रोहिंग्या: माटी छूटी, वतन ने ठुकराया...

रोहिंग्या बच्चा

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

इमेज कैप्शन, डरा-सहमा दो साल का हज़ेरा म्यांमार से बांग्लादेश पहुंचते ही अपनी मां से लिपट गया

म्यांमार की सेना ने पांच लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों को रखाइन प्रांत से बेरहमी से निकाल बाहर कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र मानावाधिकार कार्यालय के मुताबिक उनके घर जला दिए गए और उनकी फसलों और पशुधन बर्बाद कर दिए गए.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

ये सब इसलिए किया गया क्योंकि वो लौट कर म्यांमार वापस न आ सकें.

भाग कर पड़ोसी देश बांग्लादेश पहुंचे रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यांमार के सुरक्षाबलों पर नागरिकों की हत्या, उत्पीड़न और बच्चों के बलात्कार के आरोप लगाए हैं.

रोहिंग्या बच्चा

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

इमेज कैप्शन, तेरह साल के मोबिन को सुरक्षित पहुंचने के लिए 12 दिन का सफर तय करना पड़ा

हांलाकि म्यांमार की सेना इन आरोपों से इनकार करती है. उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ रोहिंग्या 'चरमपंथियों' पर कार्रवाई की.

लेकिन जो लोग बेघर हुए और मुश्किल हालात में जीने को मजबूर हैं, उन्हें अब इन बयानों से फर्क नहीं पड़ता.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

इमेज कैप्शन, थके पैरों वाला ये इंसान कीचड़ से गुज़रकर शरणार्थी शिविर पहुंचा है

संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के राजदूत ने बताया कि अगस्त से अब तक छह लाख से ज्यादा लोग सरहद पार करके म्यांमार में दाखिल हुए हैं.

तीन लाख लोग हिंसा भड़कने से पहले ही आ चुके थे. ये लोग अब थक चुके हैं और भूख से परेशान हैं. कुछ लोग सदमें में हैं, इनके साथ कई बच्चें भी हैं.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

बीबीसी फोटोग्राफर सलमान सईद ने बांग्लादेश के कॉक्स बाजार क्षेत्र में बनाए गए शरणार्थी शिविर के करीब से ये तस्वीरें ली हैं.

म्यांमार में हुए अत्याचारों के गवाह ये रोहिंग्या परिवार एक हफ्ते से भी ज्यादा समय से बिना खाए-पीए चलकर बांग्लादेश पहुंचे हैं.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

इमेज कैप्शन, अबु तबेल का सब कुछ म्यांमार में छुट गया है, बचे-कुचे सामान के साथ वो म्यांमार में दाखिल हुए

ये लोग कुछ सामान और कंबल कंधों पर लादे हैं. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों को शक है कि बीते कुछ हफ्तों में म्यांमार के सुरक्षाबलों ने सीमा पर लैंड माइंस बिछाए हैं.

इससे मुश्किल रास्ता और खतरनाक हो गया है.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि कुछ लोग तीन हफ्ते से ज्यादा वक्त तक पैदल चले, तब जाकर वो कुटुपलोंग के सरकारी शिविरों में पहुंचे.

इनमें शामिल बच्चों का चल-चलकर बुरा हाल था. रखाइन से जान बचाकर भागने के लिए यातायात का जो भी साधन इन लोगों को मिल रहा है, उसका इस्तेमाल कर रहे हैं.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

कुछ लोग नफ नदी के ज़रिए तो कुछ लोग सीमा या समुद्री नौका के ज़रिए निकल रहे हैं. छोटी नौकाओं से बांग्लादेश पहुंचने की कोशिश में अब तक दर्जनों लोग मारे गए हैं.

द ढाका ट्रीब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक 24 अगस्त से अब तक 28 नौकाएं डूबी हैं, जिनमें 184 लोग मारे जा चुके हैं. मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

छोटी नौका में ज्यादा लोग बैठ जाते हैं, ऐसे में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है. इनमें से कई लोग तैरना भी नहीं जानते.

लंबी जद्दोजहद के बाद जब ये विस्थापित लोग बांग्लादेश के सीमावर्ती कस्बे कॉक्स बाजार पहुंचे. यहां के शिविर में उन्हें जो मिला उससे उन्होंने अपना आशियाना बना लिया.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

ये इलाका कीचड़ से भरा है और यहां बहुत सारे लोग एक साथ रहते हैं. यहां साफ पानी की कमी है. शौचालय बेहद कम हैं.

कभी ज़ोरदार बारिश हो जाए तो मुसीबतें और बढ़ जाती हैं और हैज़ा जैसी बीमारियां फैलने का डर रहता है.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

इमेज कैप्शन, इस रोहिंग्या लड़के को समय रहते इलाज मिल गया

सरहद पार करने वाले कई लोगों के रिश्तेदार कॉक्स बाज़ार में रहते हैं, जिनको वो बेसब्री से ढूढ़ रहे हैं.

16 अक्टूबर को रेड क्रॉस ने कॉक्स बाज़ार में 60 बिस्तर वाला अस्पताल खोला. इसमें तीन वार्ड, एक ऑपरेशन थिएटर, एक प्रसूति वॉर्ड और एक मनोरोग विभाग है.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

इमेज कैप्शन, इस परिवार को कई दिनों बाद कुछ खाने को मिल सका है

बांग्लादेश ने एक शरणार्थी शिविर बनाने की घोषणा की है, जिसमें आठ लाख रोहिंग्या लोगों के रहने की व्यवस्था होगी.

कई रोहिंग्या कहते हैं कि उन्हें भुखमरी की वजह से गांव छोड़ना पड़ा. रखाइन के जिन बाज़ारों में खाना मिलता था, उन्हें बंद कर दिया गया और कोई मदद भी नहीं दी गई.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

रसीदा को नौ महीने का गर्भ है. ऐसी हज़ारों महिलाएं हैं जो मां बनने वाली हैं और कभी भी बच्चे को जन्म दे सकती हैं.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मुताबिक करीब 24,000 रोहिंग्या औरतें गर्भवती हैं. कई औरतों को रोड के किनारे बच्चों को जन्म देना पड़ा.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

17 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि अभी भी हज़ारों रोहिंग्या म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के करीब फंसे हैं.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

ये एक तेज़ी से बढ़ता हुआ मानवीय संकट है, जिसमें लाखों लोग प्रभावित हुए हैं.

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

रोहिंग्या शरणार्थी

इमेज स्रोत, SALMAN SAEED / BBC

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)