इराक़ चुनाव में किस धड़े को मिलेगी जीत?

इराक़ में बीते साल इस्लामिक स्टेट की हार के बाद पहली बार संसदीय चुनाव हुए है.

इराक़ के 329 सदस्यीय सदन में दाखिल होने के लिए अलग अलग गठबंधनों के करीब सात हज़ार उम्मीदवार मैदान में हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी के गठबंधन को विरोधी धड़ों से थोड़ा आगे बताया जा रहा था लेकिन नतीजे किसके पक्ष में होंगे, ये अभी तय नहीं है.

मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. अधिकांश जगह शांति रही लेकिन स्थानीय मीडिया के मुताबिक किरकुक में हुए एक बम धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई. उत्तरी प्रांत किरकुक में हमला एक मतदान केंद्र के करीब हुआ.

इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने सभी इराकियों से चुनाव में हिस्सा लेने की अपील की थी.

वोट देने के बाद प्रधानमंत्री अबादी ने कहा, "चरमपंथ को हराने के बाद आज इराक़ शक्तिशाली और एकजुट है और ये सभी इराकियों की बड़ी उपलब्धि है."

शियाओं की अगुवाई वाली सरकार ने इस्लामिक स्टेट से संघर्ष के लिए तारीफें हासिल की हैं. पूरे देश में सुरक्षा की स्थिति में सुधार आया है.

हांलाकि बीबीसी के मार्टिन पेशन्स के मुताबिक भ्रष्टाचार और कमजोर अर्थव्यवस्था की वजह से इराक़ के तमाम लोग मोह भंग की स्थिति में हैं.

बदलाव नहीं दिखने को लेकर भी देश के लोगों में हताशा दिखती है. बगदाद के एक व्यक्ति ने साल 2014 के चुनाव में वोट डालने पर 'खेद' जाहिर किया. उनका कहना था, "सभी वादे झूठे निकले."

समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक राजधानी बगदाद के ज़्यादातर मतदान केंद्रों पर कम संख्या में मतदाता पहुंचे. जबकि सरकार ने मतदान के लिए कर्फ्यू में आंशिक ढील दी थी.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ चार साल तक चले संघर्ष के बाद इराक अब भी ख़ुद को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में जुटा है.

चुनाव में जीत हासिल करने वाले गठबंधन की चुनौती देश की एकजुटता बरकरार रखने की होगी.

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