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चीन को कैसे महंगा पड़ेगा अमरीका से झगड़ा?
- Author, सिसिलिया बैरिया
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड
जैसा कि हर जंग में होता है, दोनों तरफ़ के लोग घायल होते हैं.
अगर अमरीका और चीन के बीच व्यापार युद्ध (ट्रेड वार) का दायरा इसी तरह बढ़ता गया तो मुमकिन है कि ड्रैगन कहे जाने वाले इस देश को बड़ा नुक़सान उठाना पड़ सकता है.
चीन की आर्थिक तरक्क़ी का एक बड़ा पहलू अमरीका को उसके निर्यात से होने वाली कमाई है. ये ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) चीन के पक्ष में है. यानी चीन अमरीका से जितना सामान ख़रीदता है उससे कहीं अधिक सामान वो अमरीका को बेचता है.
ये रकम तीन लाख 47 हज़ार अमरीकी डॉलर के क़रीब है और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अगर संरक्षणवादी कदम उठाती रहीं तो इसका सीधा असर चीन पर पड़ेगा.
इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस व्यापार युद्ध में अमरीका के बनिस्बत चीन के पास खोने के लिए ज़्यादा है.
हांगकांग में बीबीसी संवाददाता स्टीफ़न मैकडोनेल का कहना है कि इस लड़ाई में चीन का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है और इसी कारण वो अमरीका के साथ व्यापार युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोजेगा.
विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक रॉबर्टो एज़ेवेडो कहते हैं, चीन और अमरीका की इस क्रिया-प्रतिक्रिया के फलस्वरूप वैश्विक आर्थिक मंदी की स्थिति भी सामने आ सकती है.
सोमवार को चीन ने पोर्क और वाइन जैसे 128 से ज़्यादा अमरीकी उत्पादों के आयात पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की. अब इन उत्पादों पर 15 से 25 फ़ीसदी शुल्क देना होगा. बीजिंग से जारी एक बयान में कहा गया कि यह क़दम चीन ने अमरीका के बढ़ाए गए आयात शुल्क से हुए नुक़सान को देखते हुए लिया है. वहीं अमरीका ने इस वैश्विक बाज़ार को बिगाड़ने वाला क़दम बताया.
ट्रेड वार की आशंका के चलते वॉल स्ट्रीट भी अछूता नहीं रहा और डाउ जोन्स इंडेक्स 2.7 फ़ीसदी नीचे आ गया.
चीन का कहना है कि ये नए आयात शुल्क अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा एल्यूमीनियम और स्टील के आयात पर बढ़ाए गए शुल्क की जवाबी कार्रवाई है. 22 मार्च को अमरीका ने कहा था कि वो चीन पर 60 करोड़ डॉलर का आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहा है. बौद्धिक संपदा चोरी करने का आरोप लगाते हुए अमरीका ने देश मे चीन के निवेश को भी सीमित करने की बात कही थी.
तो क्या चीन को होगा ज़्यादा नुक़सान?
वॉशिंगटन स्थित सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश व्यापार की राष्ट्रीय परिषद के सलाहकार विलियम एलन रिंस के अनुसार, आने वाले समय में चीन बातचीत से समझौता करने की कोशिश करेगा. इसके पीछे वजह ये है कि व्यवसायिक युद्ध में चीन के नुकसान की आशंका अधिक है.
दरअसल, अमरीका से जितना सामान चीन खरीदता है, उससे कहीं ज़्यादा चीज़ें वो उसे बेचता है.
एलन ने बीबीसी मुंडो से बातचीत में कहा कि 'चीन पहले भी अमरीका के साथ व्यापारिक समझौते कर चुका है और वो इसे एकबार फिर दोहराते हुए खुश ही होगा.'
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया में इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस के प्रोफ़ेसर और बीबीसी वर्ल्ड के बैरी ईचेनग्रीन का कहना है कि चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर निर्भर है और इससे वैश्विक व्यापार प्रणाली की स्थिरता को लेकर भी आशंका बढ़ जाती है.
वो आगे कहते हैं कि इस आमने-सामने के ट्रेड वार में अमरीका से ज़्यादा नुकसान चीन को होगा, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बंद हो जाएगा.
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो ईचेनग्रीन कहते हैं कि ये चीन के हित में होगा कि यह मामला और तूल न पकड़े. ताकि दूसरे देश उस पर व्यापारिक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में भरोसा कर सकें और उसकी प्रतिष्ठा बढ़े.
ज़्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन, अमरीकी बाज़ार पर निर्भर है. डेनटॉन्स लॉ फ़र्म के सलाहकार राज भाला का कहना है कि चीन, अमरीकी बाज़ार पर निर्भर है और तब तक तो है ही जब तक वो कोई दूसरा वैकल्पिक बाज़ार नहीं खोज लेता.
वो आगे कहते हैं कि नकारात्मक आर्थिक परिणाम का मतलब है, चीन की कंम्यूनिस्ट पार्टी के लिए भी नकारात्मक राजनीतिक परिणाम.
बौद्धिक संपदा की चोरी
व्हाइट हाउस इस सप्ताह उन चीनी उत्पादों की सूची जारी कर देगा जो नए आयात शुल्क के तहत आएंगे. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के अनुसार, उत्पाद शुल्क बढ़ाना, चीन के बौद्धिक संपदा चोरी करने के बदले की गई प्रतिक्रिया है.
इस लिस्ट में मुख्य तौर पर हाई-टेक उत्पादों को शामिल किए जाने की उम्मीद है.
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