क़तर का फूटा गुस्सा, समझौते से किया इनकार

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क़तर ने अरब देशों के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अपनी वैश्विक नीति का समर्पण नहीं करने की कसम खाई है.
क़तर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्लुरहमान अल थानी ने रॉयटर्स से बात करते हुए कहा है कि वे बढ़ते हुए संकट को खत्म करने के लिए राजनीतिक ढंग के पक्षधर थे और इसके सैन्य समाधान नहीं थे.
क़तर ने इस्लामी चरमपंथ का नेतृत्व करने से भी इनकार किया है.

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उन्होंने कहा है, "हमें इसलिए अलग थलग किया जा रहा है क्योंकि हम सफल और प्रगतिशील हैं, हम शांति समर्थक हैं आतंकवाद के समर्थक नहीं और हम समर्पण के लिए तैयार हैं और कभी भी अपनी वैश्विक नीति की स्वतंत्रता का समर्पण नहीं करेंगे."
क़तर संकट पर अब तक क्या हुआ?
- मिस्र ने सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि क़तर के एक बिलियन अमरीकी डॉलर देकर शाही परिवार के सदस्यों को छुड़ाने से जुड़े मामले की जांच की जाए. इन सदस्यों को दक्षिणी इराक में शिकार के दौरान कैद कर लिया गया था
- सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने ओमान जाकर बातचीत करने की कोशिश की लेकिन ओमान के अधिकारियों ने अब तक कोई रुचि नहीं दिखाई है. ओमान ने अब तक क़तर के खिलाफ क़दम नहीं उठाए हैं
- क़तर ने कहा है कि ईरान की तरफ से खाना और पानी देने की पेशकश की है लेकिन क़तर ने अब तक ये पेशकश स्वीकार नहीं की है
- रूस ने कहा है कि क़तर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद शनिवार को मॉस्को पहुंचेंगे जहां वह अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे. टास न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक इस मुलाकात में तात्कालिक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

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अल जज़ीरा पर सायबर हमला
क़तर के न्यूज़ नेटवर्क अल जज़ीरा ने कहा है कि वह सायबर अटैक से जूझ रही है.
नेटवर्क ने अपने ट्वीट में लिखा है, "अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क सभी सिस्टमों, वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सायबर अटैक हुआ है.
अल जज़ीरा खाड़ी देशों के बीच खड़े हुए इस विवाद के केंद्र में है और खाड़ी देशों ने इस नेटवर्क को बीती मई में ब्लॉक कर दिया था.
अल जज़ीरा ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि नेटवर्क की सभी कार्यक्रम जारी थे लेकिन सायबर अटैक तेज हो रहे हैं और नए नए रूपों में सामने आ रहे हैं.
इसी बीच क़तर सरकार के टीवी स्टेशन ने कहा है कि चैनल से जुड़ी वेबसाइट को तात्कालिक आधार पर हैकिंग की कोशिशों के चलते बंद किया जा रहा था.

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क्या क़तर की प्रगतिशील वैश्विक नीति है संकट की वजह
बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉबिंस के अनुसार, ये पूरा क्षेत्र राजाओं और अमीरों का है जो सामान्य तौर पर स्थानीय स्तर पर इतनी पकड़ रखते हैं कि उनकी सत्ता के लिए खतरा बनने वाले किसी भी विरोध के किसी भी स्वर को कुचल सकते हैं.
लेकिन क़तर के अमीर उन नीतियों पर चलते हैं जो सामान्यत: सुन्नी इस्लाम के सुपरपॉवर सऊदी अरब के संकीर्ण खांचे में फिट नहीं होती.
सऊदी अरब को क़तर की बातचीत करने की नीति सुन्नी एकता के लिए संकट दिखाई पड़ती है क्योंकि क़तर के अमीर और उनके मंत्री शिया मुस्लिम देश ईरान के साथ बातचीत और बेहतर संबंधों का पक्षधर हैं.
सऊदी अरब इस नीति का धुर विरोधी है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सऊदी राजा सलमान के पक्ष में होने की बात सामने आने के बाद सऊदी अरब क़तर के खिलाफ शत्रुता को कार्रवाई में बदलना चाहता है.
रॉबिंस कहते हैं कि रूस के इस मामले में पड़ने से समाधान की कोशिशें मुश्किल हो सकती हैं.
सऊदी अरब ने रखी क़तर के सामने शर्त
सऊदी अरब ने क़तर के सामने जमीन और हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों को हटाने की शर्त रखी है.
सऊदी विदेश मंत्री अदेल अल-ज़ुबैर ने कहा है अगर क़तर समाधान चाहता है तो उसे कब्जे वाले क्षेत्रों में फिलिस्तीन इस्लामी संगठन हमास और मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध तोड़ने होंगे.

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इसी बीच बहरीन ने सयुंक्त अरब अमीरात की तरह क़तर के समर्थन में बयान देने वालों को जेल में डालने की धमकी है.
बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने कहा है, "सोशल मीडिया, ट्विटर या संवाद के किसी अन्य तरीके से क़तर की सरकार का समर्थन या क़तर को लेकर बहरीन सरकार की नीति का विरोध करने पर पांच साल की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है.
इसी बीच टर्की ने क़तर के समर्थन में सैन्य मदद देने के लिए कानून पास किया है.
क़तर में अमरीका का सबसे बड़ा एयरबेस भी है.
अमरीकी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के राजा सलमान को फोन करके उनसे खाड़ी देशों में एकता लाने का आग्रह किया. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप पहले क़तर पर दवाब डाले जान को लेकर श्रेय ले चुके हैं.
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