रेत में कैसे हरियाली लाता है इसराइल?

इमेज स्रोत, Getty Images
हथियार और रडार टेक्नॉलॉजी के अलावा इसराइल दुनिया में अपनी सिंचाई प्रौद्यौगिकी के लिए भी जाना जाता है.
उसने दुनिया को दिखाया है कि कैसे रेगिस्तान को हरा-भरा किया जा सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसराइल यात्रा के दौरान कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच समझौता होने की उम्मीद है.
पानी की हर बूंद का इस्तेमाल करना इसराइल से सीखा जा सकता है.
वे समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाते हैं. बेकार पानी को रिसाइकिल कर उसका फिर से इस्तेमाल करते हैं.
इसराइल में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी का तकरीबन आधा हिस्सा रिसाइकल्ड होता है.

इमेज स्रोत, George Pickow/Three Lions/Hulton Archive/Getty
नेगेव रेगिस्तान के बढ़ते दायरे और हरियाली बढ़ाने के लिए इसराइली कोशिशों पर एक नज़र
1. उन्होंने ऐसे पेड़ लगाए जो हवा से नाइट्रोजन सोख सकते थे और उसे ज़मीन तक पहुंचा सकते थे. इससे बिना किसी खर्च के ज़मीन की उत्पादकता बनी रही और ये व्यवस्था लंबे समय के लिए टिकाऊ है.
2. इसराइल की ड्रिप इरिगेशन टेक्नॉलॉजी. इसके पीछे विचार ये था कि फसलों को पानी की कुछ बूंदे अगर लंबे समय तक दी जाएं तो ये कारगर हो सकता है. ये पानी या तो जमीन की सतह पर पहुंचा दिया जाए या फिर उसके जड़ के आस-पास.
पौधे के निचले हिस्से तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप्स और ट्यूब्स का सहारा लिया जाता है. ड्रिप इरिगेशन का मकसद है पानी की कम से कम बर्बादी और ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल.
इसराइली इंजीनियर शिम्सा ब्लैस ने पहली बार बड़े और लंबे पाइप्स में प्लास्टिक के निकासी प्वॉयंट्स बनाकर ये सिंचाई तकनीक विकसित की थी.

इमेज स्रोत, MENAHEM KAHANA/AFP/Getty Images
3. विकासशील देशों में पेड़ काटने की रवायत के विपरीत इसराइल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए धूप का जहां तक हो सके, इस्तेमाल करता है.
4. वे ऐसी फसलों पर फ़ोकस कर रहे हैं जिन्हें खारे पानी या ख़राब क्वॉलिटी के पानी से सींचा जा सके. वे जैतून से लेकर अर्गन के पेड़ों तक में इसका प्रयोग कर रहे हैं.
5. वे ऐसे पेड़ पौधों पर ध्यान दे रहे हैं जो रेगिस्तानी इलाकों में उगाये जा सकें. वे रेगिस्तानी इलाकों में पैसे और प्रोटीन के लिए एक्वाकल्चर को बढ़ावा दे रहे हैं जिसके लिए खारे पानी की जरूरत होती है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












