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क्या म्यांमार पर लगेंगे उत्तर कोरिया जैसे प्रतिबंध?
म्यांमार में जारी हिंसा और पलायन के बीच अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या म्यांमार पर भी उत्तर कोरिया की तरह संयुक्त राष्ट्र की तरफ से प्रतिबंध लगाए जाएंगे?
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ज़ीद राद अल-हुसैन ने ऐसी मांग की है. उन्होंने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हो रहे अमानवीय बर्ताव के लिए म्यांमार पर प्रतिबंध लगाने के विषय में सोचना चाहिए.
म्यांमार से बांग्लादेश की तरफ पलायन
म्यांमार सरकार ने रखाइन प्रांत में जारी हिंसा के लिए रोहिंग्या चरमपंथियों को दोषी ठहराया है. इस हिंसा के कारण लाखों रोहिंग्या मुसलमान अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं.
ये लोग सरहद पार करके बांग्लादेश में शरण ले रहे हैं, जबकि बांग्लादेश चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय म्यांमार पर इन शरणार्थियों को वापस लेने का दबाव बनाए. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में यह बात संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भी दोहराई थी.
'चरमपंथियों पर सवाल एक बहाना'
बीबीसी से बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख हुसैन ने रोहिंग्या चरमपंथियों पर हिंसा करने के आरोपों को एक बहाना करार दिया.
उन्होंने कहा, ''पिछले 55 सालों से एक समुदाय के ख़िलाफ़ लगातार हिंसा जारी है, उनके अधिकारों को दबाया जा रहा है, आज म्यांमार इसी की प्रतिक्रिया झेल रहा है. हम चरमपंथियों की कार्रवाई को सही नहीं ठहरा रहे लेकिन यह एक प्रतिक्रिया स्वरूप कार्रवाई है.''
उन्होंने कहा कि म्यांमार सरकार मामले की जांच के लिए जांचकर्ताओं को वहां आने की इजाज़त दे.
50-60 फीसदी लोग शांति से रह रहे हैं: म्यांमार
वहीं म्यांमार के समाज कल्याण, राहत और पुनर्वास मंत्री डॉ. विन मएत आए ने कहा कि म्यांमार की सेना चरमपंथियों से निपटने का काम कर रही है.
विन मएत आए को रखाइन प्रांत में कोफी अन्नान की सिफारिशें लागू करवाने की जिम्मेदारी दी गई है.
उन्होंने कहा, '' हमारी सेना चरमपंथियों के ख़िलाफ़ लड़ रही है, जो भी चरमपंथी गतिविधियों में शामिल पाया जाएगा उसे गिरफ़्तार किया जाएगा, यही सबसे सामान्य तरीका होता है. इसी वजह से लोग डरे हुए हैं और अपने घर छोड़ रहे हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि लगभग 50 से 60 प्रतिशत लोग गांव में शांति से रह रहे हैं.''
सू ची के पास आखिरी मौका
संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में कहा था कि म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची के पास रोहिंग्या लोगों पर सेना की आक्रामक कार्रवाई को रोकने का आख़िरी मौक़ा है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीबीसी से कहा था कि यदि अब भी सू ची कुछ नहीं करती हैं तो यह त्रासदी बहुत विकराल हो जाएगी.
म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में भी हिस्सा नहीं लिया था.
उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध
हाल ही संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर कुछ नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. ये प्रतिबंध उत्तर कोरिया के लगातार बढ़ते परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के मकसद से लगाए गए थे.
प्रतिबंध का मसौदा अमरीका ने तैयार किया था जिसे चीन और रूस समेत सभी 15 सदस्यों ने मंजूरी दी.
नए प्रतिबंधों के ज़रिए उत्तर कोरिया के आय के स्रोत बंद करने की कोशिश की गई है.
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