उत्तर कोरिया के सामने इतना बेबस क्यों है अमरीका?

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Reuters

    • Author, डॉ. जॉन निल्सन-राइट
    • पदनाम, चैटम हाउस

भरोसे के साथ उत्तर कोरिया की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के सफल परीक्षण की घोषणा दुनिया को डराने के खेल में एक नया मुकाम है.

इस मिसाइल की पहुंच अमरीका तक है. इस मिसाइल के परीक्षण के लिए समय का चुनाव भी सतर्कता के साथ किया गया है. चार जुलाई को अमरीका में छुट्टी का दिन होता है.

उत्तर कोरियाई अधिनायकवादी नेता किम जोंग उन अपनी सैन्य ताक़त के आधुनीकीकरण में लगे हुए हैं. उन्होंने ऐसा करने के लिए अपने मुल्क के लोगों से वादा कर रखा है.

दूसरी तरफ़ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के खोखले अतिआत्मविश्वास से भरे ट्वीट हैं कि उत्तर कोरिया आईसीबीएम का परीक्षण नहीं कर पाएगा.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, KCNA/VIA REUTERS

उत्तर कोरिया के ह्वासोंग-14 रॉकेट का परीक्षण व्यावहारिक रूप में शायद मई महीने की शुरुआत में किए गए परीक्षण का अगला क़दम है.

तब इसी तरह का रॉकेट 30 मिनट के लिए उड़ा था. इसकी ऊंचाई दो हज़ार 111 किलोमीटर से ज़्यादा थी. सबसे हाल की मिसाइल के उड़ने का समय नौ मिनट तक है.

इसकी दूरी 400 मील अतिरिक्त है और ऊंचाई और कुल दूरी में ये 88 मील आगे है.

अगर इसे सतही तौर पर देखें तो यह उसी पैटर्न पर है जिसके तहत उत्तर कोरिया युद्ध भड़काने के लिए रणनीतिक रूप से दशकों से करता आ रहा है या फिर 1960 के दशक से ही परमाणु हथियार हासिल करने की चाहत या मिसाइल परीक्षण कार्यक्रम को पिछले साल से तेज़ गति देने की तर्ज़ पर है.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, AFP/GETTY IMAGES

उत्तर कोरिया की ज़द में अलास्का का आना प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों कसौटियों पर स्पष्ट रूप से गेमचेंजर की तरह है.

आख़िरकार अमरीका भी उत्तर कोरिया के रेंज में आ गया और पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया है कि यह 'वास्तविक और वर्तमान' ख़तरा है.

यह ख़तरा न केवल उत्तर-पूर्वी एशिया और अमरीका के अहम सहयोगियों के लिए बल्कि ख़ुद अमरीका के लिए भी है.

इस मामले में राष्ट्रपति ट्रंप ज़ोर से बोलते रहे, लेकिन कुछ कर नहीं पाए. इसमें उनकी कमज़ोरी ही सामने आई. ट्रंप ने शुरुआती क़दम के तहत इस इलाक़े में जहाज़ों के बेड़ों की तैनाती की थी.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

इसके तहत ट्रंप ने यूएसएस विन्सन कार्ल बैटल ग्रुप को तैनात किया था. इसकी तैनाती का इतिहास कोई गौरवशाली नहीं रहा है. ऐसा करके ट्रंप उत्तर कोरिया को डराने या रोकने में नाकाम रहे.

इसी तरह ट्रंप उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने के लिए चीन के भरोसे बैठे रहे. वह चीन के ऊपर उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाते रहे. इसके लिए उन्होंने चीन को छूट भी दी. ट्रंप ने चीन को अपनी मुद्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाली सूची से बाहर किया, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया.

अप्रैल महीने में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मार-आ-लागो समिट में सकारात्मक रुख दिखाया था. हालांकि उत्तर कोरिया के हाल के उकसावे भरे क़दमों पर चीन की बड़ी सधी हुई प्रतिक्रिया रही है. चीन निंदा की रस्मअदायगी के साथ सभी पक्षों से शांति बरतने की अपील करता रहा.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

अमरीका के पास उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ तत्काल क़दम उठाने के सीमित विकल्प हैं. उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई भी इतना आसान नहीं है.

रिपब्लिकन सीनेटर्स जॉन मैक्केन और लिंडसे ग्राहम की युद्धकारी सिफ़ारिशों के बावजूद अमरीका के लिए युद्ध का जोखिम उठाना आसान नहीं है. उत्तर कोरिया पर सैन्य कार्रवाई कर उसे सफलता हाथ लगने की संभावना कम है.

अमरीका के लिए उत्तर कोरिया की सामरिक शक्ति और राजनीतिक नेतृत्व को बेदखल करना आसान नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के ज़रिए फिर से प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि इस मामले में राजनीतिक प्रक्रिया काफ़ी धीमी है. उत्तर कोरिया को लेकर किसी चीज़ पर अमल करवाने की संभावना आंशिक है.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

बातचीत भी यहां एकतरफ़ा होती है. हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून अमरीका गए थे. उन्होंने उत्तर कोरिया से बातचीत की पहल को रणनीति का हिस्सा बनाने पर विचार करने को कहा है, लेकिन इसके लिए भी एक सीमित दायरा है.

अभी हालात प्योंगयांग (उत्तर कोरिया की राजधानी) के पक्ष में हैं. ऐसे में अमरीका के साथ बैठकर बात करने की संभावना बहुत कम है. उत्तर कोरिया अपने सैन्य आधुनीकीकरण की रफ़्तार को बढ़ा सकता है. उत्तर कोरिया को लेकर विश्व समुदाय में भी कोई सहमति जैसे हालात नहीं हैं.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

इसी हफ़्ते जर्मनी में जी20 सम्मेलन में अमरीका, दक्षिण कोरिया और जापान के नेता उत्तर कोरिया को लेकर काफ़ी सक्रिय रहेंगे. इस मामले में ये रूस और चीन को भी साथ लाने की हर कोशिश करेंगे.

इनकी कोशिश होगी कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ एक मत से कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाए. उत्तर कोरिया के मामले में वर्तामान संकट दोगुना है.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

इस सफल परीक्षण से उत्तर कोरियाई नेता का आत्मविश्वास और बढ़ा है. उत्तर कोरिया को जोखिम उठाने का साहस मिला है. ऐसे में सैन्य अस्थिरता बढ़ेगी.

यहां अस्थिरता बढ़ती है तो अनुमान के उलट चीज़ें सामने आ सकती हैं. अमरीका को बेहद अरुचिकर हक़ीक़त का सामना करना पड़ रहा है. उसे लग रहा है कि उत्तर कोरिया बातचीत की सारी संभावनाओं को ख़त्म कर रहा है.

ऐसे में इसे वह टाल देने की राह अपना सकता है. एक राष्ट्रपति के लिए असुविधाजनक सच से बचने लिए उसे फिर से पारिभाषित करना या फिर उसकी उपेक्षा कर देना ज़्यादा आसान होता है.

उत्तर कोरिया

इमेज स्रोत, Getty Images

उत्तर कोरिया से मुंह चुराना और उस इलाक़े के दूसरे देशों को अपनी आर्मी को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना एक बड़ी भूल होगी. ऐसा करना भविष्य को और असुरक्षित बनाना है.

अगर ट्रंप ख़ुद को समझौते की कला में माहिर समझते हैं तो उन्हें डराने वाली सत्ता के ख़िलाफ़ ट्विटर के ज़रिए मेगाफ़ोन डिप्लोमैसी और चतुराई से भरा रुख अपनाना चाहिए.

ट्रंप को इसमें अपने निकटतम सहयोगी दक्षिण कोरिया का शामिल करना चाहिए. दक्षिण कोरिया के ज़रिए उत्तर कोरिया को उच्चस्तरीय राजनीतिक छूट देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है.

अमरीका प्योंगयांग में एक यूएस मिशन की स्थापना या कोरियाई प्रायद्वीप में बलों की तैनाती में कटौती कर एक कोशिश को अंजाम दे सकता है. अभी अमरीका को तत्काल ज़रूरत है कि वह उत्तर कोरिया पर प्रतिक्रियावादी रणनीति के मुक़ाबले एक ठोस और टिकाऊ रणनीति पर काम करे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)