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आतंकवाद से पीड़ित देशों में ट्रंप ने भारत का नाम लिया, पाकिस्तान का क्यों नहीं?
सऊदी अरब में हुए अमरीका-अरब-इस्लामिक सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को बोलने का मौक़ा नहीं मिला था. इसे लेकर पाकिस्तान में चर्चा गर्म है.
अब पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफ़ीस ज़कारिया ने इस पर सफ़ाई दी है.
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के किंग सलमान ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ समेत दूसरे मुस्लिम देशों से अपनी बात कहने का मौक़ा नहीं मिलने पर खेद जताया है.
ज़कारिया ने कहा कि समय की कमी के कारण कई मुस्लिम देशों के नेताओं को इस सम्मेलन में बोलने का मौक़ा नहीं मिला.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि 30 मुस्लिम देशों के नेताओं को समय की कमी के कारण बोलने नहीं दिया गया और उन देशों में पाकिस्तान भी था.
ज़कारिया ने कहा कि इसके लिए सऊदी अरब के किंग सलमान ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से खेद जताया है.
इमरान ख़ान का शरीफ़ पर हमला
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने इसे लेकर कहा है कि सऊदी में पाकिस्तानी पीएम से जिस तरह का व्यवहार किया गया उससे पाकिस्तानियों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है.
इमरान ख़ान ने इस्लामाबाद में सोमवार को पत्रकारों से कहा था, ''दुनिया भर के पाकिस्तानियों की तरफ़ से मेरे पास कई मैसेज आए हैं कि सऊदी में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे में नवाज़ शरीफ के साथ जैसा व्यवहार हुआ वह शर्मिंदा करने वाला था.''
सऊदी दौरे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की डोनल्ड ट्रंप से भी मुलाक़ात नहीं हो पाई थी. इस सम्मेलन को ट्रंप ने संबोधित किया था. ट्रंप ने अपने भाषण में आतंकवाद को लेकर कई बातें कही थीं. उन्होंने कहा था कि कुछ देश आतंकवाद को वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं.
पाकिस्तान का नाम क्यों नहीं लिया?
आतंकवाद से पीड़ित देशों में ट्रंप ने भारत का भी नाम लिया था. पाकिस्तान में सवाल उठ रहा है कि ट्रंप ने पाकिस्तान का नाम आतंकवाद से पीड़ित देशों में क्यों नहीं लिया.
इस सवाल पर भी ज़कारिया ने सफ़ाई दी है. उन्होंने कहा, ''अगर राष्ट्रपति ट्रंप का भाषण ध्यानपूर्वक सुना जाए तो उन्होंने केवल उन देशों का नाम लिया था जो बैठक में मौजूद नहीं थे.
इस शिखर सम्मेलन में नवाज़ शरीफ को बोलने का मौका नहीं मिलने पर पाकिस्तानी मीडिया, सोशल मीडिया और विपक्षी दलों ने विदेश नीति की विफलता करार दिया है.
इसके अलावा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के भाषण में आतंकवाद के खिलाफ़ युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका या चरमपंथ से प्रभावित होने वाले देशों में नाम नहीं लिए जाने पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है.
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