'शाहरुख़ को पाकिस्तान में प्रचार करने के लिए नहीं कहूंगी'

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- Author, इशारुल्ला
- पदनाम, बीबीसी संवाददादाता, पेशावर
जैसे ही आप किस्सा ख्वानी बाज़ार की तरफ से पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनख़्वाह प्रांत के पेशावर में कदम रखते हैं, आप संकरी गलियों में पहुंचते हैं जहां दोनों तरफ लकड़ी से बने पुराने घर हैं.
इन संकरी गलियों में नारंगी रंग का एक छोटा-सा घर है जहां नूर जहां अपने बच्चों के साथ रहती हैं. वो बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता शाहरुख़ ख़ान की चचेरी बहन हैं.
पाकिस्तान में इसी साल जुलाई में होने वाले आम चुनावों में नूरजहां भी उम्मीदवार के तौर पर उतरी हैं.
वो ख़ैबर पख्तूनख़्वाह की असेंबली सीट पीके77 से चुनाव लड़ रही हैं. उनके नामांकन पत्र स्वीकार कर लिए गए हैं जिसके बाद वो अब चुनाव प्रचार की तैयारी में जुट गई हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि वो चुनावों में जीत ज़रूर हासिल करेंगी.


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उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पता है कि उनके कज़न भाई शाहरुख़ पाकिस्तान में भी एक जाना-माना चेहरा हैं लेकिन वो उन्हें पाकिस्तान आकर चुनाव अभियान का हिस्सा बनने के लिए नहीं कहेंगी.
"मैं शाहरुख़ ख़ान को ऐसा करने के लिए कभी नहीं कहूंगी क्योंकि मैं हमेशा से चाहती हूं कि इलाके में शांति रहे और उन्हें न्योता देने के बाद कुछ मुश्किलें पेश आ सकती हैं. मैं अपने इलाक़े में रहने वाले लोगों की मदद से अपना चुनाव अभियान खुद ही चलाऊंगी."
नूरजहां कहती हैं कि वो देश की संसद में उन महिलाओं की आवाज़ पहुंचाएंगी जो घरेलू हिंसा की शिकार हैं और वो इस संबंध में क़ानून बनाने के लिए काम करेंगी.
उनका कहना है कि वो महिलाओं को पैतृक संपत्ति में हक ना देने वालों के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने का वो समर्थन करती हैं.

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नूरजहां कहती हैं कि जिस समाज में वो रहती हैं वहां पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए कम ही मौक़े मिलते हैं और इस भेदभाव के कारण ही उन्होंने वो चुनाव लड़ने का फ़ैसला लिया है.
"अगर मैं आज चुनाव नहीं लड़ूंगी तो कौन सामने आएगा? किसी ना किसी को तो कदम उठाना पड़ेगा."
शाहरुख़ ख़ान से कभी मुलाक़ात हुई है या नहीं पूछे जाने पर नूरजहां बताया कि वो 1997 में और 2011 में भारत आई थीं और इस दौरान उन्होंने शाहरुख़ से मुलाक़ात भी की थी.
वो बताती हैं कि शाहरुख़ ने उस वक्त पेशावर आने की अपनी इच्छा जताई थी.

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नूरजहां कहती हैं कि शाहरुख़ ख़ान के पिता और उनके पिता 1947 में भारत पाकिस्तान विभाजन से पहले पेशावर में रहते थे. विभाजन के बाद शाहरुख़ ख़ान के पिता ने भारत जाने का फ़ैसला किया जबकि उनके पिता पाकिस्तान में ही रहे.
शाहरुख़ के पिता मीर ताज मोहम्मद दिल्ली आ गए थे और चाचा ग़ुलाम मोहम्मद पाकिस्तान में ही रह गए थे.
ग़ुलाम मोहम्मद के दो बेटे (मंसूर ख़ान और मकसूद ख़ान) और एक बेटी (नूर) हैं.
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