उर्दू प्रेस रिव्यूः क्या पाकिस्तानी पीएम नवाज़ शरीफ़ को जेल जाना होगा?

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों की बात की जाए तो पनामा लीक्स और भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें हर तरफ़ छाई रहीं.
सबसे पहले बात करते हैं भ्रष्टाचार से जुड़े पनामा लीक्स की.
पनामा लीक्स का भूचाल
भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी संयुक्त जांच कमेटी (जेआईटी) 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. कमेटी ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार के सदस्यों से भी घंटों पूछताछ की थी.
लेकिन अब जबकि जेआईटी अपनी रिपोर्ट पूरी कर चुकी है और वो इसे जमा करने वाली है तो राजनीतिक बयानबाज़ी एक बार ज़ोरों पर है.
एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार विपक्षी नेता इमरान ख़ान ने कहा है कि नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग (नून) अदालत, सेना और जेआईटी को बदनाम करने की कोशिश कर रही है.
इमरान ख़ान ने कहा कि अगर इस बार नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट पर हमला किया तो वो पूरी क़ौम को लेकर सड़कों पर उतर जाएंगे.
इमरान ख़ान का कहना था, ''जिस दिन का इंतज़ार था वो आ गया है. ज़बर्दस्त मैच होने जा रहा है. मैं नवाज़ शरीफ़ को अडयाला जेल में देख रहा हूं.''

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शरीफ़ पर निशाना
इमरान ने कहा कि वो राजनीति नहीं कर रहे हैं, बल्कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं.
दूसरी तरफ़, नवाज़ शरीफ़ पूरी तरह आश्वस्त हैं कि जेआईटी से उन्हें और उनके पूरे परिवार को क्लीन चिट मिल जाएगी.
जंग अख़बार के अनुसार नवाज़ शरीफ़ ने अपने विरोधियों पर हमला करते हुए कहा है कि विपक्ष जब कहे वो मुक़ाबले के लिए तैयार हैं.
नवाज़ शरीफ़ का कहना था, ''विपक्षी दल केवल साज़िश रच सकते हैं, चुनाव नहीं जीत सकते हैं. विरोधी धरने की आड़ में कभी जेआईटी की आड़ में छुपते हैं. इन चीज़ों के पीछे छुपने के बजाए सामने आकर मुक़ाबला करो.''
शरीफ़ ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वो पहले भी चुनाव हारे थे और आगे भी हारेंगे.

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आठ जुलाई, 2017 को चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने की पहली बरसी थी.
ठीक एक बरस पहले, भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में कमांडर बुरहान वानी की मौत हो गई थी.
इसके बाद से पूरी कश्मीर घाटी में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे और इस दौरान पुलिस फ़ायरिंग में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और पैलेट गन के कारण कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी.

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बुरहान की बरसी और कश्मीर के हालात
बुरहान वानी की मौत की बरसी से जुड़ी ख़बरें पाकिस्तानी अख़बारों में प्रमुखता से छपीं.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने इसे अपने पहले पन्ने पर छापा है.
अख़बार लिखता है, ''बुरहान वानी का शहादत दिवस. भारत के क़ब्ज़े वाला कश्मीर छावनी में तब्दील.''
अख़बार के अनुसार प्रशासन ने मोबाइल सेवा और इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगा दी है. हुर्रियत नेताओं को घरों में नज़रबंद कर दिया गया है.
अख़बार दुनिया ने संपादकीय पेज पर एक लेख लिखा है.
पाकिस्तानी स्तंभकार हबीबुल्लाह क़मर ने लिखा है कि बुरहान वानी की शहादत ने कश्मीर में आज़ादी की तहरीक में एक नई रूह फूंक दी है.
लेख में कहा गया है, ''भारत प्रशासित कश्मीर के सभी राजनीतिक और धार्मिक संगठन और कश्मीर की अवाम आज जिस तरह संगठित नज़र आ रहे हैं, पहले कभी ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई थी. यही कारण है कि भारत सरकार सख़्त बौखलाहट की शिकार है.''

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कश्मीर में रासायनिक हथियार?
अख़बार के अनुसार चरमपंथी संगठन जमात-उद-दावा ने सात जुलाई से 19 जुलाई तक कश्मीरियों के समर्थन में प्रदर्शन करने की घोषणा की है.
लेख में हबीबुल्लाह क़मर लिखते हैं, ''कश्मीर के हालात इस समय ये हैं कि भारतीय सेना निहत्थे कश्मीरियों पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर उतर आई है.''
वो आगे लिखते हैं, ''भारतीय सेना रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करके कश्मीरियों की नई नस्ल को अपाहिज बना रही है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा काउंसिल जैसे संगठनों ने पूरी तरह ख़ामोशी अख़्तियार कर रखी है.''
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