक चुनाव तो जीता जा सकता है, लेकिन आगे आने वालों दिनों में देश का ही नुक़सान होता है.''
उधर इमरान ख़ान का कहना है कि पाकिस्तान को इस वक़्त एक मज़बूत नेता की ज़रुरत है.
अख़बार एक्सप्रेस ने इमरान ख़ान के बीबीसी इंटरव्यू का हवाला दिया है.

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अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ इमरान ख़ान का कहना था, ''मौजूदा हालात में पाकिस्तान जिस तहर के आर्थिक संकट में है, उससे निबटने के लिए एक मज़बूत सरकार की ज़रुरत है जो बड़े फ़ैसले कर सके और कड़े क़दम उठा सके.''
उसी साक्षात्कार का हवाला देते हुए अख़बार आगे लिखता है, ''इमरान ख़ान ने कहा कि मुस्लिम लीग (नून) और पीपीपी से गठबंधन की बजाए वो विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे.''
चुनाव आयोग पर उठ रहे हैं सवाल
उधर मुस्लिम लीग (नून) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ का दावा है कि उनकी पार्टी चुनाव जीत रही है और अगर निष्पक्ष चुनाव हुए तो पंजाब, ख़ैबरपख़्तूख़्वान और केंद्र में उनकी पार्टी की जीत निश्चित है.
दुनिया अख़बार के अनुसार शहबाज़ शरीफ़ का कहना था, ''अंतरिम सरकार पीटीआई के इशारों पर नाच रही है. पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और गृहमंत्री पीटीआई के कार्यकर्ता बने हुए हैं और चुनाव आयोग ख़ामोश तमाशाई बने हुए हैं.''

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शहबाज़ शरीफ़ आगे कहते हैं, ''हमारी नैब (नेशनल एकाउंटिबिलिटी ब्यूरो) में पेशियां हो रही हैं, जबकि कुछ लोग नैब में पेस्ट्रियां खा रहे हैं. लाडला ( इमरान ख़ान) कुछ भी करे उसे खुली छूट है.''
लेकिन पूर्व गृहमंत्री और एक समय में नवाज़ शरीफ़ के सबसे क़रीबी माने जाने वाले नेताओं में से एक चौधरी निसार अली ने नवाज़ शरीफ़ को सलाह देते हुए कहा कि अगर फ़ैसला उनके ख़िलाफ़ आ गया है तो वो अदालत में लड़ें, अदालत से नहीं लड़ें.
चौधरी निसार अली को नवाज़ शरीफ़ ने टिकट नहीं दिया था, इसलिए वो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.
अख़बार जंग के मुताबिक़ चौधरी निसार अली का कहना था, ''हम 14-15 लोग नवाज़ शरीफ़ को आगे लाए. मेरे सिवा सब मुस्लिम लीग (नून) छोड़ गए जबकि नवाज़ शरीफ़ मुश्किल में अपनी ग़लतियों से फंसे हैं.''
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