ट्रंप: पाकिस्तान का चरमपंथियों के लिए ठिकाना बने रहना बर्दाश्त नहीं

डोनल्ड ट्रंप

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने वर्जीनिया में एक संबोधन के दौरान आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान को चेतावनी दी है.

उन्होंने कहा कि अमरीका किसी भी स्थिति में यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि पाकिस्तान चरमपंथियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहे.

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा, ''हम पाकिस्तान को अरबों डॉलर देते रहे और उसी वक़्त वो उन आतंकियों को पनाह देते रहे जिनके ख़िलाफ़ हम लड़ रहे हैं. इसे बदलना होगा और ये ज़ल्द बदलेगा.''

ट्रंप ने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान में हमारे प्रयासों के साथ सहभागी बनने में पाकिस्तान को काफ़ी फ़ायदा है, लेकिन आतंकियों का मददगार बने रहने में बड़ा नुकसान है.''

अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अमरीका की रणनीति बताते हुए ट्रंप ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका के हटने पर आतंकियों को घुसपैठ का मौका मिल जाएगा.

उन्होंने कहा कि उनका मक़सद था कि वह अमरीकी सैनिकों को वहां से हटा लेंगे लेकिन अब वह नहीं चाहते कि इराक़ जैसी ग़लती दोबारा हो.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ''अमरीका अफ़ग़ान सरकार के साथ मिलकर काम करेगा, जब तक हमें प्रगति और प्रतिबद्धता दिखेगी.''

भारत से सहयोग की अपील करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमरीका चाहता है कि भारत आर्थिक सहायता और विकास के मामले में अफ़ग़ानिस्तान का सहयोग करे.

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बढ़ेंगे सैनिक?

तालिबान के ख़िलाफ़ अमरीकी सेनाओं का अभियान 2014 में आधिकारिक तौर पर ख़त्म हो गया लेकिन स्पेशल फोर्सेज ने अफ़ग़ानी सेनाओं की मदद करना जारी रखा.

अफ़ग़ानिस्तान में अभी क़रीब 8400 अमरीकी सैनिक हैं.

अफ़ग़ान सरकार लगातार विद्रोही समूहों के ख़िलाफ़ लड़ रही है और देश के आधे हिस्से में नियंत्रण रख पा रही है.

ट्रंप ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या कम या ज़्यादा करने को लेकर कोई बयान नहीं दिया. माना जा रहा था कि वह 4000 अमरीकी सैनिकों को अफ़ग़ान भेजने की घोषणा कर सकते हैं.

अमरीकी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल जॉन निकोलसन ने इतने सैनिक भेजने का अनुरोध किया था.

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सीक्रेट

ओबामा प्रशासन की आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा, ''सैनिकों की संख्या या अपनी योजना को लेकर हम कोई बात नहीं करेंगे.''

हालांकि अमरीकी रक्षा सचिव जिम मैटिस ने इशारा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले अमरीकी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से वापसी का समर्थन किया था, जो 9/11 हमले के बाद 2001 में जॉर्ज बुश के कार्यकाल में शुरू हुआ था.

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