मालदीव पर कब-कब छाया संकट

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मालदीव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन अब्दुल ग़यूम ने 15 दिनों के आपातकाल की घोषणा कर दी है. आपातकाल घोषित किए जाने के बाद पुलिस ने देश के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद को गिरफ़्तार कर लिया है.
शुक्रवार को मालदीव की सर्वोच्च अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद पर चल रहे मुकदमे को असंवैधानिक करार दिया था और कैद किए गए विपक्ष के 9 सांसदों को रिहा करने का आदेश भी जारी किया था.
इसके बाद से ही देश में राजनीतिक गतिरोध का माहौल बना हुआ है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मालदीव में विपक्षी दल बहुमत प्राप्त करता दिख रहा था.
मालदीव की सरकार ने शनिवार को अदालत के फैसले को मानने से इंकार करते हुए संसद अनिश्चितकाल स्थगित कर दी थी.
इसके बाद भारतीय समय के मुताबिक सोमवार शाम को 15 दिनों के आपातलकाल की घोषणा कर दी गई.
मालदीव पहले भी राजनीतिक संकट के दौर से गुजरा चुका है.
यहां लोकतांत्रित अधिकारों को लेकर संघर्ष और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले को लेकर विरोध होता रहा है और पहले भी आपातकाल लागू किया गया है.
मालदीव में पूर्व राष्ट्रपति ममून अब्दुल गयूम के 30 साल के शासन के दौरान देश में ज्यादा लोकतांत्रित अधिकारों के लेकर मांगें उठती रहीं.

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आपातकाल और सुनामी का संकट
- गयूम के 1978 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद मालदीव के पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित होने से आर्थिक वृद्धि हुई.
- वर्ष 1982 में मालदीव कॉमनवेल्थ देशों में शामिल हुआ.
- गयूम को लगातार छह बार राष्ट्रपति के पद पर चुना गया लेकिन इस दौरान देश में राजनीतिक कैदियों को छोड़ने, लोकतांत्रिक सुधारों और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले उठने लगे.
- 1990 की शुरुआत में अब्दुल गयूम ने राष्ट्रपति के कुछ अधिकारों को सीमित किया, नए सुधार किए और एक एंटी-करप्शन बोर्ड का निर्माण किया.
- इसी साल नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव हुए और 40 सीटों पर 120 से ज्यादा उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. फिर भी देश में अशांति बनी रही.

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सरकार विरोधी दंगे
- जनवरी 2000 में अमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा था कि 1999 में संसदीय चुनावों में तीन उम्मीदवारों को अशांति फैलाने के संदेह में हिरासत में ले लिया गया था. साल 2002 में चार लोगों को लंबे समय के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी.
- इसके बाद माले में साल 2003 में चार कैदियों की हत्या की खबर से अचानक सरकार विरोधी दंगे भड़क उठे.
- एक बार फिर से राष्ट्रपति चुने जाने के बावजूद भी गयूम को लेकर विरोध कम नहीं हुआ. विरोध के हिंसक होने के बाद वर्ष 2004 में मालदीव में आपातकाल की घोषणा की गई थी. उस दौरान करीब 100 लोगों को जेल में डाला गया था.
- इसी उथल-पुथल के दौरान देश पर सुनामी का संकट भी आ गया. हिंद महासागर में आए भूकंप के कारण आई इस सुनामी में कई लोग मारे गए और कई द्वीपों को भारी नुकसान पहुंचा था.
- सरकार का कहना था इस आपदा के चलते देश 20 साल पीछे चला गया है.

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नशीद ने दिया इस्तीफा
- इसके बाद साल 2005 में बहुदलीय राजनीति को मंजूरी देने के लिए ससंद ने सर्वसम्मित से वोट दिया. राष्ट्रपति गयूम ने विपक्षी नेता जेनिफ़र लतीफ से माफी मांगी. उन्हें आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में 10 साल की सजा दी गई थी. लेकिन, जेनिफ़र ने माफी से इनकार कर दिया.
- गयूम के कार्यकाल में उनकी हत्या की कोशिशें भी की गई थीं.
- इसके बाद साल 2008 में हुए चुनावों में विपक्षी पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता मोहम्मद नशीद अब्दुल गयूम को हराकर मालदीव के राष्ट्रपति चुने गए. ये सरकार कई दलों के गठबंधन से बनी थी. मोहम्मद नशीद लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मालदीव के पहले राष्ट्रपति थे.
- नशीद के कार्यकाल में मीडिया को अधिक स्वतंत्रता दी गई. लेकिन, एक साल बाद गठबंधन में मौजूद अन्य दलों के नेता सरकार से इस्तीफा देने लगे. उन्होंने संविधान और पारदर्शिता को लेकर सम्मान न होने का आरोप लगाया.
- साथ ही नशीद पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने रिजॉर्ट्स को शराब और पॉर्क के उत्पाद पर प्रतिबंध से छूट दी है जो कि अन्य मुस्लिम देशों में प्रतिबंधित है.

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प्रतिबंध से छूट
- इसके बाद विपक्षी दल और सरकार के बीच भी संघर्ष चलता रहा. साल 2012 में विरोध तब और बढ़ गया जब सरकार के एक आलोचक को छोड़ने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायाधीश को गिरफ्तार कर लिया गया.
- इसके बाद फिर से मालदीव में राजनीतिक संकट गहराया और फरवरी 2012 में नशीद को पद छोड़ना पड़ा. नशीद पर मुख्य न्यायाधीश को अवैध रूप से जेल भेजने का आरोप लगाया गया.
- उनके बाद करीब डेढ़ साल के लिए मोहम्मद वहीद हसन मालदीव के राष्ट्रपति बने.
- देश में फिर राष्ट्रपति चुनाव हुए और साल 2013 में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम के सौतेले भाई अब्दुल्ला यमीन मालदीव के राष्ट्रपति बने. यमीन प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव के नेता हैं.
- पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को आतंकवाद के आरोप में 13 साल की सजा सुना दी गई. उनके पार्टी ने इसी सजा के पीछे राजीतिक कारण बताए. अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी इसकी निंदा हुई थी.

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विरोध के चलते आपातकाल
- नशीद के समर्थन में देश में रैलियां निकाली गईं और नवंबर 2015 में फिर से देश में 30 दिन के आपातकाल की घोषणा की गई. उपराष्ट्रपति अहमद अदीब पर संसद में अभियोग चलाया गया.
- हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव में कुछ दिन बात आपातकाल को वापस ले लिया गया.
- साल 2016 में जेल में बंद मोहम्मद नशीद 30 दिन के लिए एक सर्जरी के सिलसिले में ब्रिटेन गए थे. बाद में नशीद को ब्रिटेन में रिफ्यूजी स्टेटस दे दिया गया. वापस न लौटने पर मालदीव में नशीद के खिलाफ अरेस्ट वॉरेंट भी जारी किया गया.
- वर्तमान में मोहम्मद नशीद और विपक्ष के सांसदों को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर से देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है.
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