ब्रिटेन में त्रिशंकु संसद, आगे क्या होगा?

ब्रिटिश संसद

इमेज स्रोत, AFP

ब्रिटेन के आम चुनाव के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि जिस पूर्ण बहुमत की उम्मीद में प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने समय से पहले चुनाव कराया था, वो अधूरी रह जाएगी.

शुरुआती नतीज़ों से बीबीसी ने अनुमान लगाया है कि कंज़र्वेटिव पार्टी को 316 सीटें जबकि लेबर पार्टी को 265 सीटें मिल सकती हैं. जबकि पूर्ण बहुमत के लिए 326 सीटें चाहिए.

स्कॉटिश पार्टी नेशनल पार्टी को इस चुनाव में नुकसान का सामना करना पड़ रहा है लेकिन गठबंधन की स्थिति में उसके लेबर पार्टी के साथ जाने की प्रबल संभावना है.

त्रिशंकु संसद की स्थिति में हो सकता है कि दूसरे नंबर पर रहने वाली लेबर पार्टी गठबंधन सरकार बना ले.

पिछले आम चुनाव के मुकाबले इस बार बढ़त बनाने वाली लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने कंज़र्वेटिव पार्टी की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे से इस्तीफ़ा देने की मांग की है.

ब्रितानी चुनाव

इमेज स्रोत, Getty Images

13 जून को होगी संसद की बैठक

इससे पहले 2010 में किसी भी पार्टी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला था और इस स्थिति में कंज़र्वेटिव पार्टी ने लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी के समर्थन से गठबंधन सरकार बनाई थी.

हालांकि जबतक किसी पार्टी की ओर से पूर्ण बहुमत का दावा पेश नहीं होता टेरीज़ा मे पद पर बनी रहेंगी और अगर उनकी पार्टी असफल रहती है और लेबर पार्टी ज़रूरी समर्थन हासिल करने का दावा पेश करती है तो जेरेमी कॉर्बिन प्रधानमंत्री बनेंगे.

आधिकारिक गाइडलाइंस के मुताबिक 13 जून को संसद की पहली बैठक होगी और उससे पहले टेरीज़ा मे को ज़रूरी समर्थन हासिल करना होगा या इस्तीफ़ा देना होगा.

अगर स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी), एक्ज़िट पोल के मुताबिक सीटें जीतती है तो वो सरकार गठन में अहम रोल अदा करेगी.

हालांकि उसके लेबर पार्टी को समर्थन देने की संभावना है क्योंकि एसएनपी नेता निकोला स्टर्जन ने कहा है कि उनकी पार्टी प्रगतिशील गठबंधन का हिस्सा बनना चाहेगी.

टेरीज़ा मे

इमेज स्रोत, Getty Images

इस्तीफ़ा दे सकती हैं टेरीज़ा मे

बीबीसी राजनीतिक संपादक लॉरा कुएनसबर्ग के अनुसार, "'टेरीज़ा मे ने जब कंज़र्वेटिव पार्टी मुख्यालय में लोगों संबोधित किया तो वो बहुत शांत और उदास थीं, लेकिन उन्हें साफ साफ अपने भविष्य के बारे में कुछ नहीं कहा."

लॉरा के मुताबिक, 'पद पर बने रहने के बारे में टेरीज़ा मे ने कुछ नहीं कहा और इस बारे में कुछ न कहने का मतलब है कि उन्होंने अभी कोई फैसला नहीं किया है और इस्तीफ़े का विकल्प बनाए रखा है.'

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)