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अपने रास्ते की रुकावटें हटा रहे हैं सऊदी क्राउन प्रिंस?
सऊदी अरब में एक नई भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने 11 राजकुमारों समेत 4 मंत्रियों और दर्जनों पूर्व मंत्रियों को हिरासत में ले लिया है.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शाही फ़रमान के आधार पर देश के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में एक नई भ्रष्टाचार निरोधक समिति बनाई गई है. इस समिति के बनने के घंटों बाद ही इन नेताओं को हिरासत में लिया गया है.
हिरासत में लिए गए लोगों में अरबपति राजकुमार अलवलीद बिन तलल भी शामिल हैं जिन्होंने ट्विटर और एप्पल जैसी कंपनियों में निवेश किया है. मोहम्मद बिन सलमान ने नेशनल गार्ड्स और नेवी के प्रमुखों को भी बर्ख़ास्त कर दिया है.
लुढ़क गया शेयर बाज़ार
समिति बनाने का आदेश देने वाले इस शाही फ़रमान में कहा गया है, "अगर भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ कर न फेंका गया और भ्रष्टाचार करने वालों को सज़ा न दी गई तो इस देश का अस्तित्व नहीं रहेगा."
सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार इस नई भ्रष्टाचार निरोधक समिति के पास किसी के नाम पर वॉरंट जारी करने और यात्रा पर रोक लगाने का अधिकार है. फ़िलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हिरासत में लिए गए लोगों पर क्या आरोप हैं.
लेकिन सऊदी ब्रॉडकास्टर अल-अरेबिया ने कहा है कि 2009 में जेद्दा में आई बाढ़ और 2012 में मर्स वायरस का संक्रमण फैलने के मामलों की जांच नए सिरे से शुरू की गई है. अब तक हिरासत में लिए गए लोगों में अलवलीद बिन तलल के अलावा किसी और नाम की पुष्टि नहीं हो पाई है.
कौन हैं राजकुमार अलवलीद बिन तलल?
अलवलीद बिन तलल की गिरफ्तारी के बाद सऊदी स्टॉक मार्केट में उनकी कंपनी किंगडम होल्डिंग के शेयर 9.9 फ़ीसदी तक नीचे लुढ़क गए. ये कंपनी देश के सबसे महत्वपूर्ण निवेशकों में से एक है.
ट्विटर और एप्पल के सिवा इस कंपनी ने रूपर्ट मरडॉक की समाचार कंपनी, सिटीबैंक ग्रुप, फ़ोर सिज़न्स होटल और कार सेवा कंपनी 'लिफ्ट' में भी निवेश किए हैं.
अलवलीद लंदन स्थित होटेल सैवॉय के भी मालिक हैं और फ़ोर्ब्स पत्रिका के अनुसार 17 बिलियन डॉलर (यानी 17 अरब डॉलर) के साथ दुनिया के सबसे धनी लोगों में गिने जाते हैं.
ट्रंप से विवाद
अलवलीद ने डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से पहले उनकी कंपनी से एक यॉट और एक होटल खरीदा था. साल 2015 में वो ट्विटर पर ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने के फैसले के विरोध में उनके साथ बहस में उलझ गए थे.
अलवलीद का कहना था, "आप ना केवल रिपब्लिकन नेशनल कमिटी के लिए बल्कि पूरे अमरीका के लिए अपमान के समान हैं. आप राष्ट्रपति पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लें क्योंकि आप कभी जीत नहीं सकेंगे."
इसके जवाब में ट्रंप ने कहा, "झूठे राजकुमार अपने पिता के पैसों से हमारे अमरीकी राजनेताओं को अपने काबू में करना चाहते हैं. लेकिन मैं राष्ट्रपति बन गया तो ऐसा नहीं होगा."
वाकई भ्रष्टाचार ख़त्म कर रहे हैं प्रिंस?
मोहम्मद बिन सलमान ने नेशनल गार्ड्स के मंत्री प्रिंस मितब बिन अब्दुल्ला और नेवी के कमांडर एडमिरल अब्दुल्ला बिन सुल्तान बिन मोहम्मद अल-सुल्तान को भी बर्खास्त कर दिया है.
इस मामले में कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है.
प्रिंस मितब दिवंगत सऊदी शाह अब्दुल्ला के बेटे हैं और कभी देश के सर्वोच्च पद के दावेदार रह चुके हैं.
अब्दुल्ला परिवार के वो अख़िरी सदस्य हैं जो सऊदी सरकार में ऊंचे पद पर थे.
सत्ता को चुनौती
लंदन स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स में मिडल ईस्ट सेंटर के विज़िटिंग प्रोफेसर मदावी अल-राशीद ने बीबीसी को बताया कि देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के इस आदेश ने युवराज मोहम्मद बिन सलमान को देश के सुरक्षाबलों पर पूरा नियंत्रण दे दिया है.
वो कहते हैं, "ये कहना बेहद मुश्किल है कि ये भ्रष्टाचार ख़त्म करने की दिशा में लिया गया क़दम है."
वो कहते हैं, "इस कारण से मोहम्मद बिन सलमान की ताकत और बढ़ी है. वो उस आख़िरी रिश्तेदार को भी अपने रास्ते से हटा देना चाहते हैं जो एक बेहद आधुनिक पैरामिलिटरी फ़ोर्स की अध्यक्षता करते हैं और उनकी सत्ता को चुनौती देने की काबिलियत रखते हैं. ऐसे और कोई प्रिंस नहीं बचे जिनका सेना या सुरक्षा बलों पर कोई अधिकार हो और जो ऐसा कुछ कर सकें."
सऊदी के लिए भूचाल
हाल में एक सम्मेलन में युवराज मोहम्मद ने कहा था कि देश को आधुनिक बनाने की योजना के तहत वो उदार इस्लाम की वापसी चाहते हैं.
रियाद में आयोजित एक आर्थिक कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वो कसम लेते हैं कि "वो कट्टरपंथ के आखिरी झंडाबरदारों को हटा देंगे."
बीते साल उन्होंने देश में तेल के ऊपर देश की निर्भरता ख़त्म करने के लिए और देश में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने के लिए बड़े पैनामे पर सुधारों की घोषणा की थी.
उन्होंने देश की उदार सब्सिडी व्यवस्था को कम करने की शुरुआत की और सरकारी तेल संपनी सऊदी अराम्को के निजीकरण का प्रस्ताव आगे बढ़ाया.
बीबीसी के सिक्योरिटी कॉरेस्पॉन्डेंट फ़्रैंक गार्डनर कहते हैं, "सऊदी अरब में शनिवार की रात जो घटनाएं हुईं वो देश के लिए किसी भूचाल से कम नहीं हैं."
सबसे अमीर तेल उत्पादक
फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक़, "एक पूर्व-नियोजित और साहसिक कदम के तहत युवराज ने दुनिया के सबसे अमीर तेल उत्पादक और इस्लाम में सबसे पवित्र मंदिरों के देश पर पूरा कब्ज़ा पाने की दिशा में रास्ते की आख़िरी रुकावटों को हटा दिया है."
फ्रैंक कहते हैं "सऊदी नागरिकों के लिए राजकुमारों, मंत्रियों और अलवालीद बिन तलल की गिरफ्तारी सदमे की तरह था."
वो बताते हैं, "नगरिकों में, ख़ास कर युवाओं में युवराज मोहम्मद बिन सलमान काफ़ी लोकप्रिय हैं, लेकिन बुज़ुर्ग और रूढ़िवादी उन्हें कम पसंद करते हैं. रूढ़िवादियों का कहना है कि वो कम समय में देश में अधिक बदलाव करना चाहते हैं. उन्होंने यमन में कभी ना जीता जा सकने वाला युद्ध शुरू कर दिया है और साथ-ही कथित इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों से भी लड़ रहे हैं. उन्होंने खाड़ी देशों के क़तर के बहिष्कार का भी समर्थन किया है जिससे नुकसान हो सकता है."
"लेकिन उनके समर्थक देश के आधुनिकीकरण के उनके प्रयासों की तारीफ़करते हैं. कई सालों तक उम्रदराज़ शासकों की सत्ता में रह चुके युवा एक कम उम्र के शासक के विज़न का स्वागत करते हैं और मानते हैं कि वो अगले 50 वर्षों तक देश के किंग रह सकते हैं."
कौन हैं सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस सलमान?
जनवरी 2015 में किंग अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अज़ीज़ की मौत हो गई और मोहम्मद बिन सलमान के पिता सलमान 79 वर्ष की उम्र में किंग बने थे.
इसी साल उन्हें उनके चचेरे भाई मोहम्मद बिन नायेफ़ को हटाकर क्राउन प्रिंस यानी युवराज बनाया गया. मोहम्मद बिन नयाफ को गृह मंत्री के पद से भी हटा दिया गया था. उस वक्त 31 साल के मोहम्मद बिन सलमान दुनिया के अग्रणी तेल निर्यातक देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बन गए.
31 अगस्त 1985 को जन्मे सलमान तत्कालीन प्रिंस सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊदी की तीसरी पत्नी फ़हदाह बिन फ़लह बिन सुल्तान के सबसे बड़े बेटे हैं.