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अमरीका की चीन को 100 अरब डॉलर और शुल्क लगाने की धमकी
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारियों को चीन के ख़िलाफ़ 100 अरब डॉलर का शुल्क और लगाने पर विचार करने का निर्देश दिया है.
इससे पहले भी अमरीका ने चीनी उत्पादों के आयात पर 50 अरब डॉलर का शुल्क लगाया था.
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है.
हाल के दिनों में दोनों देशों की ओर से बदले के लिए लिए गए व्यापारिक फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार को अस्थिर कर दिया है.
अमरीका ने ये फैसला चीन के उस क़दम के जवाब में लिया है जिसमें उसने 106 महत्वपूर्ण अमरीकी उत्पादों पर शुल्क लगाया था.
'हम व्यापार युद्ध से नहीं डरते'
ट्रंप की इस घोषणा पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "चीन और अमरीका विश्व के दो शक्तिशाली देश हैं और एक-दूसरे के साथ बराबरी और सम्मान के साथ बर्ताव करना चाहिए."
वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता गाओ फैंग ने कहा,"हम लड़ना नहीं चाहते लेकिन हम व्यापार युद्ध से डरते नहीं हैं."
उन्होंने कहा कि अगर अमरीका चीन और अंतरराष्ट्रीय विरोध को नज़रअंदाज़ करता है और अपने एकतरफ़ा और संरक्षणवादी क़दम पर कायम रहा तो चीन भी इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार है.
चीन भी अपने नागरिकों के हितों के रक्षा के लिए उचित जवाब देगा.
जानकारों ने चेतावनी दी है कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और बाज़ार पर व्यापार युद्ध का खतरा मंडरा रहा है और वे मानते हैं कि दोनों देशों के बीच पीछे के दरवाज़े से करवाए जा रहे समझौते भी काफ़ी मुश्किल हैं.
इसका क्या प्रभाव हो सकता है?
राजनीतिक तौर पर ट्रंप के फैसले को उनकी ही पार्टी के कुछ सदस्यों की ओर से सहयोग नहीं मिला है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि शुल्क की वजह से अमरीका पर प्रभाव पड़ेगा और नौकरियां जाएंगी. उनका कहना है कि इससे अमरीका के दूसरे व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है.
अमरीका की बड़ी खुदरा व्यापार कंपनी वॉलमार्ट और टारगेट ने भी ट्रंप से कहा है कि वो एक बार इस फैसले पर फिर से सोचें जो कीमतों और अमरीकी परिवारों पर असर डाल सकता है.
गुरूवार को रिपब्लिक पार्टी के सांसद बेन सेसे ने ट्रंप के फ़ैसले को 'बेवकूफ़ाना' बताया.
उन्होंने कहा,"बेशक चीन की गलत बात का विरोध करना चाहिए लेकिन ऐसे फैसले से जिससे चीन को सज़ा मिले ना कि हमें."
अमरीका के खेती प्रधान इलाकों पर भी ट्रंप के फैसले से असर पड़ सकता है. ख़ासकर सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को इससे नुकसान हो सकता है, सिर्फ अमरीका में ही नहीं, विश्व में भी.
चीन खुद सोयाबीन का उत्पादक है और अमरीका का निर्यात किये जाने वाले सोयाबीन का 60 फीसदी खरीदता भी है.
चीन में सोयाबीन की मांग की वजह से अमरीका में सोयाबीन की कीमत काफ़ी वक्त से सीमित रही.
लेकिन अमरीका के सोयाबीन पर चीन में शुल्क लगाए जाने के बाद चीन में इसकी बिक्री घटेगी जिससे अमरीकी किसानों को नुकसान होगा.
भारत भी सोयाबीन का बड़ा उत्पादक रहा है और जानकारों का मानना है कि अमरीका और चीन के इस संभावित व्यापार युद्ध में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए मौका छिपा है.
कब तक ऐसा चलता रहेगा?
चीन ने विश्व व्यापार संगठन ने अमरीका के लगाए शुल्क के खिलाफ़ शिकायत की है. जानकारों का मानना है कि ये संकेत है कि ये प्रक्रिया लंबी चलेगी.
विश्व व्यापार संगठन ने गुरूवार को सदस्यों से राय मांगी है और चर्चा के बाद शिकायत को अधिकारिक तौर पर विवाद सुलझाने की प्रक्रिया की ओर ले जाया जाएगा.
फिलहाल, अमरीका के कानून के मुताबिक 1300 चीनी उत्पादों पर शुल्क लगाए जाने का प्रस्ताव समीक्षा के लिए रखा जाना है जिसके तहत इसे टिप्पणियों और सुनवाई के लिए सार्वजनिक किया जाएगा और फिर अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा.
इस पर सुनवाई की तारीख 15 मई तय की गई है.
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