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उत्तर कोरिया से बातचीत नहीं, सही कार्रवाई की ज़रूरत: डोनल्ड ट्रंप
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक ट्वीट के जरिए साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया की दागी मिसाइल का जवाब बातचीत नहीं है.
अमरीकी राष्ट्रपति का यह ट्वीट उत्तर कोरिया के सबसे ताज़ा मिसाइल परीक्षण के महज़ एक दिन बाद आया है.
ट्रंप ने ट्वीट किया, "अमरीका पिछले 25 सालों से उत्तर कोरिया से बातचीत करता आ रहा है और उसे पैसे देता आ रहा है, अब बातचीत से बात नहीं बनेगी!"
उत्तर कोरिया का कहना है कि जापान के ऊपर से मिसाइल दागना प्रशांत क्षेत्र में उसकी सैन्य कार्रवाई की दिशा में उठाया गया 'पहला कदम' है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इसकी आलोचना करते हुए एक आपातकालीन बैठक बुलाई.
माना जा रहा है कि कोरिया द्वारा जापान के पूर्वी तट की तरफ दागी गई ऐसी पहली बैलिस्टिक मिसाइल है जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. उत्तर कोरिया की कार्रवाई को भविष्य में और ऐसे कदमों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
ट्रंप की जवाबी कार्रवाई क्या होगी?
ट्रंप ने अपने बुधवार के ट्वीट में यह नहीं बताया कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई क्या होगी.
हालांकि ट्रंप तब भी यह कह चुके हैं कि यदि उत्तर कोरिया अमरीका को धमकाना जारी रखता है तो उसे ऐसे विध्वंस का सामना करना होगा जो दुनिया ने पहले नहीं देखा होगा, जब उत्तर कोरिया ने गुआम द्वीप पर हमला करने की धमकी दी थी.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हेली ने भी उत्तर कोरिया के इस परीक्षण पर बेहद गंभीर प्रतिक्रिया देते हुआ कहा कि अब कोई गंभीर कार्रवाई होनी ही चाहिए.
उन्होंने कहा, "बहुत हो गया. जापान में लगभग 13 करोड़ लोग रहते हैं और जैसा उनके साथ हुआ किसी भी व्यक्ति के ऊपर से मिसाइल नहीं जानी चाहिए."
क्यों परमाणु ताकत बनना चाहता है उत्तर कोरिया?
उत्तर कोरिया का बंटवारा दूसरे विश्व युद्ध के बाद हुआ था. वामपंथी उत्तर कोरिया में रूस की तर्ज पर तानाशाही व्यवस्था लागू हुई.
विश्व बिरादरी में पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुके उत्तर कोरिया के नेताओं को लगता है कि परमाणु ताकत ही वो दीवार है जो उन्हें बर्बाद करने पर तुली दुनिया से बचा सकती है.
जानकार मानते हैं कि इसी कारण से उत्तर कोरिया पिछले कुछ महीनों से लगातार मिसाइलों के परीक्षण में लगा है. ऐसा लगता है कि उसकी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलें अमरीका तक पहुंच सकती हैं. उसने लगभग पांच बार न्यूक्लियर डिवाइस का परीक्षण किया है.
जापान के ऊपर से ही मिसाइल परीक्षण क्यों?
खुफ़िया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो छोटे आकार के परमाणु हथियार बनाने के क़रीब है या फिर वो इसे हासिल कर चुका है.
कहा जाता है कि वह ऐसे परमाणु हथियार विकसित कर रहा है जो किसी रॉकेट में फ़िट किए जा सकते हैं.
मंगलवार को जापान के ऊपर से गुज़री उसकी मिसाइल भी कुछ ऐसी ही थी क्योंकि ये परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताई गई है.
उत्तर कोरिया अमरीका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है और जापान के ऊपर से मिसाइलें दाग कर उसने ये प्रदर्शित भी कर दिया है कि वो गुआम तक अपनी मिसाइलें पहुंचाने की क्षमता तेज़ी से विकसित कर रहा है.
उत्तर कोरिया को अपने देश से गुआम तक रॉकेट पहुंचाने के लिए न केवल क़रीब 3430 किलोमीटर का फ़ासला तय करना होगा बल्कि जापान के ऊपर से अपनी मिसाइलें दागनी होंगी.
क्या है गुआम का सामरिक महत्व?
गुआम पैसेफ़िक का एक द्वीप है जहां अमरीका के एयरफ़ोर्स और नौसेना का एयरबेस है. 541 वर्ग किलोमीटर में फैला गुआम अमरीका के लिए सामरिक तौर पर काफ़ी महत्वपूर्ण है.
इस द्वीप की आबादी क़रीब एक लाख 63 हज़ार है. इस द्वीप के एक चौथाई हिस्से में अमरीका का मिलिट्री बेस कैंप है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल इस द्वीप में छह हज़ार सैनिक तैनात हैं और अमरीका यहां अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
अमरीका ने इस द्वीप के उत्तरी किनारे पर घने जंगलों के बीचों-बीच अपना एक विशाल एयरबेस बनाया हुआ है.
गुआम की अहमियत इस बात से समझें कि इस एक द्वीप की मदद से अमरीका की पहुंच दक्षिणी चीन सागर, कोरिया और ताइवान तक है. गुआम ऐसी जगह पर है, जहां से दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे पर अमरीका महत्वपूर्ण क़दम उठा सकने की स्थिति में है.
बहरहाल, उत्तर कोरिया के इस नए परीक्षण से न केवल जापान स्थित अमरीका सैन्य ठिकाने के ख़तरा पैदा हुआ है बल्कि उत्तर कोरिया ने यह भी दिखा दिया है कि वो गुआम के समीप भी अपनी मिसाइलें दाग सकता है.
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