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क्या क्राउन प्रिंस सलमान सऊदी अरब के सबसे ताक़तवर शख़्स हो गए हैं?
साल 2015 में किंग सलमान के सऊदी अरब के बादशाह बनने से पहले शायद ही किसी ने उनके बेटे शहज़ादा मोहम्मद सलमान का नाम सुना होगा. लेकिन उसके बाद अब 32 साल का ये शहज़ादा सऊदी हुकूमत के सबसे ताकतवर शख्सियत के तौर पर देखा जाने लगा है.
जानकारों का मानना है कि वह दिन बहुत दूर नहीं है जब उन्हें सऊदी अरब का सुल्तान बना दिया जाएगा. किंग सलमान कमज़ोर और बीमार हैं, वो कभी भी ताज छोड़ सकते हैं. वो कभी भी क्राउन प्रिंस सलमान को किंग बनाने की घोषणा कर सकते हैं. अगर देखा जाए तो अभी भी क्राउन प्रिंस ही वास्तव में मुल्क चला रहे हैं.
सबसे कम उम्र के रक्षा मंत्री
मुहम्मद बिन सलमान का जन्म 31 अगस्त 1985 को हुआ था और वह किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल-सऊद की तीसरी पत्नी फहदा बिन फलाह के सबसे बड़े बेटे हैं. रियाद स्थित किंग सऊद यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद प्रिंस मोहम्मद सलमान ने कई सरकारी महकमों में काम किया.
उनकी एक बीवी है जिनसे उनकी दो बेटियां और दो बेटे हैं. किंग सलमान ने 2015 में सत्ता संभालते ही दो अहम बदलाव किए थे और अपने बेटे को सत्ता के और करीब कर दिया था. उस वक्त शहज़ादा सलमान केवल 29 वर्ष की आयु में दुनिया के सबसे कम उम्र के रक्षा मंत्री बन गए.
यमन के साथ लड़ाई
रक्षा मंत्रालय का पदभार संभालते ही उन्होंने मार्च 2015 में यमन के साथ युद्ध की घोषणा कर दी. हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना सहित यमन के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया और यमन के राष्ट्रपति अब्दुर रहमान मंसूर को देश से भागने के लिए मजबूर कर दिया था और सऊदी अरब में उन्होंने आश्रय ले लिया.
सऊदी सैन्य गठबंधन ने इसी के बाद हूती विद्रोहियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. हालांकि, सऊदी अरब और उसके सहयोगियों पर ये इलज़ाम लगते रहे हैं कि वे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करते रहे हैं. और उन्होंने अरब दुनिया के सबसे गरीब देश यमन पर हमला बोलकर एक मानवीय संकट पैदा कर दिया है.
ये एक अलग बात है कि ढाई साल के बाद भी युद्ध का कोई परिणाम नहीं निकला है.
सबसे बड़ा हथियार सौदा
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के मई 2017 में सऊदी अरब के पहले सरकारी दौरे से एक महीने पहले प्रिंस मोहम्मद सलमान वॉशिंगटन गए थे और राष्ट्रपति समेत अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों से मिले थे.
अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने एक और ऐतिहासिक कार्य किया- और वह था दुनिया का सबसे बड़ा हथियारों का सौदा. उन्होंने 110 अरब डॉलर के टैंक, आर्टिलरी, रडार सिस्टम, बख़्तरबंद गाड़ियां, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और छोटे मिसाइलों की बिक्री के करार की घोषणा की.
तेल की अर्थव्यवस्था
अप्रैल 2016 में प्रिंस सलमान ने बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास और सामाजिक सुधार शुरू किए जिसका मुख्य उद्देश्य था सऊदी अरब की तेल पर निर्भरता को कम करना. मोहम्मद बिन सलमान ने विजन 2030 नाम से देश में एक नई परियोजना शुरू की जिसके तहत 2020 तक सऊदी अरब की तेल पर निर्भरता खत्म हो जाएगी.
उन्होंने इसके लिए रेगिस्तान में आधे खरब डॉलर का एक बड़ा शहर बसाने की योजना बनाई है. कहा जा रहा है कि इस शहर में औरतों और मर्दों को एक दूसरे से मिलने-जुलने की आज़ादी होगी. इससे पहले इस रूढ़िवादी समाज में ऐसी बातें कभी नहीं सुनी गई थीं.
इससे ये साफ जाहिर होता है कि प्रिंस मोहम्मद सलमान अपने विज़न को लेकर बहुत स्पष्ट हैं और जो कोई उनकी राह में बाधा बनेगा, उसे रास्ते से हटा दिया जाएगा.
सऊदी शहज़ादों की हिरासत
4 अक्तूबर को सऊदी अरब में लंबे नुकीले चाकुओं की रात कहा जाने लगा है. इस रात को क्राउन प्रिंस के आदेश पर बड़ी संख्या में सऊदी शासकों, मंत्रियों को हिरासत में लेकर बंद कर दिया गया.
सऊदी अरब के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. ये सभी बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति थे और उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा गया था और ये उनका अपमान था. लेकिन सऊदी प्रिंस ने ये भी सुनिश्चित किया कि कोई फरार न हो सके.
अमरीका और रूस के साथ संबंध
मोहम्मद सलमान को क्राउन प्रिंस बनाए जाने से पहले उनके चचेरे भाई मोहम्मद बिन नायफ़ क्राउन प्रिंस थे. मुहम्मद बिन नाएफ़ सीआईए के साथ सऊदी संबंधों को भी देखते थे.
जब किंग सलमान के आदेश पर मुहम्मद नाएफ़ की जगह पर प्रिंस सलमान को क्राउन प्रिंस बनाया गया तो अमरीका को समझ में आ गया कि सऊदी अरब में हकीकत में कौन शक्तिशाली है. उसके बाद क्राउऩ प्रिंस सलमान अमरीका और सऊदी अरब के बीच मुख्य कड़ी बन गए.
लेकिन अमरीका ही नहीं क्राउन प्रिंस मोहम्मद सलमान ने सीरिया और ईरान के मुद्दे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी कई मुलाकातें कीं.
इसराइल के लिए एक अच्छी खबर
इसराइली अख़बार हेरट्ज़ के अनुसार, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ईरान विरोधी नीति की वजह से इसरायल और अमरीका के लिए एक अच्छी खबर के तौर पर देखे गए. पिछले महीने क्राउन प्रिंस सलमान ने ईरान के साथ बातचीत की संभावना को खारिज कर दिया था. दोनों देश सीरिया और यमन में विपक्षी समूहों का समर्थन कर रहे हैं.
रियाद और तेहरान में संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए जब सऊदी सरकार ने प्रमुख शिया धर्म गुरु अल-नमर की सज़ा-ए-मौत पर अमल कर दिया. ईरान के सरकारी मीडिया ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद सलमान के बढ़ते प्रभाव को करीब-करीब तख्तापलट करार दिया है.
कई लड़ाई एक साथ
क्राउन प्रिंस सलमान एक ही समय में कई लड़ाइयां लड़ रहे हैं. कुछ साल पहले उन्होंने सऊदी बलों को यमन पर हमला करने का आदेश दिया था. यह युद्ध अभी भी जारी है और उन्होंने लाखों डॉलर खर्च किए हैं. वे अपने पड़ोसी मुल्क क़तर का भी बहिष्कार कर रहे हैं.
इस आर्थिक बहिष्कार में मिस्र, जॉर्डन, यमन और संयुक्त अरब अमीरात भी सऊदी अरब का साथ दे रहे हैं. वे ईरान के साथ वाकयुद्ध में भी शामिल हैं और ईरान पर आरोप लगाते हैं कि वह मध्य पूर्व में अस्थिरता और असुरक्षा फैल रहा है. पिछले हफ्ते, लेबनान के प्रधानमंत्री साद हरीरी ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में इस्तीफा दे दिया था.
उन्होंने हिजबुल्लाह के हिमायती ईरान पर आरोप लगाया था कि वो सभी फसाद की जड़ है. सऊदी अरब पहले ही सीरिया में बशर-उल-असद के शासन के खात्मे का समर्थन करता है. दूसरी तरफ उसकी इस्लामिक स्टेट के साथ लड़ाई है.
महिलाओं की ड्राइविंग के समर्थन में
क्राउन प्रिंस सलमान सऊदी अरब के उन गिने-चुने लोगों में से एक हैं जो मुल्क में धार्मिक विद्वानों से टक्कर ले सकते थे और उनसे कह सकते थे कि बस अब बहुत हो गया, अब सऊदी अरब में महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति मिल जानी चाहिए.
सऊदी अरब दुनिया का अंतिम देश था जहां महिलाओं को ड्राइविंग करने की अनुमति नहीं थी, अब ये प्रतिबंध जून में खत्म हो जाएगा और सऊदी महिलाओं का सपना पूरा हो जाएगा. अभी तक धार्मिक विद्वानों ने जून में क्या होता है, ये देखने का निर्णय लिया है.
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