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भद्रक में साम्प्रदायिक हिंसा, 35 लोग गिरफ़्तार
- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
सोशल मीडिया पर राम और सीता के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद ओडिशा के भद्रक शहर में गुरुवार से शुरू हुई साम्प्रदायिक हिंसा अब भी जारी है.
शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है और स्कूल कॉलेजों को बंद कर दिया गया है.
सुप्रिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस दिलीप कुमार दास ने कहा है कि पुलिस ने हिंसा में शामिल 35 लोगों को गिरफ़्तार किया है और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश हो रही है.
हिंसा और आगजनी में अभी तक किसी की जान नहीं गई है, लेकिन जगह जगह लूट और आगजनी की घटनाएं जारी हैं.
कई घरों और दुकानों को जलाने की ख़बर है. शहर में शांति बनाए रखने के लिए 35 प्लाटून पुलिस बल तैनात किए गए हैं.
संवेदनशील इलाकों में सशस्त्र पुलिस के दस्ते गश्त लगा रहे हैं. शुक्रवार शाम से जारी कर्फ्यू की अवधि बढ़ाकर शनिवार छह बजे तक कर दी गई है.
राज्य के महानिदेशक केबी सिंह का कहना है कि 'स्थिति काबू' में है.
शहर में बिगड़ते हालात के मद्देनज़र महानिदेशक और गृह सचिव असित त्रिपाठी शुक्रवार शाम से ही भद्रक में डेरा डाले हुए हैं.
भद्रक से केबी सिंह ने बीबीसी को बताया, "कुछ छिटपुट लूटपाट की घटनाएं हो रहीं हैं, लेकिन कहीं से भी गुटों के बीच लड़ाई की कोई ख़बर नहीं है."
भद्रक में 31 मार्च से जिलाधीश का पद खाली था, जिसे शुक्रवार को कटक म्युनिसिपल कार्पोरेशन के कमिश्नर ज्ञान रंजन दास को आनन-फानन में नियुक्त कर भरा गया.
नवीन पटनायक सरकार ने उन्हें तत्काल मोर्चा संभालने के आदेश दिए. वो शुक्रवार रात भद्रक पहुँच कर अपनी ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं.
शहर में सभी स्कूलों और कॉलेजों को बुधवार तक बंद कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सहित कई विशिष्ट लोगों ने जनता से शहर में शांति बनाए रखने की अपील की है.
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की भुवनेश्वर में 15 और 16 अप्रैल को बैठक होने वाली है.
कहा जा रहा है कि इसी बैठक में 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत का ख़ाका तैयार किया जाएगा.
कुछ लोगों का ये भी कहना है कि भद्रक की घटना राज्य में साम्प्रदायिक तापमान बढ़ाने वाली साबित हो सकती है, जिससे आने वाले समय में ध्रुवीकरण तेज होगा, जो कि बीजेपी के चुनावी अभियान के अनुकूल साबित हो सकता है.
ओडिशा में दंगे या साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं कम ही होती हैं क्योंकि मिश्रित आबादी वाले इलाक़े बहुत कम हैं.
भद्रक ओडिशा के उन चुनिंदा शहरों में से एक है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग काफ़ी संख्या में है.
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