यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह की 'हत्या'

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यमन से ये ख़बरें आ रही हैं कि पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह की मौत हो गई है.

शुरूआती ख़बरों के मुताबिक उनकी मौत हूथी के साथ लड़ाई के दौरान हुई है. गौरतलब है कि यमन के गृहयुद्ध में एक ज़माने में सालेह और हूथी विद्रोही एक ही तरफ़ थे.

हूथी विद्रोहियों के नियंत्रण वाले मीडिया ने कहा है कि विश्वासघाती मिलिशिया के नेता की मौत से संकट का अंत हो गया है.

ऑनलाइन आ रही तस्वीरों और वीडियो में पूर्व राष्ट्रपति जैसे ही किसी व्यक्ति के सिर में गंभीर चोट दिख रही है.

पिछले हफ़्ते तक ही पूर्व राष्ट्रपति और हूथी विद्रोही एक ही तरफ़ से लड़ रहे थे. तब उनके निशाने पर यमन के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दाराबूह मंसूर हादी थे.

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इमेज कैप्शन, अली अब्दुल्ला सालेह जोर्डन की राजधानी अम्मान में अरब सम्मेलन में शिरकत करते हुए, तस्वीर 11 नवंबर, 1987 की है

सालेह की पेशकश

लेकिन राजधानी सना की मुख्य मस्जिद के नियंत्रण को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों में खाई बढ़ गई थी.

मस्जिद के लिए हुई झड़पों में 125 से अधिक जानें गईं और 238 लोग घायल हुए.

शनिवार को सालेह ने सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन से नाकेबंदी हटाने की एवज में नई शुरूआत करने की पेशकश की थी.

गठबंधन और मौजूदा राष्ट्रपति ने उनके बयान का स्वागत किया था. लेकिन हूथी विद्रोहियों ने इसे ख़ारिज करते हुए 'तख़्तापलट' संज्ञा दी.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक मार्च 2015 में शुरू हुए यमन के गृहयुद्ध में अब तक 8,670 लोग मारे गए हैं और 49,670 घायल हुए हैं.

इस संघर्ष और इसकी वजह से जारी सऊदी अरब की नाकेबंदी की वजह से करीब 27 लाख लोग खाने-पीने की कमी से जूझ रहे हैं.

अकेले कोलेरा की बीमारी से बीते अप्रेल से अब तक 2,211 लोगों की मरने की ख़बर है.

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