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'नवाज़ शरीफ़ सरकार जनता के अधिकारों की बलि ना चढ़ाए'
पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मा जहांगीर ने कहा है कि सरकार लोगों की स्वतंत्रता को छीन कर सेना को खुश करने की कोशिश कर रही है.
बीबीसी उर्दू सेवा के मुताबिक, उन्होंने मुस्लिम लीग की सरकार से कहा है कि उसे जो कुछ भी करना है वो अपने बलबूते पर करे, न कि जनता के अधिकारों को बलि चढ़ाकर.
फ़ेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफ़आईए) की ओर से सोशल मीडिया पर उदारवादी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं पर अस्मा जहांगीर का बयान आया है.
पाकिस्तानी के प्रमुख अख़बार डान के मुताबिक एफ़आईए ने ऐसे दर्जनों लोगों की पहचान की है जो सोशल मीडिया पर कथित तौर पर पाकिस्तानी सेना पर सवाल उठाते हैं.
अख़बार के मुताबिक इसमें विपक्षी पार्टियों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हैं. कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.
डॉन अख़बार ने एफ़आईए के एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि दर्जनों लोगों की पहचान हो गई है और इनमें से कुछ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.
'आलोचना बर्दाश्त नहीं'
अस्मा जहांगीर ने कहा- "प्रगतिशील लोगों पर कार्रवाई, गृहमंत्री के इस बयान के बाद हो रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि सेना के ख़िलाफ़ किसी प्रकार की आलोचना बर्दाश्त नहीं है."
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अपने सैनिकों की भूमिका पसंद करते हैं लेकिन जब वे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर- राजनीति या व्यापार में कदम रखते हैं तो लोगों को उसकी आलोचना का अधिकार है.
हिरासत में पूछताछ
आस्मा ने ये भी कहा कि अगर इस तरह लोगों को पकड़ा गया तो यह सेना की अपनी प्रतिष्ठा के लिए अच्छा नहीं होगा.
उनके मुताबिक जिन लोगों की स्वतंत्रता को छीना जा रहा है वह अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे और ये अदालतों की बहुत बड़ी परीक्षा होगी.
उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि अदालतें यदि लोगों की जान, माल, और स्वतंत्रता की रक्षा नहीं कर सकती है, तो हमें बाक़ी बातें नहीं चाहिए."
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