अजीत डोभाल के दौरे को क्यों अहमियत नहीं दे रहा है चीन?

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ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक इस हफ्ते चीन में होने जा रही है.
इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भारत की नुमाइंदगी करने वाले हैं.
माना जा रहा है कि 27 और 28 जुलाई को होनी जा रही इस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोभाल अपने चीनी समकक्ष से भी मिल सकते हैं.
27 जून को भूटान सीमा पर डोकलाम में चीन ने भारतीय सेना पर सड़क निर्माण में बाधा का आरोप लगाया था.
चीन ने दावा किया था कि सड़क निर्माण का काम उसके अपने इलाके में हो रहा था. भारत ने डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण के बहाने चीन के दखल का विरोध किया था.
इस बीच, चीन के सरकारी अख़बार 'ग्लोबल टाइम्स' ने डोभाल की प्रस्तावित चीन यात्रा पर संपादकीय लिखा है.
'भ्रम छोड़े भारत'
संपादकीय में लिखा गया है, "भारत को अपना भ्रम छोड़ देना चाहिए. अजीत डोभाल की चीन यात्रा दोनों देशों के बीच जारी विवाद को भारत की मर्जी से हल करने के लिए सही मौका नहीं है. ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक नियमित तौर पर होनी वाले एक कॉन्फ्रेंस है जिसका मकसद ब्रिक्स समिट की तैयारी करना है. यह प्लेटफॉर्म चीन-भारत सीमा विवाद को सुलझाने के लिए नहीं है."
यहां तक कि ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि मौजूदा सीमा-विवाद के पीछे 'सबसे बड़ा दिमाग़' डोभाल का ही है.
अख़बार का कहना है कि भारतीय मीडिया ये आस लगाए बैठा है कि डोभाल के दौरे से मौजूदा विवाद का हल निकल जाएगा.
'सौदेबाज़ी न करें तो बेहतर'
सीमा विवाद पर चीन के रुख को दोहराते हुए संपादकीय में कहा गया है, चीन इस बात पर अडिग है कि उसके इलाके से भारतीय सैनिकों को हटाने के बाद ही दोनों देशों के बीच कोई सार्थक बातचीत हो सकेगी.
अख़बार आगे कहता है, "सीमा विवाद पर डोभाल अगर सौदेबाज़ी की कोशिश करते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगेगी. इस मुद्दे पर चीन की सरकार के रुख को सभी चीनी लोगों का समर्थन हासिल है. चीन के लोग इस बात पर अडिग हैं कि हम अपनी ज़मीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे."
ग्लोबल टाइम्स ने इस लेख में दोनों देशों की 'आर्थिक हैसियत' का भी हवाला दिया है.
अख़बार के मुताबिक, "चीन की जीडीपी भारत से पांच गुना और रक्षा बजट चार गुना है, लेकिन हमारी ताकत का केवल यही एक पैमाना नहीं है. इंसाफ़ चीन के साथ है. भारतीय सैनिकों की सीमा से बिना शर्त वापसी की चीन की मांग पूरी तरह से वाजिब है."
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