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उर्दू प्रेस रिव्यू: ‘शरीफ़ के मोर को बिल्ली मार देती तो ऐक्शन हो जाता’
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते ज़ैनब के बलात्कार और फिर उसकी हत्या से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.
इसके अलावा अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में आई कड़वाहट, भारतीय सेनाध्यक्ष का बयान और भारतीय सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से जुड़ी ख़बरें भी छाई रहीं.
सबसे पहले बात ज़ैनब की.
पंजाब प्रांत के क़सूर ज़िले में मंगलवार के दिन लापता होने वाली आठ साल की ज़ैनब की लाश उनके घर से दो किलोमीटर दूर कूड़े के ढेर में मिली थी.
पुलिस के अनुसार बच्ची का रेप करने के बाद क़त्ल किया गया था. इस ख़बर के आते ही पूरे ज़िले में हिंसक प्रदर्शन होने लगे.
पाकिस्तानी अख़बारों में भी ये ख़बर छा गई. अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ ज़ैनब को ले जाने वाले व्यक्ति का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि मुलज़िम ज़ैनब के घर के बाहर टहल रहा है.
वहीं इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता एतज़ाज़ अहसन ने क़सूर में ज़ैनब के परिवार वालों से मुलाक़ात करने के बाद पंजाब सरकार पर हमला किया है.
अख़बार जंग के अनुसार, एतज़ाज़ अहसन ने कहा कि सही मुलज़िम गिरफ़्तार होना चाहिए और कोई ग़लत व्यक्ति फ़र्ज़ी मुठभेड़ में न मार दिया जाए.
उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ पर तंज़ करते हुए कहा, ''क़सूर में बच्चों की सीरियल किलिंग हो रही है. पुलिस की लापरवाही साफ़ दिख रही है. ज़ैनब तो हमसे बिछड़ गई लेकिन क़सूर की जनता ने एक बड़ी बीमारी की पहचान कर ली है. शहबाज़ शरीफ़ के मोर को बिल्ली ने मार दिया होता तो अब तक ऐक्शन हो जाता.''
न्यूज़ कवरेज के अलावा कई अख़बारों ने इस पर संपादकीय भी लिखा है और लोगों के कॉलम भी छप रहे हैं.
अख़बार जंग में इफ़्तिख़ार अहमद ने एक कॉलम लिखा है जिसका शीर्षक है, "ज़ैनब का क़ातिल हाकिम-ए-वक़्त.''
वो कहते हैं कि ज़ैनब से पहले भी ज़िले में ऐसी कई वारदातें हो चुकी हैं लेकिन पुलिस और सरकार कोई भी प्रभावी क़दम उठाने में नाकाम रही है.
वो लिखते हैं, "जिस मक़तूल का क़ातिल नामालूम हो, उसके क़त्ल की ज़िम्मेदारी सरकार पर होती है.''
रावत भी अख़बारों में छाए
पाकिस्तान ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान की जमकर आलोचना की है और उनके बयान पर पलटवार किया है.
भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा था कि अगर सरकार कहे तो भारतीय सेना पाकिस्तान के परमाणु झांसों को धता बताने और किसी भी अभियान के लिए सीमा पार करने को तैयार है.
एक संवाददाता सम्मेलन में एक पत्रकार ने उनसे पूछा था कि भारत-पाक सीमा पर हालात बिगड़ने की स्थिति में अगर पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करता है तो भारत का जवाब क्या होगा.
इसी सवाल के जवाब में जनरल रावत ने ये बयान दिया था. जनरल रावत के इस बयान पर पाकिस्तान ने सख़्त जवाबी हमला किया है.
अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने बयान जारी कर कहा, ''भारतीय सेना प्रमुख का बयान बेहद ग़ैर ज़िम्मेदाराना है जो उनके पद के अनुरूप नहीं है. ये परमाणु टकराव को निमंत्रण देने वाली बात है. अगर वे (भारत) ऐसा ही चाहते हैं तो हम भी इसके लिए तैयार हैं. जल्द ही सेना प्रमुख की ग़लतफ़हमी दूर हो जाएगी.''
सुप्रीम कोर्ट के जज भी
भारतीय सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की मीडिया से बातचीत को भी सभी अख़बारों ने प्रमुखता से छापा है.
अख़बार जंग ने पहले पन्ने पर इस ख़बर को जगह देते हुए लिखा है, "लोकतंत्र ख़तरे में, भारतीय सुप्रीम कोर्ट के चार जजों का चीफ़ जस्टिस पर इलज़ाम.'' अख़बार लिखता है कि चार जजों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र के ख़िलाफ़ महाज़ खोल दिया है और उनके ख़िलाफ़ बग़ावत छेड़ दी है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के ताज़ा बयान और पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य मदद पर फ़िलहाल पाबंदी लगाने के अमरीकी फ़ैसले ने दोनों देशों के बीच नई खटास पैदा कर दी है.
पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के मुताबिक़ अमरीकी सेंट्रल कमान के प्रमुख जनरल जोसेफ़ ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से टेलिफ़ोन पर बातचीत की है और उन्हें विश्वास दिलाया है कि अमरीका पाकिस्तान में किसी एकतरफ़ा कार्रवाई पर विचार नहीं कर रहा है, अमरीका सिर्फ़ इतना चाहता है कि पाकिस्तान उन अफ़ग़ानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे जो अफ़ग़ानिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.
अख़बार लिखता है कि इसके जवाब में जनरल बाजवा का कहना था, ''पाकिस्तान कभी भी अमरीका से मिलने वाली आर्थिक मदद की बहाली के लिए उसको नहीं कहेगा. पाकिस्तानी समझते हैं कि उनके साथ धोखा हुआ है.''
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