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बेनज़ीर भुट्टो की हत्या से जुड़े 7 सवालों के जवाब
- Author, हारून रशीद
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद से
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की रावलपिंडी में 27 दिसंबर 2007 को हत्या कर दी गई थी. वो शहर में चुनाव प्रचार के लिए पहुंची थीं, उसी दौरान धमाका हुआ.
इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर भुट्टो को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने के आरोप भी लगे थे.
मामले की जांच कर रहे सरकारी वकील चौधरी जुल्फ़िकार अली की 2013 में गोली मार कर हत्या कर दी गई. घटना के 14 साल बाद इस मामले का फ़ैसला आने वाला है.
आइए जानते हैं कि इस बहुचर्चित मुक़दमे के बारे में-
1-किन पर हैं आरोप?
बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के मामले में पांच लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर किए गए हैं. करांची के ऐतज़ाज़ शाह, दक्षिणी वज़ीरिस्तान के शेर ज़मन लाढ़ा, रावलपिंडी के हसनैन गुल, एन रफ़ाक़त और चारसद्दा के रशीद अहम उर्फ तुराबी.
इनमें हसनैन का नाम, अमरीका की अलक़ायदा नेताओं की सूची में भी शामिल है. इसके अलावा दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सउद अजीज़ और खुर्रम शहज़ाद हैदर पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने में लापरवाही और घटनास्थल को तुरंत पानी से धुलने और साफ़ करने के भी आरोप हैं.
जबकि पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर लापरवाही और बेनज़ीर को धमकी देने का आरोप है.
2-कुछ आरोपी लापता?
सात अन्य अरोपी या तो मर चुके हैं या लापता. चैधरी अज़हर कहते हैं कि उन्होंने आत्मघाती हमलावर अकरमुल्ला की मौत की रिपोर्ट देखी है लेकिन ये जांच का हिस्सा है ही नहीं.
जो लोग मारे गए हैं उनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का पूर्व मुखिया बैतुल्लाह मेहसूद का नाम शामिल है.
3-क्या हैं आरोप?
अभियुक्तों पर हत्या और हत्या की साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं. इनमें ऐतज़ाज़ नाबालिग हैं और अदालत उनकी सज़ा के बारे में फ़ैसला दे सकती है. इनके अलावा बाकी सभी बालिग हैं.
4-कितनी अधिकतम सज़ा हो सकती है?
इस मामले में अधिकत सज़ा फ़ांसी या उम्रक़ैद की हो सकती है. अग़र पांचों अभियुक्तों पर आरोप साबित होते हैं तो उन्हें वही सज़ा होगी जो मुख्य अरोपी को मिलेगी. हालांकि वो ऊपरी अदालत में इसके ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दायक कर सकते हैं. और अंत में राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर कर सकते हैं.
5-अभियुक्तों को कहां रखा गया है?
पांच अभियुक्तों को रावलपिंडी के अदियाला जेल में रख गया है. सउद अज़ीज़ और खुर्रम ज़मानत पर हैं. परवेज़ मुशर्रफ़ भी ज़मानत पर हैं और उन्हें सुरक्षा कारणों से अदालत में पेश होने से छूट मिली हुई है. विदेश में रहने के कारण पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का बयान नहीं लिया जा सका.
6- कितने गवाह और सबूत पेश किए गये?
इस मामले की सुनवाई आठ जजों वाली बेंच कर रही है. पूरे मुक़दमे के दौरान कुल नौ रिपोर्टें अदालत में दाख़िल की गईं. अभियोजन ने सबूतों, डीएनए रिपोर्टों आदि के 88 दस्तावेज़ अदालत को मुहैया कराए. गवाहों के बतौर 68 लोगों के बयान लिए गए, जिनमें ज़्यादातर आम लोग हैं.
मामले में औपचारिक रूप में सेना ने कुछ नहीं कहा है. आईएसआई के एक गवाह ने शुरू में कहा था कि उसने बैतुल्लाह और एक अन्य व्यक्ति के बीच बातचीत को रिकॉर्ड किया था.
7- जांच एजेंसियों की जांच में फर्क़?
सबसे पहले इस मामले की जांच पंजाब पुलिस ने की थी, जिसमें उसने एक धमाके की बात कही थी, लेकिन जब इसे संघीय जांच एजेंसी को सौंपा गया तो उसने कहा कि फ़ारेंसिक रिपोर्ट के अनुसार दो विस्फ़ोट हुए थे.
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