सऊदी अरब में बदल रही है महिलाओं की ज़िंदगी

सऊदी महिलाएं

सऊदी अरब के समाज में महिलाओं की ज़िंदगी पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं. हाल ही में सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाज़त मिलने के बाद पूरी दुनिया में इस कदम की सराहना की गई थी.

महिलाओं ने विशेष रूप से इसे एक ऐसा कदम बताया था जिसे कई साल पहले उठाया जाना था.

सऊदी अरब की कुछ महिलाओं ने बीबीसी से इस मुद्दे पर बात की और अपने समाज में महिलाओं की बदलती ज़िंदगी पर खुलकर बात की है.

अब महिलाएं रख रही हैं अपनी बात

सऊदी महिलाएं

सोशल मीडिया के क्षेत्र में कार्यरत 25 साल की बायन बताती हैं, "सऊदी अरब और सऊदी महिलाओं के बारे में एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि हम पुरुषों के हिसाब से चलते हैं लेकिन ये सच नहीं है. मैं आहार, फैशन, लाइफस्टाइल और ब्यूटी जैसे मुद्दों पर बात करती हूं."

बायन ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, "सोशल मीडिया पर लोगों को संदेश देने वाले के लिए ये बेहद अहम है कि सही संदेश दिया जाए. सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक प्रभावशाली हथियार की तरह होते हैं. महिला के रूप में हम नेटवर्किंग कर रहे हैं. अपने विचार साझा कर रहे हैं. हम अपनी बात भी रख रहे हैं. हम काफ़ी शिक्षित और किसी भी मुद्दे को लेकर खुले विचार रखते हैं. लेकिन ये सही है कि हम अपनी हदों में ये करते हैं."

सऊदी अरब में धीरे-धीरे हो रहा है बदलाव

सारा

वहीं 24 वर्षीय सारा सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति में आ रहे बदलाव के बारे में कहती हैं, "सऊदी अरब में बदलाव की गति को अक्सर समझा नहीं जाता है. मेरी दादी ने मेरी मां के अंदाज में अपनी ज़िंदगी नहीं जी. मैंने भी निश्चित रूप से अपनी मां जैसी ज़िंदगी नहीं जी है."

सारा कहती हैं, "हम जिस तरह कई सालों और कई पीढ़ियों में विकास की ओर बढ़े हैं वो पूरी दुनिया में हुए विकास की गति से काफ़ी अलग है. हमारे लिए हमारा धर्म और हमारी संस्कृति बहुत अहम है. हम अब अपनी आवाज़, अपनी उम्मीदें तलाश रहे हैं कि हम किस तरह विकास करें."

कभी समान समाज हुआ करता था सऊदी अरब

सऊदी महिलाएं

सारा कहती हैं, "कभी सऊदी अरब एक समान समाज हुआ करता था. मुझे लगता है कि चुनौती यह है कि आप वो संतुलन तलाश करेंजिसमें आप जो करना चाहें वो करें, और दूसरों के भी तरीकों का सम्मान करें."

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